देश के 'सिस्टम' ने JIO को कैसे बनाया किंग, और कैसे डुबो दीं वोडाफोन-आईडिया जैसे कई कम्पनियाँ

अगर Airtel भी आगे चलकर थक गयी तो टेलीकॉम के खरबों रुपये का बाजार सिर्फ मुकेश अम्बानी के हाथ में होगा। देश में कुछ लोग ऐसा ही चाहते हैं।

देश के
दीपक शर्मा
दीपक शर्मा

September 8,2021 01:56

उद्योगपति मुकेश अम्बानी के ड्रीम प्रोजेक्ट JIO को स्थापित करने में देश की व्यवस्था ने, न सिर्फ सरकारी उपक्रम बीएसएनएल का बेड़ा गर्क किया बल्कि वोडाफोन-आईडिया सहित देश की कई बड़ी टेलीकॉम कंपनियों को भी चौपट कर दिया।लगभग 1.80 लाख करोड़ के घाटे में डूबी वोडाफोन-आइडिया (VI) का हाल अब ये है कि इस साल कम्पनी, अप्रैल-जून की तिमाही के लिए सरकार को लाइसेंस की 690 करोड़ रुपए की फीस देने में लाचार दिखी।

 

 जानकारों का कहना है कि प्रत्यक्ष तौर पर भले ही मोदी सरकार को आरोपित न किया जा सके पर जिस तरह से टेलीकॉम नियंत्रक TRAI ने रास्ता सुझाया, उससे JIO की  मंज़िल आसान होती चली गयी। देश के सबसे अमीर आदमी द्वारा प्रमोटेड JIO ने 'फ्लोर प्राइस' यानी कॉल के दाम, अव्यवहारिक रूप से इतने कम कर दिए थे कि बाकी कंपनियों के लिए बाजार में टिकना मुश्किल हो गया। इसी तरह शुरूआती दौर में inter connect usage (IUC) चार्ज में भी JIO ने कथित तौर पर मनमाफिक बदलाव कराया।अंतराष्ट्रीय कॉलिंग में भी JIO की चली।

 

 

अंबानी ने अमेरिकी सॉफ्टवेयर कम्पनी CISCO की तकनीक का भी लाभ उठाकर JIO की सेवायें शुरू में इतनी सस्ता कर दी कि  Aircel जैसी कम्पनी दिवालिया हो गयी और Telenor व Tata Docomo को बड़े खिलड़ियों की शरण में जाना पड़ा। एयरसेल के एक इंजीनियर ने बताया कि जिस तरह बड़ा व्यापारी किसी धंधे में पहले प्रोडक्ट खूब सस्ता बेचता है और फिर ग्राहक बंनाने के बाद,  उसी प्रोडक्ट को महंगा कर देता है, कुछ ऐसी तर्ज़ पर अम्बानी ने टेलीकॉम ऑपरेटर्स के साथ खेल खेला।'मान लो, अगर समोसा बनाने में लागत 5 रुपये आती हो पर आप समोसा 1 रुपये में बेच रहे हैं तो कौन सा हलवाई बाजार में आपके आगे टिकेगा।  JIO ने हम लोगों के साथ कुछ ऐसा ही किया, ' एयरसेल के इस पूर्व इंजीनियर ने बताया।  

 

   

व्यवस्था को साथ लेकर आगे बड़े JIO ने वोडाफोन और आईडिया(VI) को भी हाथ मिलाने पर मज़बूर कर दिया। अम्बानी के JIO का कहर इतना जबरदस्त था कि मिलकर भी VI का जीना दुश्वार था। टेलीकॉम मंत्रालय के अधिकारी ने देश 24x7 को बताया कि सरकार में एक तटस्थ भाव रखने वाला तबका, VI की मदद करना चाहता है क्यूंकि ये कम्पनी अगर डूब गयी तो मंदी के दौर में इसका बाजार पर बहुत बुरा असर होगा। ' फैसला तो प्रधानमंत्री स्तर पर ही लिया जा सकता है। हम तो सिर्फ इतना कह सकते हैं कि कम्पनी को बचाने में जो भी मुनासिब सहायता हो वो की जानी चाहिए....अभी कुछ हो सकता है, आगे घाटा और बढ़ेगा तो VI का दिवालिया होना निश्चित है, ' इस अधिकारी ने सुझाव दिया।

 

  अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही VI में 27 फीसदी से ज्यादा का हिस्सा आदित्य बिरला ग्रुप के मालिक कुमार मंगलम बिरला का है जो एक वक़्त पर आईडिया को देश की  सबसे अच्छी टेलकॉम सेवा देने वाली कम्पनी बनाना चाहते थे। लेकिन JIO की आंधी में जब कुमारमंगलम के सपने बिखरे, तो उनको अपनी कम्पनी को वोडाफोन के साथ मर्ज करके नई  कंपंनी VI  बनानी पड़ गयी। लेकिन JIO ने बाजार को इस तरह बिगाड़ डाला था क़ि मिलकर भी VI को नया आसमान न मिल सका। फ़िलहाल VI के प्रबंधन को लगता है कि मोदी सरकार पूर्वाग्रह दूर करके, VI को बचाने में कोई बेहतर फैसला करेगी। प्रबंधन के इस भरोसे से वोडाफोन आईडिया का शेयर बाजार में भाव पिछले छह दिनों में 34 प्रतिशत बढ़ा है।

 

 

सूत्रों के मुताबिक पहाड़ जैसे घाटे के अलावा VI पर देश के बैंकों का भारी क़र्ज़ है जो 28 हज़ार करोड़ से अधिक है। बैंक के दबाव के साथ ही VI पर 58,000 करोड़ रुपये की और भी देनदारियां हैं। इन बढ़ते घाटों से परेशान कुमार मंगलम बिरला ने खुद को वोडाफोन आईडिया के मैनेजमेंट से अलग कर लिया ताकि उनके VI में रहने का प्रभाव उनकी दूसरी कामयाब कंपनियों पर न पड़े। 

 

 

 बहरहाल सवाल अब बाजार में यही है कि  मोदी सरकार अगर कोई राहत लेकर नहीं आयी तो VI को अपनी दुकान बंद करनी ही होगी। फिर बाजार में दो ही प्रतिस्पर्धी बचेंगे, JIO और Airtel .  कर्ज़े को लेकर हालत सुनील भारती मित्तल की कम्पनी Airtel की भी अच्छी नहीं है। अगर Airtel भी आगे चलकर थक गयी तो टेलीकॉम के खरबों रुपये का बाजार सिर्फ मुकेश अम्बानी के हाथ में होगा। देश में कुछ लोग ऐसा ही चाहते हैं।                

     

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