किसान नेता से ज्‍यादा सियासी दल के मुखिया की तरह दहाड़े राकेश टिकैत

मुजफ्फरनगर में आयोजित किसान महापंचायत में नरेन्‍द्र मोदी, अमित शाह और योगी आदित्‍यनाथ पर साधा जमकर निशाना, कहा जब तक कृषि कानूनों की वापसी नहीं तब तक किसानों की घर वापसी नहीं, दिल्‍ली के दरवाजे खोल दे

किसान नेता से ज्‍यादा सियासी दल के मुखिया की तरह दहाड़े राकेश टिकैत
Desh 24X7
Desh 24X7

September 5,2021 08:46

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में रविवार को आयोजित हुई किसान महापंचायत में राकेश टिकैत किसान नेता कम सियासी दल के मुखिया ज्‍यादा नजर आये। टिकैत ने खूब सियासी बातें की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ पर जमकर हमले बोले। नरेन्‍द्र मोदी और अमित शाह को बाहरी बताते हुए कहा कि इन्‍हें यहां से जाना होगा। टिकैत ने कहा कि मोदी-योगी और अमित शाह, तीनों उत्तराखंड से जीतें, हमें कोई ऐतराज नहीं, यूपी की जमीन पर ये दंगा करवाने वाले लोग हैं, इन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब यह तय किया जा चुका है। टिकैत ने चेतावनी दी कि सरकार दिल्ली के दरवाजे खोल दे, वरना किसान उन्हें तोड़कर वहां प्रवेश कर जाएंगे। टिकैत ने कहा कि जब तक तीनों कृषि कानूनों की वापसी नहीं, तब तक घर वापसी नहीं।

विभिन्‍न राज्‍यों के 30 किसान संगठनों ने लिया महापंचायत में हिस्‍सा 

‘किसान महापंचायत’ का आयोजन संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से किया गया। इसमें विभिन्‍न राज्‍यों के 30 किसान संगठनों ने हिस्‍सा लिया। महापंचायत के मंच से राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार बात करने के लिए तैयार नहीं है। सरकार ने बात करनी बंद कर दी है। सिर्फ मिशन यूपी नहीं, देश बचाना है। हम सिर्फ किसानों के मुद्दे नहीं उठा रहे हैं, देश में जहां-जहां गलत हो रहा है उन्हें हम सामने रख रहे हैं। देश में संस्थाएं बेची जा रही हैं। सरकारी कर्मचारियों की पेंशन खत्म कर दी गई। बड़े लोग पैसे लेकर भाग रहे हैं। बिजली को प्राइवेट किया जा रहा है। सरकार एलआईसी को बेच रही है। देश का संविधान खतरे में है, इसे बचाना है। उन्होंने कहा कि 28 तारीख को भी याद कर लेना, उस रात को कोई नहीं बचना था। आंदोलन का कत्लेआम होना था। आठ हजार की संख्या में पहुंची पुलिस की आंदोलन पर कब्जा करने की नीयत थी। लेकिन जब देश की जनता साथ में खड़ी हुई तो आंदोलन बचा। ये सरकारें अगर हमारी कब्रगाह वहां बनाएगी, तब भी हम गाजीपुर बॉर्डर नहीं छोड़ेगे। आंदोलन जीतकर आएंगे, तभी वापस आएंगे। इस तरह की सरकारें देश में दंगे करवाने का काम करेंगी।

 अपने पिता का जिक्र करते हुए उन्‍होंने कहा कि पहले जब महेन्‍द्र सिंह टिकैत थे, तो हर-हर महादेव व अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगते थे, अब भी ये नारे हमेशा लगते रहेंगे। ये तोड़ने का काम करेंगे, हम जोड़ने का काम करेंगे। ये देश हमारा है, प्रदेश हमारा है। आप तैयार रहना।

टिकैत ने कहा कि लालकिले पर हम नहीं गए। किसान जाता तो वहां जाता, जहां कानून बनते हैं। लाल किले पर आप धोखे से लेकर गए हमें। कोई एजेंसी बोलने को तैयार नहीं। सभी एजेंसियों के साथ ही कलम व कैमरे पर भी इनका पहरा है। किसी की हिम्मत नहीं, जो इन्हें सच दिखा दे। टिकैत ने कहा कि किसी कीमत पर यहां से नहीं जाएंगे, 450 रुपये क्विंटल भाव गन्ने का चाहिए। हमें फसलों पर एमएसपी की गारंटी चाहिए। 2022 में फसलों के रेट दोगुने होंगे, पहली जनवरी से फसलों को दोगुने रेट पर बेचेंगे। टिकैत ने कहा कि 20 लाख से ज्यादा लोग मुजफ्फरनगर की धरती पर आए हैं, उन सभी को मैं धन्‍यवाद करता हूं। अगले वर्ष की शुरुआत में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस आयोजन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

टिकैत ने कहा कि आगामी 10 और 11 सितंबर को लखनऊ में तमाम किसान संगठन के पदाधिकारियों की एक अहम बैठक होगी, जिसमें प्रदेश स्तर और जिला स्तर पर संयुक्त मोर्चा बनाए जाने पर मुहर लगाई जाएगी। इलके अलावा संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से ऐलान कर दिया गया है कि तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के तहत 27 सितंबर को भारत बंद किया जाएगा। 

राकेश टिकैत ने कहा कि हम शहीद हो जाएंगे लेकिन मोर्चा डटा रहेगा। हमारा आंदोलन खत्म नहीं होगा। उन्‍होंने कहा कि हमें गन्ने का भाव 450 रुपये कुंतल चाहिए। कृषि बिलों की वापसी तक घर नहीं जाएंगे। सरकार को वोट से चोट देनी होगी। राकेश टिकैत ने कहा, 'जब भारत सरकार हमें बातचीत के लिए आमंत्रित करेगी, हम जाएंगे। जब तक सरकार हमारी मांगें पूरी नहीं करती तब तक किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। आजादी का संघर्ष 90 साल तक चला था, ऐसे में मुझे नहीं पता कि यह आंदोलन कब तक चलेगा।'महापंचायत में योगेंद्र यादव ने केंद्र और यूपी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि गन्ना मूल्य नहीं बढ़ा, फसल बीमा के नाम पर फरेब किया। दाना-दाना खरीदने के वादे पर खरीद नहीं हुई, कर्जमाफी के नाम ढोंग किया और लोगों को धर्म के नाम पर बांट दिया। उन्होंने कहा कि सौ सुनार की अब किसानों ने एक लुहार की चोट मारी है। 

Rakesh Tikait political farmer leader राकेश टिकैत राजनीतिक किसान नेता