अमेरिका ने चीन की लगाम कसने के लिए सीआईए चीफ को काबुल भेजा, तालिबान से डील जारी

अमेरिका ने इशारा किया है कि काबुल और बीजिंग की बढ़ती नज़दीकियों से तालिबान की इस्लामिक अमीरात की सरकार को भविष्य में नुकसान होगा

अमेरिका ने चीन की लगाम कसने के लिए सीआईए चीफ को काबुल भेजा, तालिबान से डील जारी
Desh 24X7
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August 25,2021 03:05

तालिबान को लेकर चीन के बढ़ते उत्साह से अब अमेरिका की चिंता बढ़ रही है। तालिबान की गुपचुप मदद के लिए चीन पहले से ही पाकिस्तान की मदद ले रहा है और रूस भी उसके साथ खड़ा दिखाई देता है। दुनिया के इन बदलते समीकरणों के मद्देनज़र, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपनी शीर्ष गुप्तचर एजेंसी सीआईए के  प्रमुख को काबुल भेजा है। 

ऐसा कहा जा रहा है कि  सीआईए प्रमुख जे बर्न्स भविष्य की रणनीति को लेकर तालिबान के नेतृत्व से गुप्त वार्ता कर रहे हैं। वैसे भी अमेरिका को नाराज़ करके तालिबान आने वाले दिनों में अपनी सरकार मज़बूती से नहीं चला सकता है। यूरोप और अमेरिका से बैर रखकर, तालिबान का वही हाल हो सकता है जो बीस साल पहले हुआ था।  

 

 

 सीआइए निदेशक विलियम जे बर्न्‍स के काबुल जाने की अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है। अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि बर्न्‍स ने काबुल में तालिबान के शीर्ष नेताओं से बातचीत की है। व्‍हाइट हाउस की ओर से कहा गया है कि अफगानिस्‍तान में तालिबान के कब्‍जे के बाद यह किसी अमेरिका शीर्ष अफसर की पहली वार्ता है। खास बात यह है कि अमेरिकी सीआइए प्रमुख की काबुल यात्रा ऐसे समय हुई है, जब तालिबान अमेरिकी सैनिकों की वापसी को लेकर सख्‍त रुख अपनाए हुए है।

 

 

तालिबान के नेताओं ने कहा है कि अमेरिका 31 अगस्त तक अपनी सेना काबुल से हटा ले। ये सन्देश तालिबान को अमेरिका के लिए थोड़ा धमकी भरे अंदाज़ में दिया गया जिससे वाशिंगटन में भी कुछ तल्खी आई है। कई अमेरिकी विशेषज्ञों ने कहा है कि अगर तालिबान फिर से तेवर दिखाता है तो अमेरिका को अपनी ताकत का प्रदर्शन फिर  करना होगा जो काबुल की जेहादी हुकूमत के मंसूबों पर पानी फेर सकता है।

अमेरिका ने इशारा किया है  कि काबुल और बीजिंग की बढ़ती नज़दीकियों से तालिबान को भविष्य में नुकसान होगा। उधर चीन में कम्युनिस्ट पार्टी में एक विचार ये भी हो रहा है कि  शक्तिप्रदर्शन का ये मौका ज़रूर है लेकिन अगर तालिबान को दुनिया ने मान्यता नहीं दी तो चीन के व्यापार विस्तार में जेहादी सरकार बाधा  बन सकती है।  

 

 

जानकारों का कहना है कि बाइडन प्रशासन में सीआईए प्रमुख बर्न्‍स को बेहद अनुभवी राजनयिक माना जाता हैं।

पूर्व राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के कार्यकाल में कतर में शुरू हुई राजनयिक वार्ता का नेतृत्‍व बर्न्‍स ने ही किया था। अमेरिका में वह बैक चैनल वार्ताकार के रूप में जाने जाते है। इसलिए अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन ने इस बार भी यह जिम्‍मेदार अनुभवी राजनयिक बर्न्‍स को सौंपी है। 

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