शिंदे के कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के विलय वाले बयान को पवार ने नकारा

पवार ने कहा कि शिंदे अपनी पार्टी की बात कह रहे होंगें, हमारी पार्टी तो इस जून माह में 20 वर्ष की ही हुई है और हमारे पास विभाजनकारी ताकतों से लड़ने के लिए पर्याप्त शक्ति है।

शिंदे के कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के विलय वाले बयान को पवार ने नकारा

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने बुधवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे के उस बयान पर निराशा जताई, जिसमें शिंदे ने सुझाव दिया था कि राष्ट्रवादी कांग्रेस और उनकी पार्टी कांग्रेस का अब विलय हो जाना चाहिए, क्योंकि दोनों ही पार्टियां अब तक चुकी हैं।

 

पवार ने कहा कि शिंदे अपनी पार्टी की बात कह रहे होंगें, हमारी पार्टी तो इस जून माह में 20 वर्ष की ही हुई है और हमारे पास विभाजनकारी ताकतों से लड़ने के लिए पर्याप्त शक्ति है। मैं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष हूं। मेरी पार्टी की करता स्थिति है, इसकी मुझे पूरी जानकारी है। सुशील कुमार शिंदे अपनी पार्टी की बात कर रहे होंगे, 78 वर्षीय महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा। वह उत्तर महाराष्ट्र के जलगांव जिले में अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार दौरे पर थे।

 

शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने भी शिंदे के बयान को हल्के तौर पर लिया, जिसने एक बार फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस और पुरानी बड़ी पार्टी के बीच विलय की चर्चा को फिर से हवा दे दी है।

 

पवार को एक बार अपना राजनीतिक गुरु बता चुके शिंदे ने मंगलवार को। एक राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रत्याशी के समर्थन में एक सार्वजनिक मंच से बोलते हुए यह कहकर खलबली मचा दी कि कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस दोनों एक ही मां की गोद में पलकर बड़े हुए हैं और दोनों थक चुके हैं। दोनों का अब विलय हो जाना चाहिए, उन्होंने कहा था। वरिष्ठ कांग्रेस नेता का यह बयान, वह भी ठीक महाराष्ट्र विधानसभा के चुनावों के मुहाने पर, बहुत ही महत्वपूर्ण है।

 

शरद पवार, जो तीन बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, उन्होंने 1999 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन, कांग्रेस से अलग होने के बाद किया था। उन्होंने कांग्रेस उस समय की अध्यक्ष सोनिया गांधी के विदेशी मूल के होने के मुद्दे पर छोड़ी थी। लेकिन उसके बाद राज्य में सरकार बनाने के लिए और राष्ट्रीय स्तर पर कई बार दोनों पार्टियां साथ साथ रही हैं।

 

वर्ष 2019 के चुनावों के बाद इस तरह की संभावनाएं व्यक्त की जा रही थी कि दोनों पार्टियों में विलय हो जायेगा, लेकिन पवार ने इस तरह की सभी संभावनाओं को किनारे कर दिया था। इस समय पार्टी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने में लगी है, क्योंकि पवार के कई खासमखास सिपहसालार और वरिष्ठ नेता पार्टी को धता बताते हुए भाजपा में सम्मिलित हो गये हैं।

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