‘कैलाश मानसरोवर यात्रा’ मार्ग पर सुविधाएं बढ़ा रहा चीन, जल्द ही परिक्रमा मार्ग पर लगेंगे ऑक्सीजन बूथ

मानसरोवर की यात्रा करने वालों के स्वागत के लिए चीन ने तिब्बत के कठिन रास्तों में अच्छी तरह सुविधा युक्त स्वागत केन्द्र बनाए हैं।

‘कैलाश मानसरोवर यात्रा’ मार्ग पर सुविधाएं बढ़ा रहा चीन, जल्द ही परिक्रमा मार्ग पर लगेंगे ऑक्सीजन बूथ

तिब्बत में कठिन ऊंचाइयों पर स्थित हिन्दुओं के पवित्र तीर्थ मानसरोवर के कठिन रास्ते भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए इस वर्ष से सुविधा जनक हो गये हैं।

 

इस कठिन यात्रा के लिए जाने वाले यात्रियों की यात्रा बेहतर बनाने के लिए चीन सरकार ने यात्रा के मार्ग पर कई जगह स्वागत केन्द्र के रूप में रहने के स्थान बनाये है और उनमें यात्रियों को सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है।

 

प्रत्येक स्वागत केन्द्र में लगभग 150 बिस्तरों वाले, यात्रियों के लिए रुकने के स्थान बनाये है, जहां चार्जिंग प्वाइंट, संयुक्त रसोईघर और संयुक्त बाथरूम हैं। वहां यात्रियों के भोजन की व्यवस्था भी है। विदेश मामलों के कार्यालय के महानिदेशक अवांग चेरिंग के अनुसार सभी चारों नये बनाये गये स्वागत केन्द्रों में एक जैसी सुविधाएं हैं।

 

चीन की सरकार ने इन केन्द्रों को बनाने के लिए $5.21 मिलियन खर्च किए हैं, उन्होंने कहा, दो केन्द्र इसी वर्ष शुरू हो गये हैं, अन्य दो यात्रियों के लिए 2020 में खोले जायेंगे।

 

उत्तराखंड के 43 वर्षीय तीर्थयात्री जितेन्द्र सिंह रौताला, जो कई बार यात्रा कर चुके हैं, उन्होंने कहा कि नई सुविधायें बहुत अच्छी हैं। चीन यह सुनिश्चित कर रहा है कि कठिन पैदल रास्ते को आसान और सुविधाजनक बनाया जाये।

 

एक निजी टूर आपरेटर ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि इस बदलाव का श्रेय भारत और चीन दोनों देशों की सरकारों को दिया जाना चाहिए। पहले यात्री टैंटों में रहते थे, अब वह संलग्न बाथरूम वाले भवनों में रहेंगे, उन्होंने कहा, अब 70 वर्ष आयु वाले भी यात्रा कर सकते हैं।

 

उपलब्ध कराई गई इन सुविधाओं के अतिरिक्त, सरकार अधिक ऊंचाई वाले रास्तों पर आक्सीजन बार बनाने की योजना बना रही है, अवांग ने कहा। लेकिन कई यात्रियों ने शिकायत की कि शौचालय सुविधा की गुणवत्ता सही नहीं हैं। मुंबई की वंदना नीलकुमार ने कहा, अपर्याप्त शौचालय सुविधाओं के कारण विशेष रूप से महिला यात्रियों को असुविधा होती है।

 

बीजिंग की यात्रा पर गए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनेे समकक्ष चीन के वांग ही से मिलने के बाद कहा कि दोनों देश कैलाश मानसरोवर यात्रा को बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।

 

चीन की तरफ से कुछ सुझाव कैलाश मानसरोवर यात्रा को बढ़ाने के संबंध में दिये गये हैं, हम इन प्रयासों की सराहना करते हैं, जयशंकर ने कहा। विदेश मंत्री वांग ने कहा कि तीर्थयात्रा दोनों देशों के बीच मित्रता बढ़ाने में सहायक बनती जा रही है।

 

कैलाश मानसरोवर यात्रा तिब्बत के लिए महत्वपूर्ण है, तिब्बत स्वायत क्षेत्र के विदेश मामलों के कार्यालय के डिप्टी जनरल सुन जिआबो ने कहा।

 

हम सभी तिब्बत में तीर्थयात्रा करनें वाले भारतीयों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का महत्व समझते हैं, सुन ने कहा। हम इस नीति को जारी रखेंगे और तिब्बत आने वाले भारतीयों के आराम के लिए जो भी संभव होगा, वह सब करेंगे, वह बोले।

 

तिब्बत भारत और चीन के संबंध बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। चीन के भारत से बेहतर संबंध बनाना, चीन की कूटनीति में प्रमुख है और तिब्बत का भारत के साथ संस्कृति और धर्म के आदान-प्रदान का लम्बा इतिहास है, वह बोले।

 

अली प्रीफेक्चर के उपायुक्त जी क्यिंगमिन ने कहा, जबकि चीन की सरकार भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, भारतीयों से भी कुछ अपेक्षाएं हैं।  हमें उम्मीद है कि तिब्बत की कठोर जलवायु के लिए यात्री सही तरह तैयार होकर आयेंगे, ताकि वह स्वस्थ आयें और स्वस्थ ही यहां से जायें। दूसरा, हमें उम्मीद है कि भारत लिपुलेख दर्रे के पास सड़क को बेहतर बनायेगा। यात्री दर्रे को पार करने के लिए चार से पांच दिनों तक यात्रा करते हैं। यदि स्थितियां बेहतर हो जाती हैं, उनकी यात्रा सरल हो जायेगी और तीसरा, हमें उम्मीद है कि यात्री तिब्बत में रहने के दौरान हमेंशा पिपल्स रिपब्लिक आफ चीन के नियम कानून का पालन करेंगे।

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