राजनायिकों के एक दल को कश्मीर ले जाने पर विचार

जम्मू और कश्मीर में 5 अगस्त के बाद लगाये प्रतिबंधों के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव के चलते, भारतीय जनता पार्टी की सरकार विदेशी राजनयिकों को राज्य में ले जाने की योजना बना रही है।

राजनायिकों के एक दल को कश्मीर ले जाने पर विचार

जम्मू और कश्मीर में 5 अगस्त के बाद लगाये प्रतिबंधों के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव के चलते, भारतीय जनता पार्टी की सरकार विदेशी राजनयिकों को राज्य में ले जाने की योजना बना रही है।

 

यह अभियान उन्हें यह दिखाने के लिए बनाया जा रहा है कि वहां पर सभी ठीक है। सरकार में उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि कई राजनायिकों को इस दौरे के बारे में बताया भी था चुका है, लेकिन इस संबंध में अंतिम निर्णय अभी लिया जाना है।

 

हालांकि सरकार का कहना है कि जम्मू और कश्मीर में अधिकतर स्थिति सामान्य है, लेकिन जम्मू और कश्मीर के कई इलाकों में अभी भी प्रतिबंध जारी हैं। यह भी पता चला है कि सरकार इंतजार कर रही है कि हालातों में कुछ और सुधार हो जाते, तो राजनायिकों को कश्मीर ले जाया जाये।

 

यद्यपि विश्व समुदाय कश्मीर मुद्दे पर पूरी तौर पर भारत के साथ है, उसने जम्मू और कश्मीर से धारा 370 हटाकर, राज्य का विशेष दर्जा समाप्त करने के मामले में सरकार का साथ दिया है, लेकिन राज्य में लम्बे समय से चले आ रहे सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण कुछ कुछ चिंतित है।

 

जम्मू और कश्मीर में सरकार के द्वारा अतिरिक्त सुरक्षा बलों की नियुक्ति करने के बाद से 63 दिन बीत चुके हैं, कर्फ्यू लगाया गया है, लोगों के आने जाने पर प्रतिबंध है, जिसके कारण मीडिया बुरी तरह प्रभावित हुआ है और वह वहां की जानकारी की रिपोर्ट नहीं कर पा रहा है।

 

अधिकतर कश्मीरी नेता अभी भी नजरबंद हैं, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने जम्मू और कश्मीर में मानवाधिकार को लेकर चिंता व्यक्त की है, अमरीकी सीनेटर एलिजाबेथ वारेन, जो राष्ट्रपति चुनाव की संभावित उम्मीदवार हैं, उन्होंने कश्मीर में संचार माध्यमों की रोक पर चिंता जताई है

Diplomats Kashmir visit Government