बढ़ सकती है पाक की मुसीबत, काबुल हमले में आईएसआई के सामने आये लिंक

काबुल हमले को 'आइसिस-के' ने अंजाम दिया जिसका मुखिया असलम फारूकी पाकिस्तान का है : बाइडन ने कहा हमलावरों का खात्मा तय

बढ़ सकती है पाक की मुसीबत, काबुल हमले में आईएसआई के सामने आये लिंक
Desh 24X7
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August 27,2021 08:09

काबुल हवाईअड्डे पर हुए भीषण फिदायीन विस्फोट में जिस 'आइसिस-के' आतंकी संगठन का नाम आ रहा है उसके रिश्ते पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई से बताये जाते हैं। आइसिस-के ने गुरुवार को  हवाई अड्डे के बाहर हुए घातक हमलों की जिम्मेदारी ली है, जिसमें कम से कम 72 अफगान और 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए और दर्जनों घायल हो गए।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने आइसिस-के के मूल सफाये के लिए पेंटागन को आदेश दिए हैं। बाइडन ने ये भी एलान किया कि अब हमला करने वाले आतंकी संगठन को कुचलने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

 

  

आइसिस-के का मुखिया, मौजूदा समय में मावलावी अब्दुल्ला है जिसका असली नाम असलम फारूकी है। फारूकी, पाकिस्तान का रहने वाला बताया जाता है और उसके आईएसआई से गहरे रिश्ते रहे हैं। फारूकी आइसिस-के का मुखिया बंनने से पहले पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान से जुड़ा था। तहरीक-ए-तालिबान से जुड़ने तक आइएसआइएस-के प्रमुख बनने तक का सफर फारूकी ने पाकिस्तान से शुरू किया।

 

 

आइसिस-के मूलता आइसिस की ही एक शाखा है जो इराक, सीरिया की तरह एक अलग खोरासान एरिया में इस्लामिक खिलाफत को स्थापित करना चाहता है। आइसिस-के, के 'के' का मतलब खोरासान है और भगौलिक दृष्टि से इसमें अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, पाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के कुछ इलाके आते हैं। 2014 में पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के तालिबान लड़ाकुओं ने मिलकर आइसिस-के का गठन किया था।इस  संगठन के सदस्य, आइसिस के दिवंगत मुखिया अबू बकर बग़दादी के चेले माने जाते हैं।  

 

गुरुवार के हमलों में तालिबान का नेतृत्व संदेह के घेरा में आने से इसलिए बच गया क्यूंकि हमले की जिम्मेदारी आइसिस-के ने ली थी जो खुद तालिबान के विरोध में खड़ा है। आइसिस-के, के काबुल में स्लीपर सेल हैं और इसके लड़ाकू,  सख्त सुन्नी मान्यताओं की विभिन्न शिक्षाओं के साथ ही तालिबान के विरोधी हैं।

 

 

उधर अल जज़ीरा का दावा है कि 2014 के एक साक्षात्कार में, मध्य पूर्व फोरम के एक साथी अयमन जवाद अल-तमीमी ने कहा था कि आइसिस-के  'वास्तव में एक अलग समूह नहीं है', बल्कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा से आने वाले अल-कायदा के सदस्यों का एक दल है।

 

बहरहाल काबुल से लेकर पेशावर और अश्गाबत से लेकर बगदाद तक अब सीआईए और अमेरिकी फौज आइसिस-के की इस साज़िश को बेनकाब करने के लिए बड़े पैमाने पर इसके सदस्यों की धरपकड़ में जुट गयी है। आइसिस-के के आतंकियों की धरपकड़ अब इसलिए मुमकिन है क्यूंकि जो बाइडन ने एलान किया है कि काबुल हमले के सभी साज़िशकर्ताओं को अमेरिका न कभी भूलेगा, न कभी माफ़ करेगा।   

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