भाजपा को 2018-19 में मिला 700 करोड़ से अधिक का चंदा, टाटा के ट्रस्ट ने दिया 356 करोड़

बीजेपी ने चुनाव आयोग में दिए हलफनामे में बताया कि टाटा समूह के प्रोग्रेसिव इलेक्ट्रोल ट्रस्ट ने उन्हें 356 करोड़ रुपये का चंदा दिया है।

भाजपा को 2018-19 में मिला 700 करोड़ से अधिक का चंदा, टाटा के ट्रस्ट ने दिया 356 करोड़
अमित झा
अमित झा

November 13,2019 01:56

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 31 अक्तूबर को चुनाव आयोग के सामने दायर हलफनामे में भाजपा ने इस बात का खुलासा किया था। इस जानकारी को सोमवार को सार्वजनिक किया गया। भाजपा को प्राप्त 743 करोड़ रुपये की राशि कांग्रेस सहित अन्य सभी छह राष्ट्रीय दलों को इस तरह के मिले दान में प्राप्त संयुक्त राशि से तीन गुना अधिक है।

 

 

 

भाजपा को साल 2018-19 के दौरान टाटा समूह द्वारा नियंत्रित एक चुनावी ट्रस्ट से 356 करोड़ रुपये का चंदा मिला। सत्तारूढ़ दल ने यह जानकारी निर्वाचन आयोग में जमा किए गए दस्तावेजों में दी है। भाजपा द्वारा निर्वाचन आयोग को 31 अक्तूबर को दी गई जानकारी के अनुसार पार्टी को वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान चेक और ऑनलाइन भुगतान के दौरान कुल 700 करोड़ रुपये से अधिक का चंदा मिला। इसमें से लगभग आधा चंदा-356 करोड़ रुपये-टाटा समूह द्वारा नियंत्रित 'प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट' से मिला।

 

 

 

दस्तावेजों के अनुसार भारत के सबसे धनी ट्रस्ट- द प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने पार्टी को 54.25 करोड़ रुपये का चंदा दिया। इस ट्रस्ट को भारती ग्रुप, हीरो मोटोकोर्प, जुबिलैंट फूडवर्क्स, ओरियंट सीमेंट, डीएलएफ, जेके टायर्स जैसे कॉरपोरेट घरानों का समर्थन प्राप्त है। उपलब्ध कराई गई सूचना 20 हजार रुपये या इससे अधिक के चंदे से जुड़ी है जिसका भुगतान चेक के जरिये या ऑनलाइन किया गया।

 

 

 

चुनावी बांड के रूप में प्राप्त चंदा इसमें शामिल नहीं है। दस्तावेज में कहा गया कि भाजपा को व्यक्तियों, कंपनियों और चुनावी ट्रस्टों की ओर से भी चंदा मिला। चुनाव संहिता के अनुसार राजनीतिक दलों के लिए वित्त वर्ष के दौरान मिलने वाले समूचे चंदे का खुलासा करना आवश्यक है। वर्तमान में राजनीतिक दलों के लिए ऐसे लोगों और संगठनों के नामों का खुलासा करने की अनिवार्यता नहीं है जो 20 हजार रुपये से कम का चंदा देते हैं या फिर जो लोग चुनावी बांड के रूप में चंदा देते हैं।

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