अयोध्या मामले पर बस कुछ ही देर में आएगा सुप्रीम कोर्ट का फैसला

जिस विवाद के सुलझने का इंतजार वर्षों से हो रहा आखिरकार वो दिन आ ही गया. सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ शनिवार सुबह साढ़े दस बजे फैसला सुनाएगी.

अयोध्या मामले पर बस कुछ ही देर में आएगा सुप्रीम कोर्ट का फैसला
Desh 24X7
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November 9,2019 11:45

सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ शनिवार को अयोध्या विवाद पर अपना फैसला सुनाएगी। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ सुबह 10.30 पर फैसला सुना देगी। 6 अगस्त से 16 अक्टूबर तक 40 दिन तक हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

 

ऊपर से: चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (बाएं) और जस्टिस एसए बोबडे (दाएं); नीचे: जस्टिस अशोक भूषण (बाएं), जस्टिस डीवाई चंद्रचूड (बीच में), जस्टिस एसए नजीर (दाएं)

 

 

फैसले के मद्देनजर अयोध्या में सुरक्षा बढ़ा दी गई और धारा 144 लागू कर दी गई है। राज्यों को भी अलर्ट भेजा गया है। उत्तर प्रदेश में 3 दिन तक स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे, लेकिन अयोध्या में रामलला के दर्शनों पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। मध्य प्रदेश में भी फैसले के मद्देनजर शनिवार को स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे।

 

 

कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और दिल्ली में भी शनिवार को स्कूल बंद रहेंगे

 

 

उप्र के अलीगढ़ और मुजफ्फरनगर, राजस्थान के भरतपुर, जयपुर संभाग में शनिवार को इंटरनेट बंद, जैसलमेर में 30 नवंबर तक धारा 144 लागू

 

 

गोवा, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में धारा 144 लागू। बेंगलुरू में सुबह सात बजे से रात 12 बजे तक धारा 144 लागू रहेगी

 

 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत शनिवार दोपहर 1 बजे मीडिया से बात करेंगे

 

 

एडीजी यूपी पुलिस आशुतोष पांडे ने कहा- पैरामिलिट्री फोर्स, आरपीएफ और पीएसी की 60 कंपनियां और 1200 पुलिस जवान तैनात हैं। 250 सब-इंस्पेक्टर, 20 डिप्टी एसपी, 2 एसपी तैनात हैं। सुरक्षा के लिहाज से 35 सीसीटीवी और 10 ड्रोन लगाए गए हैं।

 

 

ये फैसला भारत की शांति, एकता और सद्भावना को और बल दे: मोदी

 

 

मोदी ने कहा- अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा, वो किसी की हार-जीत नहीं होगा। देशवासियों से मेरी अपील है कि हम सब की यह प्राथमिकता रहे कि ये फैसला भारत की शांति, एकता और सद्भावना की महान परंपरा को और बल दे।

 

 

देश की न्यायपालिका के मान-सम्मान को सर्वोपरि रखते हुए समाज के सभी पक्षों ने, सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने, सभी पक्षकारों ने बीते दिनों सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए जो प्रयास किए, वे स्वागत योग्य हैं। कोर्ट के निर्णय के बाद भी हम सबको मिलकर सौहार्द बनाए रखना है।

 

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित जमीन को 3 हिस्सों में बांटने के लिए कहा था

 

 

2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अयोध्या का 2.77 एकड़ का क्षेत्र तीन हिस्सों में समान बांट दिया जाए। एक हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा रामलला विराजमान को मिले। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गई थीं।

 

 

40 दिन तक सुनवाई के दौरान 6 प्रमुख बिंदुओं पर हिंदू-मुस्लिम पक्ष की दलीलें

 

 

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संविधान पीठ के न्यायाधीश

 

अयोध्या मामले पर सुनवाई कर रही संविधान पीठ की अध्यक्षता चीफ जस्टिस रंजन गोगोई कर रहे हैं। उनके अलावा इस बेंच में जस्टिस एसए बोबोडे,  जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं।

 

अयोध्या विवाद : 1526 से अब तक

 

1526 : इतिहासकारों के मुताबिक, बाबर इब्राहिम लोदी से जंग लड़ने 1526 में भारत आया था। बाबर के सूबेदार मीरबाकी ने 1528 में अयोध्या में मस्जिद बनवाई। बाबर के सम्मान में इसे बाबरी मस्जिद नाम दिया गया।

 

1853 : अवध के नवाब वाजिद अली शाह के समय पहली बार अयोध्या में साम्प्रदायिक हिंसा भड़की। हिंदू समुदाय ने कहा कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई।

 

1949 : विवादित स्थल पर सेंट्रल डोम के नीचे रामलला की मूर्ति स्थापित की गई।

 

1950 : हिंदू महासभा के वकील गोपाल विशारद ने फैजाबाद जिला अदालत में अर्जी दाखिल कर रामलला की मूर्ति की पूजा का अधिकार देने की मांग की।

 

1959 : निर्मोही अखाड़े ने विवादित स्थल पर मालिकाना हक जताया।

 

1961 : सुन्नी वक्फ बोर्ड (सेंट्रल) ने मूर्ति स्थापित किए जाने के खिलाफ कोर्ट में अर्जी लगाई और मस्जिद व आसपास की जमीन पर अपना हक जताया।

 

1981 : उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने जमीन के मालिकाना हक के लिए मुकदमा दायर किया।

 

1885 : फैजाबाद की जिला अदालत ने राम चबूतरे पर छतरी लगाने की महंत रघुबीर दास की अर्जी ठुकराई।

 

1989 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित स्थल पर यथास्थिति बरकरार रखने को कहा।

 

1992 : अयोध्या में विवादित ढांचा ढहा दिया गया।

 

2002 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित ढांचे वाली जमीन के मालिकाना हक को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की।

 

2010 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2:1 से फैसला दिया और विवादित स्थल को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच तीन हिस्सों में बराबर बांट दिया।

 

2011 : सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई।

 

2016 : सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण की इजाजत मांगी।

 

2018 : सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद को लेकर दाखिल विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की।

 

6 अगस्त 2019 : सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर हिंदू और मुस्लिम पक्ष की अपीलों पर सुनवाई शुरू की।

 

16 अक्टूबर 2019 : सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई पूरी हुई।

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