दलित और महिला पर दांव लगा कर क्या कांग्रेस को मिलेगा फायदा, क्या है रणनीति जानिये ?

पार्टी के रणनीतिकार इस फेरबदल को शुरुआत मान रहे हैं। एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मंत्रिमंडल फेरबदल 2023 में दोबारा सरकार बनाने की कोशिश की शुरुआत है।

दलित और महिला पर दांव लगा कर क्या कांग्रेस को मिलेगा फायदा, क्या है रणनीति जानिये ?

राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मंत्रिमंडल में फेरबदल कर कांग्रेस एक साथ कई लक्ष्य साधने में कामयाब रही है। इस बदलाव में जहाँ सचिन पायलट के समर्थकों को जगह दी गई है, वहीं पार्टी ने 2023 के लिए चुनावी जमीन तैयार की है। पार्टी ने दलितों और महिलाओं को खास महत्व दिया है | कांग्रेस करीब एक साल की लम्बी माथापच्ची के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच नाराजगी को कम करने में सफल रही है। यही वजह है कि पायलट इस एक्सरसाइज से खुश नजर आए। उनके पाँच समर्थकों को मंत्रिमंडल में जगह मिली है।

 

 

गहलोत मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल के बाद अब ​विभागों के बंटवारे का इंतजार है। हाईकमान से मंजूरी के इंतजार में विभागों का बंटवारा अटका हुआ है। हाईकमान की मंजूरी के बाद आज मंत्रियों में विभागों का बंटवारा होने की संभावना है। 2018 में नए मंत्रियों को शपथ के बाद देर रात विभाग बांट दिए गए थे, लेकिन इस बार देरी हो गई है। मंत्री चार्ज लेने से पहले विभागों के बंटवारे का इंतजार कर रहे हैं।

 

 

बिजली, पानी जैसे जनता से जुड़े हैवी वैट विभाग बीडी कल्ला से लिए जा सकते हैं। कल्ला को शिक्षा विभाग दिए जाने की संभावना है। सचिन पायलट के डिप्टी सीएम रहते हुए उनके पास पीडब्ल्यूडी, ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग थे। इन विभागों की जिम्मेदारी किसे दी जाती है, इस पर निगाह है। ग्रामीण विकास और पंचायती राज के लिए महेंद्रजीत मालवीय को दिए जाने की संभावना है।

 

 

राजस्थान में करीब 18 फीसदी दलित हैं। इनमें से ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं। दलित अमूमन भाजपा को वोट करते रहे हैं। पर 2018 के चुनाव में बड़े पैमाने पर दलितों ने कांग्रेस को वोट किया था। इसलिए, दलितों का भरोसा बरकरार रखने के लिए पंजाब की तर्ज पर दलित मंत्रियों की संख्या बढ़ाई गई है। इस फेरबदल के बाद गहलोत मंत्रिमंडल में दलित मंत्रियों की संख्या नौ हो गई है। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सात कैबिनेट और दो राज्यमंत्री शामिल हैं। पार्टी ने दलितों और महिलाओं के साथ क्षेत्रीय संतुलन बनाने की भी कोशिश की है। इस फेरबदल में कांग्रेस ने जातीय समीकरणों को भी साधा है।

 

 

पार्टी के रणनीतिकार इस फेरबदल को शुरुआत मान रहे हैं। एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मंत्रिमंडल फेरबदल 2023 में दोबारा सरकार बनाने की कोशिश की शुरुआत है। पार्टी रणनीति के तहत आगे बढ़ रही है।

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