बदली-बदली सी नजर आयीं बंगाल में दीदी, 'नमाज' नहीं अब 'चंडीपाठ'

उपचुनाव लड़ रहीं ममता बनर्जी के चुनाव क्षेत्र भवानीपुर में हिन्‍दू और सिख मत निर्णायक, मुस्लिम वोटर की संख्‍या कम

बदली-बदली सी नजर आयीं बंगाल में दीदी,
Desh 24X7
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September 9,2021 04:18

पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्‍य की सभी लगभग 36,000 दुर्गा पूजा समितियों को सरकार द्वारा दी जाने वाली मदद 25,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 करने का ऐलान किया है, यही नहीं मंच से शुद्ध उच्‍चारण के साथ ‘चंडीपाठ’ कर ममता बनर्जी ने अपने ऊपर लगा प्रो मुस्लिम का टैग हटाने की कोशिश की है। राजनीतिक जानकार राजनीति की चतुर खिलाड़ी ममता बनर्जी का यह हिन्‍दू प्रेम उनके हृदय परिवर्तन का नहीं बल्कि मौके की नजाकत और मुख्‍यमंत्री बने रहने के लिए भवानीपुर में हो रहे उपचुनाव में निर्णायक साबित होने वाले गैर मुस्लिम वोटों को अपनी झोली में डालने की अवसरवादी राजनीति के तौर पर देख रहे हैं।

 

 

यह वही ममता बनर्जी हैं जिन्‍होंने चार साल पहले 2017 में मुहर्रम के कारण दुर्गा पूजा में विसर्जन यात्रा पर रोक लगा दी थी। भारतीय जनता पार्टी ने इसके बाद से ममता बनर्जी पर मुस्लिम परस्‍त होने का आरोप जोर-शोर से लगाना शुरू कर दिया। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 30 सितम्‍बर को भवानीपुर में उपचुनाव है, जहां से ममता बनर्जी उम्‍मीदवार हैं, मुख्‍यमंत्री बने रहने के लिए ममता को नवम्‍बर तक हर हाल में विधायक होना आवश्‍यक है, क्‍योंकि पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनाव में वह भाजपा के शुभेन्‍दु अधिकारी से हार गयी थीं, और अब भवानीपुर, जहां से ममता उपचुनाव लड़ रही हैं, वहां हिन्‍दू और सिख वोटर निर्णायक हैं। ऐसे में हिन्‍दू मतों को पाने के लिए ये सारी कवायद ममता कर रही हैं।

 

  बीते मंगलवार को ममता बनर्जी ने कोलकाता में पूजा समितियों को संबोधित करते हुए देवी दुर्गा के आह्वान के लिए चंडीपाठ किया, आपको बता दें कि पिछले साल ही, राज्य में दुर्गा पूजा से पहले, मुख्यमंत्री ने मंत्र का जाप करने का प्रयास किया था, लेकिन सही उच्‍चारण नहीं कर पायी थीं, इसके बाद भाजपा ने उन पर निशाना साधते हुए कहा था कि मंत्र न पढ़ पाना उनके इन आरोपों को सही साबित कर रहा है कि ममता को हिंदुओं और उनकी परंपराओं की बहुत कम परवाह है।

 

लेकिन इस साल  ममता ने न केवल चंडीपाठ में मंत्रों को सही ढंग से पढ़ा बल्कि दुर्गा पूजा समितियों को सरकार की ओर से दी जाने वाली सहायता राशि को दोगुना कर दिया। इस घोषणा से सरकारी खजाने पर लगभग 180 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है। उन्‍होंने यह भी घोषणा की है कि दुर्गा पूजा विसर्जन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा, हालांकि नबी दिवस इस साल लक्ष्मी पूजा और विसर्जन के बीच पड़ रहा है। ज्ञात हो मुसलमान मिलाद उन-नबी मनाते हैं, जो पैगंबर मुहम्मद के जन्मदिन की याद दिलाता है।

 

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि हिन्‍दू प्रेम मुख्यमंत्री की बड़ी रणनीति का हिस्सा है क्‍योंकि 'मुस्लिम समर्थक'  टैग जो भाजपा ने उन्हें दिया और फिर विधानसभा चुनावों में इसका फायदा उठाने का प्रयास किया। ममता यह जानती हैं कि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती भाजपा है, इसलिए अपनी इसी छवि को बदलने के लिए ममता ने पिछले एक साल में प्रयास शुरू किये हैं। अब उन्‍हें शायद ही कभी अपने सिर को ढंकते और नमाज़ पढ़ते हुए देखा गया हो।

