पिछले दरवाज़े से 'सरकार' में दाखिल हुए अम्बानी के ख़ास, हिंदुस्तान के कारपोरेट जगत में है हलचल

देश की कंपनियों में सुगबुगाहट तो है पर इस दौर में कोई कहे तो किससे कहे ?आखिर मामला अम्बानी ग्रुप का है।

पिछले दरवाज़े से
Desh 24X7
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August 31,2021 11:59

देश की कॉरपोरेट कंपनियों में पारदर्शिता लाने वाली चार्टर्ड अकाउंटेंट की शीर्ष संस्था ICAI के अध्यक्ष जब से मुकेश अम्बानी के नज़दीकी निहार जम्बुसरिया बने हैं तबसे सरकारी हलकों में हलचल हैं। निहार जम्बुसरिया  पिछले कई बरसों से देश के सबसे पैसे वाली कम्पनी  रिलायंस इंडस्ट्रीज में टैक्स का हिसाब किताब सम्भालते थे लेकिन इस  साल ICAI (Institute of Chartered Accountants of India ) के जब वे मुखिया बने तो उन्होंने मंत्रालय के कामों में दखल बढ़ाना शुरू कर दिया।

देश की कंपनियों में सुगबुगाहट है पर इस दौर में कोई कहे तो किससे कहे ?आखिर मामला अम्बानी ग्रुप का है।

 

 

 कहा जा रहा है कि ICAI अध्यक्ष की हैसियत से अम्बानी के करीबी निहार ने कॉरपोरेट मंत्रालय में अपनी धाक जमाई और मंत्रालय की अहम संस्था National Financial Reporting Authority(NFRA) में अपना प्रभाव बनाने के लिए दबाव बनाया। ज़ाहिर है अम्बानी के इस आदमी के ICAI और NFRA में बढ़ते प्रभाव से देश की बाकी कॉरपोरेट कंपनियों को ख़ुशी नहीं होगी।

खबर ये भी है कि रिलायंस के रसूखदार एक्सिक्यूटिव रहे, निहार की आजकल NFRA के चेयरमैन रंगादारी श्रीधरन से अंदर ही अंदर अदावत चल रही है। दरअसल NFRA की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि वे देश की निजी कंपंनियों के बहीखातों और ऑडिट पर नज़र रखे और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करके भारत के कॉरपोरेट को पारदर्शी बनाये। 

 

 

लेकिन पहले बात करते हैं कि रिलायंस के 'आदमी' कहे जाने वाले निहार जम्बुसरिया आखिर कैसे ICAI जैसे संवैधानिक संस्था के सिरमौर बन गए। देश के प्रतिष्ठित बिज़नेस अख़बार इकनोमिक टाइम्स ने कई चार्टर्ड अकाउंटेंट का हवाला देते हुए कहा है ICAI को निष्पक्ष संस्था बनाने के लिए किसी निजी कम्पनी ने कभी अपने अधिकारियों को ICAI का अध्यक्ष नहीं बनाया । बरसों से परंपरा यही रही है कि चाहे टाटा हों, या बिरला हों, या कोई भी बड़ी निजी कम्पनी हो, किसी ने अपने प्रतिनिधि या सीए को ICAI के अध्यक्ष बनाने की न सोची, न कभी प्रयास किया।

मुमकिन है कि विवाद या 'कनफ्लिक्ट ऑफ़ इंट्रेस्ट' से बचने के लिए इस शीर्ष एकाउंटिंग संस्था पर  किसी कॉरपोरेट ने कभी काबिज़ होने की नहीं सोची।

 

 

