सिद्धार्थ की मौत ने फिर खोली कॉरपोरेट गवर्नेंस की पोल

एक तरफ जहां सरकार कॉरपोरेट गवर्नेंस को फायदा पहुंचाने के लिए भले ही तमाम दावे पेश करती रही हो। लेकिन कॉरपोरेट गवर्नेंस की हकीकत कुछ और ही बयां करती है।

सिद्धार्थ की मौत ने फिर खोली कॉरपोरेट गवर्नेंस की पोल
अमित झा
अमित झा

August 1,2019 04:22

कैफे कॉफी डे (सीसीडी) के संस्थापक और कॉफी किंग के नाम से मशहूर वीजी सिद्धार्थ की मौत ने देश में कॉरपोरेट गवर्नेस की फिर से एक बार पोल खोल दी है। सिद्धार्थ की मौत पिछले कुछ वर्षो के दौरान सीसीडी के आंतरिक प्रबंधन से जुड़े जिन मुद्दों को सामने लाई है, उनका जवाब तलाशने में प्रबंधन को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। दरअसल, सीसीडी का परिचालन करने वाली कंपनी कॉफी डे इंटरप्राइजेज में कॉरपोरेट गवर्नेस का मुद्दा रह रहकर उठता रहा है।

 

कैफे कॉफी डे के मालिक वीजी सिद्धार्थ की मौत को कई उद्योगपतियों ने सिस्टम की लापरवाही व कॉरपोरेट गवर्नेस से भी जोड़कर देखा है। बायोकॉन लिमिटेड की प्रमुख किरण मजूमदार-शॉ ने सिद्धार्थ की मौत पर गहरा दुख जताते हुए कर्ज उपलब्ध कराने की कॉरपोरेट सेक्टर की संस्कृति को ही कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने प्राइवेट इक्विटी फंड के प्रबंधकों की तुलना सूदखोरों से की है और कहा है कि उनकी वजह से भारी मानसिक दबाव पड़ता है।

 

भाजपा की सरकार ने जब पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई थी तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक नारा दिया था,  जिसमें उन्होने कहा था सरकार की सारी योजनाएं गरीब निम्न मध्यम वर्ग को सशक्त करने के लिए होगी। हालांकि, अभी के हालात कुछ और ही बयां कर रहे है। नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (NSSO) की रिपोर्ट के अनुसार भारत में बेरोजगारी की दर साल 2017-18 में 6.1 प्रतिशत रही, जो साल 1972 के बाद सबसे ज्यादा थी। साल 1971 में बेरोजगारी दर 6 प्रतिशत थी। ऐसे में बेरोजगारी के मामले में देश ने पिछले 45 सालों के रिकार्ड को तोड़ दिया।

 

दिल्ली सरकार भी आम लोगो के लिए फायदा पहुंचाने के लिए नई नई योजनाएं लागू करने में लगी है,  जैसे- दिल्ली में 200 यूनीट तक अगर आपका बिजली बिल आता है तो आपको कोई भूगतान नहीं करना पड़ेगा इसका सारा खर्चा दिल्ली सरकार वहन करेगी और मेट्रो में महिलाओ के लिए फ्री सुविधा, लेकिन बता दें दिल्ली में लगातार सीलिंग हो रही है जिससे व्यापारियों में सरकार के खिलाफ काफी आक्रोश है लेकिन उसके लिए अभी तक केंद्र और राज्य सरकार में से कोई आगे नहीं आया दोनों एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे। व्यापारियो को हर तरफ से बस आश्वाशन ही मिला और सीलिंग जारी रही। इस सीलिंग के चलते कितने व्यापारियों ने आत्महत्या कर ली। लाखों की संख्या में बेरोजगार पैदा हुई।

 

व्यापारियों का हर तरफ से एक मज़ाक बन कर रह गया है। कैसे कैसे चुटकुले गढ़े जा रहे हैं बिज़नेस और सरकार के सम्बन्धों के बीच इसका एक नमूना देखिए..Amitabh is running show called...Kaun Banega Crorepati. Govt.is running show called..Kaun Bachega Crorepati. 🤣🤣😜😜

केंद्र सरकार को व्यापारियों से बातचीत कर के उनकी नाराजगी दूर करनी चाहिए। ताकि आगे कोई और व्यापारी सिद्धार्थ जैसा कदम ना उठाए

mysterious fact about the death of the ccd