सौरभ कृपाल बनेंगे देश के पहले ‘गे’ जज, जानिये कौन है ये शख्स ?

सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के साथ ही हाईकोर्ट का जज बनने का गौरव हासिल कर नया इतिहास रच दिया है।

सौरभ कृपाल बनेंगे  देश के पहले ‘गे’ जज, जानिये कौन है ये शख्स ?

देश के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था जो आज हुआ है जी हाँ साथियों आज देश को पहला ‘गे’ जज मिल चुका है, आपको बता दें, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एन वी रमना की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने अधिवक्ता सौरभ कृपाल को दिल्ली हाईकोर्ट  का न्यायाधीश नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में किरपाल की प्रस्तावित नियुक्ति उनकी कथित यौन अभिरूचि के कारण विवाद का विषय थी। किरपाल को 2017 में तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल के नेतृत्व में दिल्ली उच्च न्यायालय के कॉलेजियम की ओर से पदोन्नत करने की सिफारिश की गई थी। इसके बाद उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के साथ ही हाईकोर्ट का जज बनने का गौरव हासिल कर नया इतिहास रच दिया है।

 

इससे पहले मार्च 2021 में में भारत के पूर्व मुख्‍य न्‍यायधीश एसए बोबडे ने केंद्र सरकार से सौरभ कृपाल को जज बनाए जाने को लेकर पूछा था कि सरकार इस बारे में अपनी राय स्‍पष्‍ट करे। वैसे इससे पहले चार बार ऐसा हो चुका है कि उनके नाम पर जज बनाए जाने को लेकर राय अलग रही है।

 

 

आपको बता दें सौरभ कृपाल के नाम पर सबसे पहले कोलेजियम ने 2017 में दिल्‍ली हाईकोर्ट का जज बनाए जाने को लेकर सिफारिश की थी। सौरभ कृपाल ने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन की है। वहीं उन्होंने ग्रेजुएशन में लॉ की डिग्री ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से ली है। पोस्टग्रेजुएट (लॉ) कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से किया है। सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने दो दशक तक प्रैक्टिस की है। वहीं उन्होंने यूनाइटेड नेशंस के साथ जेनेवा में भी काम किया है। सौरभ की ख्याति 'नवतेज सिंह जोहर बनाम भारत संघ' के केस को लेकर जानी जाती है। दरसअल, वह धारा 377 हटाए जाने को लेकर याचिकाकर्ता के वकील थे। सितंबर, 2018 में धारा 377 को लेकर जो कानून था।, उसे सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था।

 

समलैंगिकता क्या है ये भी जान लो

समलैंगिकता का मतलब होता है किसी भी व्यक्ति का समान लिंग के व्यक्ति के प्रति यौन आकर्षण। साधारण भाषा में किसी पुरुष का पुरुष के प्रति या महिला का महिला के प्रति आकर्षण। ऐसे लोगों को अंग्रेजी में 'गे' या 'लेस्बियन' कहा जाता है।

 

कॉलेजियम सिस्टम भी जान लो

कॉलेजियम में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के अलावा चार सीनियर मोस्ट जजों का पैनल होता है। यह कॉलेजियम ही सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के अप्वाइंटमेंट और ट्रांसफर की सिफारिशें करता है। ये सिफारिश मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भेजी जाती हैं। इसके बाद अप्वाइंटमेंट कर दिया जाता है।

 

सौरभ कृपाल, जस्टिस बी एन कृपाल के बेटे हैं जो मई 2002 से नवंबर 2002 तक सुप्रीम कोर्ट के 31 वें मुख्य न्यायाधीश थे। सौरभ कृपाल, दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से फिजिक्स में बीएससी ऑनर्स है। बीएससी की पढ़ाई के बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड से लॉ की पढ़ाई की। यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज से उन्होंने लॉ में मास्टर की डिग्री ली। भारत आने से पहले जेनेवा में यूनाइटेड नेशंस के लिए कुछ समय तक काम किया था। लॉ प्रैक्टिस के क्षेत्र में उन्हें करीब दो दशक पुराना अनुभव है |

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