राज्यसभा में विपक्ष हमलावर, कहा- सरकार जान बूझकर जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव टाल रही है

राज्यसभा में सोमवार को जम्मू और कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के लिए लाते ग्रे संवैधानिक बिल पर चली लम्बी चर्चा में देश का इतिहास एक बार फिर उकेरा गया।

राज्यसभा में विपक्ष हमलावर, कहा- सरकार जान बूझकर जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव टाल रही है

विपक्ष ने सरकार पर राष्ट्रपति शासन के बहाने जम्मू और कश्मीर में शासन चलाने का आरोप लगाया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बात तो एक देश, एक चुनाव की करते हैं, लेकिन राज्य विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ नहीं करवाये गये। विधेयक पर चर्चा में 27 सदस्यों ने भाग लिया, इस विधेयक के साथ ही जम्मू में अंर्तराष्ट्रीय सीमा के पास रहने वालों को आरक्षण देने पर भी चर्चा हुई।

 

चर्चा शुरू करते हुए कांग्रेस की विप्लव ठाकुर ने कहा, आप साफ साफ क्यों नहीं कहते कि हमारा उद्देश्य पूरा नहीं हुआ है। वह बोली, जम्मू और कश्मीर में रहनेवाले मुख्यधारा में आना चाहते हैं, उन्होने सरकार से कहा कि राज्य को बांटे नहीं और लोकतंत्र को जीवित रखें।

 

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को, नेशनल कांफ्रेंस के संस्थापक शेख अब्दुल्ला के साथ, कश्मीर को भारत में मिलाने वाला हीरो बताया। आजाद लगभग एक घंटे तक बोले, उन्होने कश्मीर के भारत में विलय के समय की परिस्थितियों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि किस तरह पाकिस्तान ने राज्य के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था, जब नेहरू ने वापस कब्जा लेने के लिए सेना भेजी थी और अब्दुल्ला ने 10,000 लोगों की सेना खड़ी की थी, ताकि कश्मीर के लोगों की रक्षा की जा सके। उन्होंने कहा कि देश में इतिहास की गलत जानकारी देकर बहुत कुछ कहा जाता है।

 

भाजपा का आतंकवाद के जीरो टॉलरेंस के दावे को पचाना कठिन है, आजाद बोले। क्योंकि कुछ दिनों पूर्व तक, राज्य में सबसे अधिक संख्या में सिपाही और नागरिक मरे हैं। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि भाजपा का पहले तीन वर्षों तक पीडीपी के साथ गठबंधन और बाद में राष्ट्रपति शासन लागू कर, राज्य में किसी भी तरह का विश्वास जगाने की कोई कोशिश नहीं की गई।

 

दिल्ली से सरकार चलाना बंद करें, आजाद ने सरकार से कहा, वह आगे बोले, यही सबसे बड़ा विश्वास जगाने की कोशिश होगी। अंर्तराष्ट्रीय सीमाओं के पास रहने वाले लोगों को आरक्षण देने के संबंध में आजाद ने सुझाव दिया कि आरक्षण को पांच से छः प्रतिशत किया जाये।

 

तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह यह आश्वासन दें कि वह तीन परिवारों द्वारा चलाई जाने वाली पार्टियों पर निशाना नहीं साधेंगे, क्योंकि शाह ने टिप्पणी की थी कि जब से जम्मू और कश्मीर का भारत में विलय हुआ है, वहां सिर्फ तीन परिवार ही शासन कर रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस नेता ने कहा कि आज देश भी दो परिवारों द्वारा ही चलाया जा रहा है।

 

सीपीआई (मार्क्स) नेता के के रागेश ने कहा कि राज्य के युवाओं ने परेशान होकर आतंकवाद को‌अपनाया है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह कश्मीर मुद्दे का उपयोग, देश को सांप्रदायिक आधार पर बांटने के लिए और आतंकवाद का उपयोग कट्टर राष्ट्रवाद के लिए कर रही है।

 

समाजवादी पार्टी नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि राष्ट्रपति शासन जल्दबाजी में लगाया गया था। वह बोले कि भाजपा ने पीडीपी के साथ गठबंधन करके गलती की, जो अप्राकृतिक था और उसे असफल ही होना था।

 

कई विपक्षी नेताओं ने कहा कि लोकसभा चुनावों के साथ ही राज्य विधानसभा के चुनाव क्यों नहीं करवाये गये। उन्होंने सरकार पर प्रमुख निर्णयों का रास्ता अध्यादेशों के माध्यम से पूरा करने और संसद को विश्वास में न लेने का आरोप लगाया।

 

बीजू जनता दल के प्रसन्न आचार्य ने सरकार से यह स्पष्ट करने के लिए कहा कि यदि आरक्षण का विधेयक पास हो जाता है, तो क्या इसे राज्य विधानसभा में भी पारित करना पड़ेगा।

 

लोकसभा द्वारा पारित विधेयक और प्रस्ताव को राज्यसभा ने सर्वसम्मति से ध्वनि मत से पारित कर दिया।

 

 

RAJYASABHA BJP AMIT SHAH