इसलिए  जब मुकेश अम्बानी या यूँ कहे रिलायंस के 'टैक्स मैन' निहार जम्बुसरिया इस वर्ष फरवरी में ICAI के अध्यक्ष चुने गए तो कॉरपोरेट जगत का ध्यान इधर गया। इकनोमिक टाइम्स के अनुसार रिलायंस के टैक्समैन निहार जब बीते वर्ष ICAI के उपाध्यक्ष चुने गए थे तभी से उनके अध्यक्ष बनने का रास्ता साफ़ हो गया था। एक निष्पक्ष संवैधानिक संस्था में निहार के अध्यक्ष बनते ही कुछ उंगलियां उठीं तो रिलायंस ने दो महीने बाद यानि अप्रैल 2021 में उन्हें रिटायर करने की बात कह डाली । पर देश में कई जाने माने सीए रिलायंस की इस सफाई से सहमत नहीं दिखे। ' निजी कम्पनी में मालिक के ख़ास आदमी कब रिटायर होते हैं ? वहां तो वफादारी देखी जाती है। पर देश की सबसे बड़ी कम्पनी और सरकार से उनके रिश्ते देखते हुए आखिर कौन निहार साहब का विरोध करेगा,' ICAI के सदस्य और एक स्थापित सीए ने देश 24x7 को बताया।

दिलचस्प बात ये है कि ICAI की वेबसाइट पर निहार जम्बुरिया के परिचय में, रिलायंस में उनकी लम्बी सेवा का कोई जिक्र नहीं है।  

 

 

बहत्तर साल पहले ICAI को संसद ने चार्टर्ड अकाउंटेंट एक्ट के तहत स्थापित किया था और ये संस्था, भारत सरकार के कॉरपोरेट मंत्रालय के अधीन काम करने लगी । लिहाजा निहार जम्बूसरिया जब ICAI के अध्यक्ष बने तो वे NFRA के अहम सदस्य भी बन गये और उनके रसूख में जबरदस्त इजाफा हुआ। NFRA के अधिकारों के बारे में यूँ तो लोग कम जानते लेकिन ये प्राधिकरण देश की पब्लिक लिमिटेड कम्पनी और बड़ी निजी कंपनियों पर आर्थिक गड़बड़ की जांचकरने की पावर रखता  है।

यही नहीं स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनियां जो जनता से शेयर के नाम पर अरबों रुपये ले रही हैं उसके हिसाब किताब की जाँच भी NFRA कर सकता है। गौरतलब है कि देश में रिलायंस इंडस्ट्री ने जनता का सबसे ज्यादा पैसा निवेश के तौर पर लिया है।  रिलायंस पर सेबी से संस्थाओं ने पहले भी सवाल उठायें हैं। रिलायंस ग्रुप पर सीबीआई भी कई मामलों में जांच कर चुकी है। इसलिए NFRA में निहार का दखल मायने रखता है।

 

 

बहरहाल निहार जम्बुसरिया जब NFRA के अहम सदस्य बने  तो ये सवाल उठाया गया कि NFRA कई जाँच के मामलों में सदस्यों को जानकारी नहीं देता है। सदस्यों ने NFRA के चेयरमैन पर ये भी सवाल उठाये कि  वे खुद कई कमेटियों के प्रमुख है जो उचित नहीं है। निहार चाहते  थे कि  NFRA के रूल्स बदलें जाये।  कुलमिलाकर  कोशिश ये थी कि उन्हें और भी ज्यादा ताकत मिले। देखते ही देखते NFRA के चेयरमैन रंगाधारी श्रीधरन और निहार जैसे सदस्यों के बीच टकराव शुरू हो गया। श्रीधरन से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि  जबसे रिलायंस के आदमी, यानि निहार आये हैं तभी से NFRA में विवाद शुरू हो गया है।  सूत्र का कहना है कि मामला अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तक पहुँच गया है जो देश की कारपोरेट मंत्री भी है। 

 बहरहाल देखना है ये है कि  रिलायंस के ख़ास रहे निहार आने वाले दिनों में अब और कितने ताकतवर होते है ? लेकिन इस ताकत का फैसला अब मोदी सरकार को करना है, मुकेश अम्बानी को नहीं।         

       

        

Nihar N Jambusariya Mukesh Ambani ICAI NFRA Ministry of Corporate Affairs Reliance Industries