भवानीपुर में क्‍या ममता से हार मान ली है भाजपा ने ?

नगर निगम चुनाव में भी जीत न हासिल कर पाये प्रत्‍याशी को ममता के सामने उतारकर आखिर क्‍या संदेश देना चाहती है पार्टी

भवानीपुर में क्‍या ममता से हार मान ली है भाजपा ने ?
Desh 24X7
Desh 24X7

September 12,2021 12:20

पश्चिम बंगाल की भवानीपुर विधानसभा सीट पर 30 सितम्‍बर को उपचुनाव हो रहा है। तृणमूल कांग्रेस की मुखिया मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी यहां से मैदान में हैं, ममता का यह चुनाव जीतना हर हाल में जरूरी है क्‍योंकि मुख्‍यमंत्री की कुर्सी पर कायम रहने के लिए उन्‍हें नवम्‍बर माह तक विधायक बनना आवश्‍यक है, ज्ञात हो हाल ही में सम्‍पन्‍न राज्‍य के विधानसभा चुनाव में भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को उन्‍हीं के गढ़ माने जाने वाले नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराकर जोर का झटका दिया था। हालांकि पूरे राज्‍य की तस्‍वीर में ममता की पार्टी ने बाजी मार ली थी जिससे तृणमूल की सरकार बनी और ममता के हाथ में राज्‍य की बागडोर आ गयी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर उपचुनाव के लिए पर्चा भर दिया है। ममता बनर्जी की इस पारंपरिक सीट को टीएमसी विधायक सोवन्देब चट्टोपाध्‍याय ने खुद खाली कर दिया था। अब यहां से ममता के विरुद्ध भाजपा ने प्रियंका टिबरेवाल को मैदान में उतारा है। हालांकि पहले नंदीग्राम में ममता को मात देकर अपनी जीत से उत्‍सा‍हित शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि पार्टी अगर चाहे तो वह भवानीपुर उपचुनाव में ममता के खिलाफ लड़ना चाहते हैं। लेकिन बाद में पार्टी की प्रदेश इकाई ने इससे इनकार कर दिया और भवानीपुर से प्रियंका को उतारने का निर्णय लिया। 

 

माना यह जा रहा है कि ऐसा करके एक तरह से भाजपा ने ममता बनर्जी की आसानी जीत का मार्ग सुनिश्चित कर दिया है। मुख्‍य प्रतिद्वंद्वी भाजपा के इस निर्णय के बाद अब भवानीपुर उपचुनाव महज एक औपचारिकता बन कर रह गया है, क्‍योंकि भाजपा ने जिस प्रियंका टिकरेवाल को उतारा है वह हाल ही में सम्‍पन्‍न विधानसभा चुनाव में एंटली सीट से प्रत्‍याशी रह चुकी हैं तथा उन्हें तृणमूल उम्मीदवार ने करीब 58 हजार वोटों से हरा दिया था। इससे पहले उन्होंने 2015 में कोलकाता नगर निगम चुनाव में वॉर्ड 58 से भी दावेदारी की थी, लेकिन तब भी उन्हें टीएमसी के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी थी।

 

दूसरी ओर ममता बनर्जी के खिलाफ कांग्रेस अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी। पहले कांग्रेस ने उम्मीदवार उतारने का वादा किया था, लेकिन बाद में उसने यू-टर्न ले लिया था। 8 सितम्बर को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा था कि एआईसीसी के निर्देश के अनुसार, कांग्रेस  30 सितंबर को होने वाले उपचुनाव से पहले न तो बनर्जी के खिलाफ कोई उम्मीदवार उतारेगी और न ही उनके खिलाफ प्रचार करेगी। वाम मोर्चा की बात करें तो भवानीपुर विधानसभा से उसने माकपा नेता श्रीजीब विश्वास को उम्मीदवार बनाया गया है। प्रियंका टिबरेवाल पेशे से वकील हैं और वह भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो की कानूनी सलाहकार भी रही हैं। बाबुल सुप्रियो के मार्गदर्शन में प्रियंका ने अगस्त 2014 में बीजेपी का दामन थामा था. प्रियंका प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी से प्रेरित हैं और उन्हें अपना आदर्श मानती हैं। 

 

 

भाजपा ने अगस्त 2020 में प्रियंका को भारतीय जनता युवा मोर्चा पश्चिम बंगाल का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया था। प्रियंका विधानसभा चुनाव के समय से ही ममता बनर्जी को लगातार कटघरे में खड़ा कर रही हैं।  उनका एक बयान काफी चर्चा में आया था, उन्होंने कहा था, 'पहले ममता बनर्जी ने सोचा था कि वह दो सीटों से विधानसभा चुनाव लड़ेगीं, लेकिन जब बीजेपी ने यह कहा कि वह डर गई हैं तो यह सुनकर ममता दीदी ने सिर्फ नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया। यह योद्धाओं के लक्षण नहीं होते। योद्धा रणभूमि से अपनी जगह छोड़कर भागते नहीं, अगर इतनी ही सहनशक्ति और अपने आप पर भरोसा होता तो ममता बनर्जी को भवानीपुर से लड़कर दिखाना चाहिए था। 

 

 

खैर यह सब तो चुनावी जुमले हैं, जुबानी जमा खर्च है, फि‍लहाल तो सच्‍चाई यही दिख रही है कि भाजपा ने भी अब दीदी को ही जीता मानकर चुनाव की औपचारिकता पूरी करना ही श्रेयस्‍कर समझा है। वरना नंदीग्राम में ममता को हराने वाले शुभेन्‍दु अधिकारी को ही भवानीपुर से उतारती, जिसके लिए स्‍वयं शुभेन्‍दु अधिकारी ने ही सुझाव दिया था। उन परिस्थितियों में उपचुनाव खासा दिलचस्‍प बन सकता था। माना जा रहा है कि भाजपा के इस फैसले की वजह यह है कि मौजूदा स्थितियों में जब तृणमूल कांग्रेस की सरकार बहुमत से जीत कर आयी है तो शुभेन्‍दु अधिकारी द्वारा नंदीग्राम जैसा इतिहास भवानीपुर में दोहराना आसान न होता, और हार होने की दशा में नंदीग्राम की विधायकी भी चली जाती और किरकिरी भी होती।    

BJP defeat Mamta Bhawanipur भाजपा हार ममता भवानीपुर