सभी धर्मों का सम्मान करना भारतीयों के खून में, यह हमारी सभ्यता का हिस्सा : वेंकैया नायडू

सभी धर्मों का सम्मान करना भारतीयों के खून में, यह हमारी सभ्यता का हिस्सा : वेंकैया नायडू
Desh 24X7
Desh 24X7

January 12,2020 10:07

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि सभी धर्मों का सम्मान करना भारतीयों के खून में है और यह हमारी सभ्यता का हिस्सा है। धर्मनिरपेक्षता का मतलब किसी एक खास धर्म का अपमान करना या तुष्टीकरण करना नहीं है। रामकृष्ण मठ की तमिल मासिक पत्रिका श्री रामकृष्ण विजयम के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में रविवार को नायडू ने कहा कि लंबे समय तक भारत ने कई प्रताड़ित लोगों को आश्रय दिया है और कई को शरण दी है।

 

 

 

स्वामी विवेकानंद की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में नायडू ने कहा कि लोगों को उन्हें कभी नहीं भूलना चाहिए और उनकी शिक्षा एवं उपदेशों को आगे बढ़ाना चाहिए, यह मानवता की बेहतरी के लिए शाश्वत हैं।महान संत, शिक्षक और समाज सुधारक के तौर पर प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद की पश्चिम में हिंदुत्व को ले जाने में बड़ी भूमिका थी।

 

 

नायडू ने कहा कि वह एक समाज सुधारक थे और धार्मिक रूढ़ियों के खिलाफ थे साथ ही जाति और संप्रदाय से ऊपर उठकर मानवता के उत्थान में यकीन करते थे। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने अध्यात्म के महत्व पर जोर दिया। भारत एक तरह से पूरी दुनिया के लिए अध्यात्मिक गुरु है। लोग धैर्य, मार्गदर्शन और अध्यात्म के लिए भारत से उम्मीद करते हैं। विवेकानंद को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि स्वामी जी को इस बात का गर्व था कि वह ऐसे धर्म से ताल्लुक रखते हैं जिसने दुनिया को सहनशीलता एवं सार्वभौमिक स्वीकृति दोनों सिखाया था। 

 

 

उन्होंने कहा कि हिंदू एकमात्र धर्म है जो कहता है कि सभी धर्म सही हैं। यह इसकी महानता और इसकी खूबसूरती है। नायडू ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने यह भी कहा था कि वह ऐसे राष्ट्र से ताल्लुक रखते हैं जिसने धरती के सभी देशों के प्रताड़ित एवं शरणार्थियों को शरण दी है। 

 

 

उपराष्ट्रपति ने नागरिकता कानून के विरोध का स्पष्ट तौर पर संदर्भ देते हुए कहा कि अब भी हम प्रताड़ित लोगों को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं भले ही कुछ लोग इसे विवादित बनाने की कोशिश कर रहे हों।उन्होंने कहा कि यह हमारी संस्कृति, हमारी धरोहर है। हमारे पूर्वजों ने हमें यही बताया है।