इस्तेमाल हो चुके खाद्य तेल से बॉयोडीजल बनाने की योजना की 100 शहरों में शुरुआत

केन्द्र सरकार ने बायोफ्यूल सैक्टर को प्रोत्साहन देने के लिए निर्णय लिया है कि सभी तेल कंपनियां तीन वर्ष तक प्रयोग किए गए खाद्य तेल से बने बायोडीजल ही खरीदेंगी।

इस्तेमाल हो चुके खाद्य तेल से बॉयोडीजल बनाने की योजना की 100 शहरों में शुरुआत
विश्व बायोफ्यूल दिवस पर की गई इस घोषणा से बायोडीजल बनाने वाली वह सभी कंपनियां, जो उपयोग में लाये गये खाद्य तेल का प्रयोग अपने करते माल के रूप में करती हैं, आश्वस्त हो गई हैं कि उनका पूरा उत्पादन सरकारी तेल कंपनियां सामान्य डीजल में मिलाने के लिए खरीदेंगी। यह योजना देश के 100 शहरों में शुरू की गई है।

 

इस योजना में सरकारी तेल कंपनियां, इंडियन आयल, भारत पैट्रोलियम और हिन्दुस्तान पैट्रोलियम बायोडीजल उत्पादकों को पहले वर्ष ₹51 प्रति लीटर, दूसरे वर्ष में ₹52.7 प्रति लीटर तथा तीसरे वर्ष में ₹54.5 प्रति लीटर मूल्य देंगी। पहले वर्ष के दौरान तेल कंपनियां ट्रान्सपोर्ट और जीएसटी खर्च का वहन भी करेंगी।

 

धर्मेन्द्र प्रधान का यह आदेश खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण आप इंडिया (FSSAI) द्वारा खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को जारी आदेश के ठीक एक दिन बाद आया है। खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को कहा गया था कि वह यह सुनिश्चित करें कि वह सभी खाद्य व्यापार करने वाले, जिनका वस्तुओं को प्रतिदिन तलने में 50 लीटर से अधिक तेल लगता है, तेल का तीन बार से अधिक पुर्नउपयोग न करें।

 

धर्मेन्द्र प्रधान ने इस अवसर पर 'रिपरपज यूज्ड कुकिंग आयल (RUCO)' स्टिकर और फोन एप भी जारी किया, जिससे उपयोग किए खाद्य तेल को एकत्र करने में मदद मिलेगी। जो रेस्टोरेंट और होटल उपयोग किए जा चुके खाद्य तेल को बेचना चाहते हैं, वह उपलब्धता की सूचना देने के लिए स्टिकर लगा सकते है।

 

प्रधानमंत्री ने पैट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को 2022 तक तेल के आयात पर निर्भरता घटाने का लक्ष्य दिया है और इसे उत्पादन बढ़ाकर, ऊर्जा की कार्यक्षमता बढ़ाकर, संरक्षण को प्रोत्साहन देकर तथा वैकल्पिक ईंधन को प्रोत्साहन देकर ही पूरा किया जा सकता है।  ही पूरा किया जा सकता है, प्रधान ने विश्व बायोईंधन दिवस 2019 पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा।

 

सरकार ऊर्जा के वैकल्पिक श्रोतों को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन दे रही है।

 

उन्होंने आगे कहा कि उनका मंत्रालय इथेनाल के उपयोग को प्रोत्साहन, दूसरी पीढ़ी के इथेनॉल, कम्प्रेस्ड बायोगैस और बायोडीजल की चार आयामी नीति पर कार्य कर रहा है

 

पैट्रोल में इथेनॉल अब लगभग 8 प्रतिशत तक मिलाया जाने लगा है, जल्दी ही यह 10 प्रतिशत तक हो जायेगा, प्रधान बोले। सरकार की योजना है कि अतिरिक्त खाद्यान्नों से इथेनॉल बनाया जाये, जो कई बार बर्बाद हो जाता है, इससे उसको रखने के खर्च में भी कमी आ जाएगी।

 

बायोडीजल ऊर्जा के वैकल्पिक श्रोतों की योजना में सबसे आसान है और इसके उत्पादन के लिए प्रचुर मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध है, मंत्री ने कहा। कूड़े से धन कमाने का यह बहुत अच्छा सिद्धांत है।

 

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा बायोफ्यूल्स 2018 की राष्ट्रीय नीति में वर्ष 2030 तक पैट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि डीजल में 5 प्रतिशत बायोडीजल मिलाने का लक्ष्य है।

 

