विषमता मिटने तक आरक्षण जरूरी है - रा. स्वयंसेवक संघ

सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा था, आरक्षण के बारे में दोनों वर्गों के बीच चर्चा होने की आवश्यकता है। उस समय सभी राजनीतिक दलों ने उसकी आलोचना की थी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस संबंध में स्पष्ट किया है

विषमता मिटने तक आरक्षण जरूरी है - रा. स्वयंसेवक संघ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विचार है कि समाज में जब तक आर्थिक और सामाजिक विषमता है, तब तक आरक्षण रहना चाहिए। जब विषमता समाप्त हो जायेगी, तभी आरक्षण के बारे में पुर्नविचार करना संभव होगा। कुछ दिन पहले सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा था कि आरक्षण के बारे में दोनों वर्गों के बीच चर्चा होने की आवश्यकता है। उस समय सभी राजनीतिक दलों ने उसकी आलोचना की थी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस संबंध में अपनी भूमिका का खुलासा किया है।

 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके पारिवारिक संगठनों की तीन दिनों की समन्वय बैठक राजस्थान के पुष्कर में हुई थी। इस बैठक के समाप्त होने के बाद संघ के सरकार्यवाह दत्ता जी होसबले ने पत्र परिषद में संघ की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारे समाज में सामाजिक और आर्थिक विषमता व्याप्त होने के कारण आरक्षण की आवश्यकता है। संविधान के द्वारा दिए गए आरक्षण से हम पूरी तरह सहमत हैं। जब सभी को यह विश्वास हो जायेगा कि समाज से आर्थिक और सामाजिक विषमता समाप्त हो गई है, तब आरक्षण पर पुनर्विचार होना चाहिए। यदि लोगों को आज ही लगता है कि विषमता मिट गई है, तो इस पर आज भी विचार किया जा सकता है। लेकिन उस समय तक आरक्षण शुरू रहना चाहिए, आने वाले समय में भी आरक्षण समाप्त नहीं हो सकता है, दत्ता जी ने कहा।

 

आरक्षण का स्वरूप स्थाई नहीं होना चाहिए, इस बारे में संघ का क्या कहना है, इस प्रश्न पर संघ के सरकार्यवाह ने कहा, जब तक आरक्षण का लाभ लेने वालों को उसकी आवश्यकता महसूस होती है, तब तक आरक्षण रहना चाहिए। मंदिर, शमसान और जलाशयों में सभी को प्रवेश करने की आजादी होनी चाहिए, जाति के आधार पर किसी को भी प्रवेश करने से न रोका जाए, उन्होंने यह भी स्पष किया।  होसबले ने यह भी बताया कि जातीय विषमता दूर करने के लिए संघ के द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में एक दलित संगठन ने सरसंघचालक मोहन भागवत को पत्र लिखकर आभार व्यक्त किया है। आरक्षण का विषय संघ के कार्यक्रम में नहीं है, समन्वय बैठक में भी उस पर कोई चर्चा नहीं हुई है, उन्होंने कहा।

 

इस बैठक में संघ के 35 संगठनों के 200 से अधिक प्रतिनिधि उपस्थित थे। लोकसभा चुनावों के बाद यह संघ की पहली समन्वय बैठक थी, जिसमें भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नढ्ढा और संगठन मंत्री बी एल संतोष भी उपस्थित थे।

 

जम्मू और कश्मीर में धारा 370 को रद्द करने के बारे में दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि यह बहुत पहले से हमारी मांग थी। कश्मीर क्षेत्र में सभी हमारा कार्य चल रहा था। हमने लद्दाख में भी राष्ट्रवाद की ज्योति बराबर जगा रखी थी, उसी के परिणाम स्वरूप धारा 370 रद्द की गई है, उन्होंने कहा।

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