 

 

ममता बनर्जी ने अपनी सरकार की सबसे आकर्षक योजना का नाम लक्खीर भंडार के रूप में रखा है,  इसमें महिलाओं के लिए न्यूनतम मासिक आय 500 रुपये का वादा किया गया है। घरेलू महिलाओं की बचत या उनके द्वारा रखे गये पैसों को आमतौर पर हर बंगाली हिंदू घर में लक्खीर भंडार के रूप में जाना जाता है। लक्खी या लक्ष्मी भाग्य और धन की देवी हैं। पिछले साल, मुख्यमंत्री ने हिंदू पुजारियों के लिए 1,000 रुपये के मासिक वजीफे की घोषणा की थी। चुनावों से पहले,  उन्‍होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र  नंदीग्राम में 19 मंदिरों का दौरा किया था। हालांकि वह चुनाव हार गयी थीं। 

 

 

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि चंडीपाठ, दुर्गापूजा को लेकर घोषणाओं, योजनाओं के पीछे ममता द्वारा किया गया राजनीतिक विश्‍लेषण है। कलकत्‍ता विश्‍वविद्यालय के प्रो समीर दास कहते हैं कि 'मैं इसे एक संतुलनकारी कार्य के रूप में देखता हूं। पिछले साल, प्रशांत किशोर ने मुस्लिम प्लस वोट पाने का विचार बनाया। अब, प्लस हिंदुओं के बारे में है, ममता बनर्जी की छवि हिंदू भावनाओं को आहत कर रही थी। इसलिए, उन्होंने और उनकी पार्टी ने अपनी छवि के पुनर्निर्माण के लिए लगातार और व्यवस्थित रूप से काम किया है।  वह कहते हैं कि तृणमूल कांग्रेस जानती है कि उसे लगभग सभी मुस्लिम वोट मिलेंगे, लेकिन केवल मुस्लिम वोट ही उन्हें जीत नहीं दिला सकते। इसलिए “अब, ममता अपने हिंदू वोट-बैंक को वापस पाने के लिए बहुत प्रयास कर रही है। ममता उन आंकड़ों को नजरअंदाज नहीं कर सकती हैं कि बीजेपी को 38 फीसदी वोट शेयर मिला है।' दास कहते हैं कि  'कोई भी देख सकता है कि कैसे उसके सभी बड़े बैनर और पोस्टर, जिसमें वह नमाज पढ़ रही हैं, या फि‍र जिनमें वह सिर हिजाब से ढंके हुए है, शहर के कई हिस्‍सों से उन्‍हें हटा दिया गया है, यह बदलाव के ही संकेत हैं।  

 

ममता के इस बदलाव का श्रेय लेते हुए भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष का कहना है कि पीएम मोदी ने कम से कम “ममता बनर्जी को हिंदू तो बनाया है”। “भवानीपुर में विशाल हिंदू और सिख मतदाता हैं। वह अभी भी डरी हुई हैं और इसीलिए उसने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने वाली पूजा समितियों के लिए 50,000 रुपये के बोनस की घोषणा की। घोष का कहना है कि “हमने भारत के चुनाव आयोग से यही शिकायत की है कि इस घोषणा को चुनाव से पहले करके ममता ने चुनाव आचार संहिता का उल्‍लंघन किया है। अपनी शिकायत में भाजपा ने कहा है कि मुख्यमंत्री पूजा समितियों के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा नहीं कर सकती हैं क्योंकि 30 सितंबर को होने वाले भवानीपुर उपचुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है।

 

इसके पलटवार में तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने सोशल मीडिया पर बीजेपी को हिंदू विरोधी पार्टी बताते हुए कैंपेन शुरू किया है।  उन्होंने कहा, 'बीजेपी सनकी और ईर्ष्यालु लोगों की पार्टी है। वह कहते हैं कि जो भाजपा की विचारधारा को नहीं मानते उनमें कुछ भी अच्छा नहीं दिखता। “ ममता द्वारा किया गया चंडीपाठ सिर्फ हिंदुओं को लुभाने के लिए बल्कि सभी के लिए प्रार्थना करने के लिए था।  

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