योगी के रामराज्य में बेटियाँ नहीं हैं सुरक्षित, RTI में सामने आये चौंकाने वाले आँकड़े

सीएम योगी भले ही महिला सुरक्षा को लेकर गगंचुम्भी बातें करते हों लेकिन जमीनी हकीकत तो कुछ और ही है |

योगी के रामराज्य में बेटियाँ नहीं हैं सुरक्षित, RTI  में  सामने आये चौंकाने वाले आँकड़े

योगी आदित्यनाथ की सरकार भले ही रामराज्य की बात करती हो लेकिन उत्तर प्रदेश में रामराज्य के नाम पर लोगों के साथ धोखा हुआ है | पहले लोगों को बड़े-बड़े सपने दिखाए गए और फिर सत्ता हासिल होते ही उन्हें भुला दिया गया | ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्यों कि सीएम योगी भले ही महिला सुरक्षा को लेकर गगनचुम्भी बातें करते हों लेकिन जमीनी हकीकत तो चने के पौधे जितनी ही है |

 

 

आगरा के एक आरटीआई व चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट नरेश पारस (RTI and child rights activist Naresh Paras ) हैं उन्होंने मीडिया को बताया उत्तर प्रदेश के 50 जिलों द्वारा उपलब्ध कराए गए आँकड़ों से पता चला है कि पिछले साल राज्य में 18 साल तक की तीन लड़कियों सहित कम से कम पाँच बच्चे हर दिन लापता हो गए थे।

 

 

यानि 1 जनवरी, 2020 से 31 दिसंबर, 2020 तक, यूपी में कुल 1,763 बच्चे लापता हो गए। 66% से अधिक (1,166) लड़कियाँ थीं। इनमें से 92% (1,070) से अधिक लड़कियाँ  12 से 18 वर्ष के आयु वर्ग की थीं।जब  कि पच्चीस जिलों ने दो महीने की देरी के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया।  इन जिलों में लखनऊ, वाराणसी, गौतम बौद्ध नगर, गोरखपुर और बरेली शामिल हैं।पारस ने कहा, 'अगर सभी जिलों के आँकड़ों को संकलित किया जाए तो लापता बच्चों की वास्तविक संख्या बहुत अधिक होगी।'

 

 

लापता बच्चों के 113 मामलों के साथ, मेरठ जिला सूची में सबसे ऊपर है, आकड़ों से पता चला है, 92 लापता बच्चों के साथ गाजियाबाद दूसरे स्थान पर है, उसके बाद सीतापुर (90), मैनपुरी (86) और कानपुर शहर (80) हैं। आगरा जिले में पूछताछ के दौरान 11 लड़कियों समेत 23 बच्चे गायब हो गए।

 

 

आरटीआई से यह भी पता चला है कि पिछले साल लापता हुए 1,763 बच्चों में से 1,461 का पता लगाया गया था और पुलिस ने उन्हें बरामद किया था। हालांकि, 200 लड़कियों समेत 302 बच्चे अभी भी लापता हैं।राज्य के अधिकारियों से ऐसे मामलों को और गंभीरता से लेने का आग्रह करते हुए, पारस ने कहा कि लापता बच्चे आखिर कहाँ जा रहे हैं. यह चिंतनीय है. यूपी से हर रोज पाँच बच्चों का लापता होना चिंता का विषय है.

 

 

लापता बच्चा चार माह तक बरामद न होने पर विवेचना मानव तस्करी निरोधक शाखा में स्थानांतरित करने का प्रावधान है. इसके बावजूद भी लापता बच्चों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है. इनमें लड़कियों की संख्या और अधिक चितिंत करती है. लापता में 12-18 वर्ष की लड़कियाँ ज्यादा गायब हो रही हैं या तो लड़कियाँ प्रेम संबंध के चलते घर से चली गईं या या फिर उनको देह व्यापार में धकेला जा रहा है. हर जिले में करवाई जाए जनसुनवाई इसके इतर पारस ने माँग की है  कि  लापता बच्चों के मामले में हर महीने  प्रत्येक जिले में पुलिस मुख्यालय पर शिकायतकर्ताओं और जाँचकर्ताओं की उपस्थिति में समीक्षा की जानी चाहिए। '

 

चार महीने तक बच्चा न मिलने पर मानव तस्करी निरोधक थाने से विवेचना कराई जाए. यह थाने हर जनपद में खोले गए हैं | ऐसे में एक ही सवाल उठता है कि योगी जी कब आपके राज्य में महिलायें सुरक्षित महसूस करेंगी ? और कब बेटियाँ आधी रात को भी घर से अकेले निकलते वक्त डरेंगीं नहीं ?

 

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