वित्त मंत्री के झोले से तीसरे दिन निकली कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों की योजनाएं

गांवों के बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए 1लाख करोड़ रुपयों के कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड की स्थापना। इस धन का उपयोग कोल्ड स्टोरेज श्रृंखला और फसल के बाद के प्रबंधन से संबंधित कार्यों में होगा।

वित्त मंत्री के झोले से तीसरे दिन निकली कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों की योजनाएं

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने शुक्रवार को आर्थिक पैकेज की तीसरी किश्त की घोषणा करते हुए गांवों के बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए 1लाख करोड़ रुपयों के कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड की स्थापना करने के लिए कहा। इस धन का उपयोग कोल्ड स्टोरेज श्रृंखला और फसल आने के बाद, उसके प्रबंधन से संबंधित बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए किया जायेगा।

 

यह 1लाख करोड़ की वित्तीय सुविधा ग्रामीण अंचलों में कृषि के बुनियादी ढांचे से संबंधित परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराई जायेगी। सीतारमन ने कहा कि इस ढ़ांचे  के विकसित होने से, फसलों के आने के बाद उनका प्रबंधन को सस्ता और आर्थिक रूप से व्यवहारिक बन सकेगा।

 

वित्त मंत्री ने बताया कि समर्थन मूल्य की दरों पर सरकार किसानों से 74,300 करोड़ रुपयों का उत्पादन खरीदती है, ताकि किसानों के हाथ में पैसा पंहुचे। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दो महीनों के दौरान प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना और प्रधानमंत्री किसान बीमा योजना के अंतर्गत 6,400 करोड़ रुपए किसानों के खातों में जमा करवाए गए हैं।

 

निर्मला सीतारमन ने कहा कि 10,000 करोड़ रुपयों की व्यवस्था अति लघु खाद्य व्यवसायियों के लिए की गई है। इस योजना से दो लाख अति लघु व्यवसायी लाभान्वित होंगे, जिसका आधार क्षेत्र के अनुसार होगा, जैसे उत्तर प्रदेश में आम, जम्मू-कश्मीर में केसर, उत्तर पूर्व में बांस, आंध्रप्रदेश में मिर्च, तमिलनाडु में टेपीओका के लिए होगा। इस धन का उपयोग अभी तक भारत के लिए अनुपलब्ध स्वास्थ्य की दृष्टि से जागरूक निर्यात बाजार को विकसित करने के लिए हो सकेगा।

 

वह बोली कि असंगठित क्षेत्र की इन अति लघु इकाइयों को तकनीकी रूप से विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि वह एफ एस एस आई  के खाद्य पदार्थों के मानकों को अपना सकें, अपना ब्रांड बाजार बना सकें। इस योजना का लाभ 2 लाख इकाइयों को मिलेगा।

 

वर्तमान में कार्यरत अति लघु इकाइयों, किसानों के उत्पादन संगठनों, स्वयं सहायता समूहों व सहकारी संगठनों की मदद की जाएगी। इस योजना से इन इकाइयों के स्वास्थ्य और सुरक्षा स्तरों के बेहतर होने, खुदरा बाजार से संबद्ध होने की संभावना है।

 

वित्त मंत्री ने 20,000 करोड़ रुपयों का फंड मछली उत्पादन को अधिक उत्पादन और निर्यात बढ़ाने के अवसर देने के लिए दिया है।

 

भारत में हर्बल उत्पादों की खेती के लिए सरकार ने 4000 करोड़ रुपए उपलब्ध कराये है। इसका उद्देश्य आने वाले दो वर्षों में हर्बल उत्पादों की खेती 10 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का है। गंगा नदी के किनारों पर औषधीय पौधों की खेती भी विकसित करने की योजना है।

 

एक महत्वपूर्ण घोषणा कर सरकार ने टमाटर, प्याज और आलू के साथ सभी सब्जियों और फलों को आपरेशन ग्रीन में शामिल कर लिया है। आपरेशन ग्रीन योजना देश में टमाटर, प्याज और आलू की फसलों को स्थिर करने के लिए और पूरे देश में उनकी आपूर्ति पूरे वर्ष सुनिश्चित करने के लिए लाई गई थी, ताकि उनके दामों में बहुत अधिक उछाल न आये।

 

मधुमक्खी पालन के लिए भी 500 करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया है, जिससे इस कार्य में लगे ग्रामीण क्षेत्रों के दो लाख लोगों को लाभ पंहुचने का अनुमान है।

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