प्रतिदिन खाद्य पदार्थों को तलने के लिए 50 लीटर से अधिक तेल का उपयोग करने वाली खाद्य व्यापार में लगी संस्थाओं के लिए अंतिम तिथि दो बार बढ़ाई जा चुकी है। अब उनसे कठोरता से तेल के उपयोग का रिकार्ड रखने के लिए कहा गया है, ताकि तेल का उपयोग तीन बार से अधिक न हो। FSSAI ने 9 अगस्त को खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि खाद्य तेल फूड चेन में बार बार प्रवेश न करें। आदेश FSSAI के संयुक्त निदेशक (नियामक एवं अनुपालन) पुष्प वानम ने जारी किया है।

 

आदेश में खाद्य व्यापार संस्थाओं से कहा गया है कि वह उपयोग किए गए खाद्य तेल को अनिवार्य रूप से अधिकृत एकत्र करने वाली एजेंसियों के पास जमा करायें और उन्होंने बायोडीजल उत्पादकों के द्वारा नियुक्त एजेंसियों की सूची दी है।

 

FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पवन कुमार अग्रवाल ने शनिवार को पत्रकारों को बताया कि एजेंसी जल्दी ही उपयोग किए गए खाद्य तेल पर नजर रखने और पता लगाने के लिए एक मोबाइल एप जारी करेगी।

 

प्रतिदिन 50 लीटर से अधिक खाद्य तेल का उपयोग करने वाली सभी खाद्य व्यापार संस्थाओं को रिकॉर्ड बनाना होगा, जिसमें तारीख के साथ तेल का नाम, तलने के लिए ली गई तेल की मात्रा, दिन के अंत में तेल की बची हुई मात्रा, उपयोग किए तेल के निपटान का तरीका और तारीख तथा इस तेल को लेने वाली एजेंसी। इसको एप के द्वारा देखा जा सकता है।

 

जब खाद्य तेल का कई बार उपयोग किया जाता है, यह अम्लीय और गहरे रंग का हो जाता है। इसके कारण तेल की अम्लीय वहां संरचना बदल सकती है। FSSAI खाद्य तेल उत्पादकों से रंग का चार्ट जारी करने के लिए भी कहेगी, जो या तो उत्पादन पर ही चिपकाए जायें या फिर उत्पादन के साथ जारी की गई पुस्तिकि में दिये जायें, जिससे लोगों को यह पहचान करने में सरलता होगी कि तेल ताजा है या उपयोग किया हुआ है। एक प्रमुख तेल उत्पादक अभी भी यह कर रहा है और हमारी योजना है कि दूसरों से भी यह करने के लिए कहें, अग्रवाल ने आगे कहा।

 

उन्होंने कहा कि निर्देश जारी करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपयोग किया गया खाद्य तेल न तो खाद्य पदार्थों को बनाने के उपयोग में लाया जाये, न ही वह फूड चेन में प्रवेश करें। हमने यह खाद्य उद्योग के लिए सुरक्षा मानक तय करने के लिए किया है। 9 अगस्त का आदेश यह सुनिश्चित करेगा कि आगे से इस नियम का सारथी से पालन हो, उन्होंने कहा।

 

खाद्य तेलों के दोबारा उपयोग करने का आदेश प्रारंभ में 30 जनवरी 2019 को जारी किया गया था और उसे प्रभावी बनाने की तारीख 1 मार्च 2019 तय की गई थी। उसके बाद 28 फरवरी को एक अन्य आदेश जारी कर अंतिम समय सीमा को तीन महीनों के लिए बढ़ा दिया गया था।

 

प्रारंभिक आदेश जारी होने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने इसे लागू करने में कई कठिनाइयां बताई थी, विशेषकर एक मजबूत ईकोसिस्टम की अनुपस्थिति, जो बायोडीजल उत्पादकों और तेल एकत्र करने वाली एजेंसियों का पंजीकरण किये बिना।

 

हालांकि कर्नाटक पहला राज्य है, जहां पर बायो एनर्जी डेवलपमेंट बोर्ड है। वहां पर बड़े रेस्टोरेंट की श्रृंखलाओं से उपयोग किए गए खाद्य तेल को बायोडीजल उत्पादक एकत्र करते हैं, मुख्य समस्या इन यूनिटों के पंजीकरण व रिपरपज यूज्ड कुकिंग आयल (RUCO) एकत्र करने वालों का पैनल बनाने की है। उनका पैनल बनाये बिना, अनेकों खाद्य तेल एकत्र करने वालों को होटलों की श्रंखला से उपयोग किया खाद्य तेल एकत्र करने में कठिनाई होती है। इन समस्याओं पर FSSAI के उच्च अधिकारियों से बंगलोर में 1 मार्च को हुई बैठक में चर्चा की गई थी। इसी तरह की कठिनाइयां अन्य राज्यों ने भी बताई थी।

 

जिसके बाद FSSAI ने भी 6 मई को एक आदेश जारी कर बायो डीजल उत्पादकों को FSSAI के पास पंजीकरण कराने के लिए कहा है ताकि वह खाद्य व्यापार संगठनों (FBOs) से उपयोग में लाये खाद्य तेल को एकत्र कर सकें।

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