दक्षिण भारत में जगन मोहन नहीं, तेलंगाना के मुख्यमंत्री चन्द्रशेखर राव के खिलाफ भाजपा मोर्चा खोलेगी

भाजपा ने आंध्र के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के साथ मधुर संबंध बनाने और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चन्द्रशेखर राव के खिलाफ मोर्चा खोलने और लड़ाई को अगले स्तर पर ले जाने का काम करना शुरू कर दिया है

दक्षिण भारत में जगन मोहन नहीं, तेलंगाना के मुख्यमंत्री चन्द्रशेखर राव के खिलाफ भाजपा मोर्चा खोलेगी

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व का मानना है कि एक साथ तेलुगू भाषी राज्यों में दो मोर्चे खोलना सही नहीं है, इसीलिए उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के साथ मधुर संबंध बनाने और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चन्द्रशेखर राव के खिलाफ मोर्चा खोलने और लड़ाई को अगले स्तर पर ले जाने की नीति पर काम करना शुरू कर दिया है।

 

भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने इस बारे में पक्का इरादा कर लिया है कि किसी भी समय अगर जगन मोहन और चन्द्रशेखर राव में से एक को चुनने का अवसर आता है, तो YSR कांग्रेस के जगन मोहन रेड्डी उसकी पहली पसंद हैं। जगन मोहन रेड्डी की अंतर्राज्यीय समिति (ISC) के सदस्य के रूप में नियुक्ति, इस संकेत को स्पष्ट करती है। दक्षिण भारत से जगन मोहन इस समिति में अकेले प्रतिनिधि हैं, जिसके केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह अध्यक्ष हैं।

 

यदि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के स्थान पर इस पद के लिए किसी अनुभवी नेता के चयन का विचार किया जाता तो तेलंगाना के मुख्यमंत्री राजनीति और प्रशासनिक कार्यों में कहीं अधिक अनुभवी हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस बारे में पसंद भाजपा के विचार का स्पष्ट संकेत है। जगन मोहन के साथ दोस्ती और चन्द्रशेखर राव से लड़ाई।

 

अंतर्राज्यीय समिति (ISC) की सरदारी समिति एक संस्था है जो व्यवहारिक तौर पर संघीय सहयोग के विचार को मजबूत करती है और अंर्तराज्यीय विवादों पर काम कर, उन्हें सुलझाने के तरीके और उपाय बताती है। स्थायी समिति में जगन मोहन के अलावा तीन और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक (उड़ीसा), अमरिंदर सिंह (पंजाब) और नीतीश कुमार (बिहार) हैं, उनमें से कोई भी भाजपा शासित राज्य का मुख्यमंत्री नहीं है, हलांकि नीतीश कुमार एनडीए के नेता हैं।

 

मजे की बात यह है कि जब। भाजपा के तेलगू प्रमुखों के साथ आपसी संबंधों की बात आती है, तो प्रधानमंत्री के पूर्व के कार्यकाल में उनके तेलंगाना के मुख्यमंत्री के साथ मधुर संबंध थे। लेकिन दोबारा सत्ता में आने के बाद केन्द्र में मोदी और राज्य में चन्द्रशेखर राव के बीच नई तल्खी पैदा होती दिखाई दे रही है, दोनों के बीच की दूरी बढ़ रही है।

 

इस अविश्वास का कारण, दोस्ती के कम होने के पीछे का कारण शायद भाजपा की नीति और लोकसभा चुनावों के दौरान चन्द्रशेखर राव का आचरण है, जिसमें उन्होंने भाजपा और कांग्रेस, दोनों के खिलाफ फेडरल फ्रंट के प्रस्ताव पर काम किया था।

 

उन्होंने मोदी को प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा दी थी, वह देश के भिन्न-भिन्न भागों की क्षेत्रीय पार्टियों के प्रमुख नेताओं और मुख्यमंत्रियों से मिल रहे थे।

 

चुनाव प्रचार के दौरान भी चन्द्रशेखर राव ने मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी आलोचना की थी।

 

पूर्व के कार्यकाल में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के मोदी और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं के  साथ अच्छे संबंध थे, जबकि भाजपा ने यदि अपने पूर्व सहयोगी आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चन्द्राबाबू नायडू की अगर बांह नहीं भी मरोड़ी थी, तो भी संबंध तनावपूर्ण बना लिये थे।

 

चन्द्राबाबू नायडू को प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात करने के लिए। एक वर्ष से अधिक समय तक इंतजार कराया था, जबकि उसी बीच चन्द्रशेखर राव से मोदी कई बार मिले थे।

 

अब प्रमुखतायें बदल गई हैं। तेलगू राज्यों में मोदी दोस्त के रूप में पहली पसंद तेलंगाना के मुख्यमंत्री की जगह उसके पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए हैं।

 

राजनीतिक चिंतकों और विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा को अगर क्षेत्र पर मजबूत पकड़ बनानी है तो उसे राजनीतिक गणनाओं और व्यक्तिगत कैमिस्ट्री से हट कर बहुत कुछ करने की जरूरत है।

 

भाजपा की नीति यही है कि आंध्र प्रदेश की अपेक्षा, फिलहाल उसकी पसंद पार्टी को तेलंगाना में मजबूत बनाना और सत्ताधारी टीआरएस को कड़ी टक्कर देना है। राज्य में विपक्षी दल कांग्रेस ने एक शून्य छोड़ा हुआ है, वह दिन प्रतिदिन कमजोर हो रही है। उसके नेता और कार्यकर्ता उसे रोज बरबाद कर रहे हैं।

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