इटली के एक गांव में 80 रुपये का मकान, पूरी करनी होगी ये आसान शर्त

इटली जैसे अमीर देश में घर खरीदने का मौका मिल रहा है। वह भी सिर्फ 80 रुपए के खर्च में। इटली के ओलोलाई टाउन में बिक रहे हैं 200 घर।

इटली के एक गांव में 80 रुपये का मकान, पूरी करनी होगी ये आसान शर्त
अमित झा
अमित झा

October 3,2019 12:46

दुनिया में शायद ही ऐसा कोई होगा जो अपना घर न चाहता हो। ऊपर से अगर वो आपकी सोच से भी सस्ताे हो, इटली में एक ऐसी ही जगह है जहां सिर्फ 80 रुपये में मकान मिल रहा है। दुनिया का कोई भी व्य क्ति यहां मकान खरीद सकता है। इटली में एक कस्बास है ओलोलाई टाउन, इस कस्बेह के लोग लगातार यहां से जाकर शहरों में बस रहे हैं। यहां की आबादी पहले हजारों में थी जो बीते 50 सालों में घटकर सिर्फ 1300 रह गई है। लोग घर छोड़कर जा रहे हैं और मकान वीरान पड़े हुए हैं। इसी चिंता में कि यह कस्बा3 एक दिन कहीं घोस्ट  टाउन न बन जाए यहां के मेयर ने वीरान पड़े मकानों को बेचने का फैसला किया है। वह भी सिर्फ 80 रुपये में। मेयर ने ऐसे 200 मकानों को बेचने का फैसला किया है।

 

सिसली, इटली

 

क्यों घर की कीमत इतनी कम लगी

 

बिजनेस इनसाइडर में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इटली का एक टाउन है ओलोलोई, जो कल्चरल रूप से काफी पॉपुलर रहा है। यह समुद्र के किनारे बसा एक छोटा सा कस्बा है। यहां की आबादी पहले काफी थी जो पिछले 50 साल से लगातार घटती जा रही है। लोग कस्बा छोड़कर शहरों में जाकर बस जा रहे हैं। जहां पहले हजारों की आबादी थी, अब घटकर सिर्फ 1300 रह गई है। यहां सैंकड़ों घर वीरान पड़े हुए हैं। ऐसे में सरकार को यह डर है कि ओलोलाई कहीं घोस्ट टाउन न बन जाए। ऐसे में वहां की अथॉरिटी ने पहले ऐसे वीरान पड़े 200 घरों को बेचने का फैसला लिया है और हर घर की कीमत सिर्फ 80 रुपए लगाई है।

 

एक खास शर्त

 

दुनिया के हर आदमी के लिए ये खुला आमंत्रण है बस यहां मकान खरीदने की एक शर्त है। उस आसान सी शर्त को पूरी करके दुनिया का कोई भी व्यआक्ति यहां मात्र 80 रुपये में एक मकान खरीद सकता है। शर्त यह है कि मकान खरीदने के बाद उसे मकान का जीर्णोद्धार कराना होगा। इसकी रकम भी वहां की स्थामनीय सरकार ने तय कर दी है। रकम है 16 लाख रुपये। ओलोलाई के मेयर ने इस शर्त के पीछे की वजह स्पाष्टक करते हुए कहा है कि इतनी रकम लगाने के बाद लोग यहां जरूर रहेंगे। क्यों कि इतनी रकम मकान को सुंदर बनाकर वीरान छोड़ने के लिए तो कोई खर्च करेगा नहीं।

 

'एक यूरो' के मकान की इस योजना के चलते संबूका रातों रात दुनिया में मशहूर हो गया। योजना की शुरुआत के बाद से अब तक 40 मकान बाज़ार की सामान्य क़ीमतों पर बिक चुके हैं।

 

संबूका में मकान ख़रीदने वालों में सिर्फ़ विदेशी ही नहीं बल्कि इटली के आप्रवासी भी शामिल हैं। इन्हीं में एक हैं ग्लोरिया ओरिजी जो पहले इटली के मिलान शहर में रहती थीं लेकिन फिर पेरिस जा कर बस गईं।

 

ग्लोरिया ओरिजी

 

संबुका में मकान ख़रीदने के फ़ैसले के बारे में वो कहती हैं, 'मैं कई साल फ़्रांस में रही मगर हमेशा ही मेरी इच्छा थी कि इटली में मेरा एक घर हो। संबूका के बारे में मुझे सबसे ज़्यादा अच्छी लगी यहां की ख़ूबसूरती, यहां के लोगों की आत्मीयता जो और जगह कम देखने को मिलती है। यहां लोग खुले दिल के हैं और इसलिए मैने यहां मकान ख़रीदने का फ़ैसला किया।'

 

मारिसा मोंटलबानो भी संबूका की नई निवासी हैं। वो कहती हैं, 'मैं बचपन में अपने माता-पिता के साथ अमरीका चली गई थी। मैं 11 साल शिकागो में रही। उसके बाद जब संबूका लौटी तो शुरुआत मे यहां रहने में कुछ दिक्कते आईं। लेकिन फिर मैंने पाया कि यहां की सुंदरता और जीवनशैली सचमुच बेहतर है।'

 

संबूका के महापौर लियोनार्डो सिकासियो इस बात से काफी ख़ुश हैं कि यहां के ख़ाली पड़े मकानों में अब फिर से जीवन फलफूल रहा है।

 

वो कहते हैं, 'यह योजना काफ़ी सफल रही है।'

 

संबूका की इस योजना की सफलता से इटली के दूसरे ऐसे गांव भी प्रेरित हुए हैं जहां आबादी घटती जा रही है। वो भी इस प्रकार की योजना शुरू करने के बारे में विचार कर रहे हैं।

 

मगर इस योजना की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि क्या विदेशियों के साथ-साथ इतालवी आप्रवासी भी इससे आकर्षित हो कर स्वदेश लौटने का मन बनाएँगे।

 

 

 

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