राष्ट्रपिता गांधी जी का सपना पूरा करता स्वच्छता अभियान

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का मानना था कि साफ-सफाई, ईश्वर भक्ति के बराबर है और इसलिए उन्होंने लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबंधी शिक्षा दी थी और देश को एक उत्कृष्ट संदेश दिया था।

राष्ट्रपिता गांधी जी का सपना पूरा करता स्वच्छता अभियान
अमित झा
अमित झा

October 2,2019 08:57

महात्‍मा गांधी के स्‍वच्‍छ भारत के स्‍वप्‍न को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 2 अक्‍टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया और इसके सफल कार्यान्वयन हेतु भारत के सभी नागरिकों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की। इस अभियान का उद्देश्य पांच वर्ष में स्वच्छ भारत का लक्ष्य प्राप्त करना है ताकि बापू की 150वीं जयंती को इस लक्ष्य की प्राप्ति के रूप में मनाया जा सके। स्वच्छ भारत अभियान सफाई करने की दिशा में प्रतिवर्ष 100 घंटे के श्रमदान के लिए लोगों को प्रेरित करता है।

 

गांधी

 

खुले में शौच जाने की परंपरा मानव सभ्यता के प्रारंभ से ही पुरानी है। भारत के करोड़ों लोगों के लिए यह सदियों से जीवन शैली का हिस्सा है। 1980 के दशक से ही हमारे यहां सारी सरकारें राष्ट्रीय स्वच्छता कार्यक्रम संचालित करती आ रही हैं, लेकिन 2014 तक केवल 39 प्रतिशत भारतीयों को ही शौच की सुरक्षित सुविधा उपलब्ध थी। कारण यह कि शौचालय तक लोगों की पहुंच होना कोई ढांचागत समस्या नहीं है। इस मामले में लोगों का व्यवहारगत रवैया और सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ कहीं ज्यादा बड़ी भूमिका निभाता है।

 

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हमारे देश में यह त्रसदी रही कि जिस स्वच्छता को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी स्वतंत्रता से भी ज्यादा आवश्यक मानते थे उस विषय को आजादी के बाद यथोचित प्राथमिकता नहीं दी गई। 1947 से लेकर 2014 तक हम केवल 39 प्रतिशत घरों तक ही शौचालय की सुविधा पहुंचा पाए थे। इसके अभाव में न केवल हमारी माताओं और बहनों को काफी परेशानी हो रही थी, बल्कि हमारे बच्चे भी इस अभाव के दुष्प्रभाव से पीड़ित थे। हमारी माताएं और बहनें तो आजाद देश में भी उजाले की कैदी की तरह थीं। उन्हें अंधेरे का इंतजार करना होता था ताकि वे शौच के लिए जा सकें। यह मानवीय गरिमा के खिलाफ तो था ही, महिलाओं के स्वाभिमान पर सीधा आघात भी था। इसे बदलने की नितांत आवश्यकता थी।

 

 

गांधी जी ने युवावस्था में ही भारतीयों में स्वच्छता के प्रति उदासीनता को महसूस कर लिया था। उन्होंने किसी भी सभ्य और विकसित मानव समाज के लिए स्वच्छता के उच्च मानदंड की आवश्यकता को समझा। गांधी जी कहते थे कि कार्यकर्ता को गांव की स्वच्छता और सफाई के बारे में जागरूक रहना चाहिए और गांव में फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने चाहिए। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित हमारे प्रधानमंत्री जी ने देश की कमान संभालते ही वर्ष 2014 में लाल किले की प्राचीर से देशवासियों से यह आह्वान किया कि हम बापू के सपनों का स्वच्छ भारत निर्मित करें। उन्होंने यह संकल्प लिया कि अगले पांच वर्षो में लोक सहयोग से हम स्वच्छ भारत का निर्माण करेंगे और गांधी जी की 150वीं जयंती पर यह कृतज्ञ राष्ट्र उनके कदमों में एक स्वच्छ भारत समर्पित करेगा। उस वक्त किसने यह यकीन किया होगा कि पांच वषों में 60 करोड़ लोगों का व्यवहार परिवर्तन संभव हो जाएगा और भारत सदियों से खुले में शौच की प्रथा से मुक्त हो जाएगा? उनके संकल्प की आज सिद्धि हुई है। उन्होंने न केवल जन-मानस को स्वच्छ भारत के लिए प्रेरित किया,अपितु समाज के सभी वर्गो को अपने स्वच्छता के प्रति समर्पण से निरंतर अनुप्राणित किया। उन्होंने स्वच्छता के लिए अभूतपूर्व धनराशि भी उपलब्ध कराई ताकि स्वच्छ भारत के क्रियान्वयन में धन की कमी बाधा न बने।

 

गांधी जी के सपनों का भारत, स्वच्छ भारत बनाने के अभियान में जुटें

 

स्वच्छ भारत अभियान के प्रारंभ के बाद से देश में 10 करोड़ से ज्यादा शौचालयों का निर्माण हुआ है। देश के सारे जिले और सारे गांव खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं। आज जो आसान प्रतीत हो रहा है वह हमारे लाखों स्वच्छाग्रहियों, सरपंचों, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं, बच्चों, अभिभावकों और जन-सामान्य के असामान्य परिश्रम का प्रतिफल है। छह लाख से ज्यादा गांवों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करना बहुत ही कठिन कार्य था। हमने सामुदायिक उत्प्रेरण की तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए इन गांवों को खुले में शौच से मुक्त बनाने की तकनीकों का सफलतापूर्वक उपयोग किया और यह सुनिश्चित किया कि लोग अपनी जिम्मेदारियों को समङों और अपने गांवों को स्वच्छ बनाने में अपनी भूमिका अदा करें।

 

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स्वच्छ भारत वस्तुत: एक बहुत बड़ा सामाजिक परिवर्तन एवं सामाजिक क्रांति का कार्यक्रम बना है। स्वच्छ भारत ने समाज को जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। सभी वगोर्ं और सभी धर्मो के लोगों ने एक साथ आकर स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाया है। स्वच्छ भारत अभियान के दौरान सभी जातियों के लोगों ने आपसी भेद-भाव को भूलकर अपने ग्राम को खुले में शौच से मुक्त बनाया। इस कार्यक्रम में अनेक ऐसे पड़ाव आए जब समस्त ग्रामवासियों ने एक साथ बैठकर आपसी बैर-भाव को भूलकर अपने गांव को खुले में शौच से मुक्त बनाने हेतु उल्लेखनीय कार्य किया। इस कार्यक्रम ने महिलाओं को और अधिक मुखर बनाया। आपसी सहयोग से उन्होंने न सिर्फ खुले में शौच की अपनी समस्या का निदान किया, बल्कि अनेक कुरीतियों का भी निदान किया।

 

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खुले में शौच वाले गांवों में डायरिया के मामले ओडीएफ यानी खुले में शौच से मुक्त गांवों की तुलना में 46 प्रतिशत अधिक पाए गए। यूनिसेफ का अनुमान है कि मुख्यत: स्वच्छता की कमी के कारण भारत के पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में से लगभग 38 प्रतिशत बच्चे शारीरिक और संज्ञानात्मक रूप से कुपोषित हैं। हमारे भविष्य के कार्य बल का इतना बड़ा हिस्सा अपनी पूर्ण उत्पादक क्षमता तक नहीं पहुंच पा रहा था। अध्ययन से यह परिलक्षित होता है कि स्वच्छ भारत अभियान के क्रियान्वयन के बाद इस दिशा में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।

 

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