सीमा पर फ़ौज और समंदर में नया क़ानून : आख़िर चीन का इरादा क्या है ?

सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहे भारत के लिए चीन अब हर मोड़ पर मुसीबतें खड़ी कर रहा है

सीमा पर फ़ौज और समंदर में नया क़ानून : आख़िर चीन का इरादा क्या है ?
दीपक शर्मा
दीपक शर्मा

September 4,2021 01:47

दुनिया में चीन को और भी ताकतवर बनाने के लिए जहाँ बीजिंग ने व्यापार, सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर कुछ सख्त कानून बनाये हैं वहीँ अपनी समुद्री शक्ति बढ़ाने के लिए इस महीने से दक्षिण चीन सागर में नए कानून लागू कर दिए हैं। इस नए कानून के तहत दक्षिण चीन सागर से गुजरने वाले विदेशी जहाजों की जांच के अधिकार चीनी सरकार  के पास होंगे। चीन के इस नए पैंतरे से भारत के लिये भी चिंता बढ़ी हैं क्यूंकि देश का 13.8 लाख करोड़ का कारोबार इसी समुद्री रास्ते से होता है। 

 

 

सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहे भारत के लिए चीन अब हर मोड़ पर मुसीबतें खड़ी कर रहा है। अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान से मिलकर, मध्य और पूर्व एशिया में सिल्क रुट बना कर, भारतीय उपमहाद्वीप में नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान को मुठ्ठी में करके, चीन ने पहले से ही भारत के आगे कई चुनौतियाँ रख दी है। साल भर से लद्दाख सीमा पर अपनी फौजें तैनात कर चीन ने सैनिक शक्ति का शर्मनाक प्रदर्शन किया है। और अब बाक़ी कसर बीजिंग की तानाशाह सरकार ने नए समुद्री क़ानून लाकर पूरी कर दी है। 

 

 

विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम ना लेने की शर्त पर  देश 24x7  को बताया कि चीन ही हमारे देश का असली प्रतिस्पर्धी और शत्रु है। इस विशालकाय ड्रैगन से निपटने के लिए भारत के पास सिर्फ़ एक विकल्प है कि पूरे राष्ट्र को एक जुट करके देश ...अब केवल उद्योग और उच्च तकनीक के उत्पादन पर सारा फ़ोकस करे। 'लेकिन उत्पादन क्रांति की जगह मौजूदा सरकार और उसका मूल संगठन आरएसएस, देश में 'स्थिति की जगह मनोस्थिति' बदलने के प्रयास में है। सत्ता हो या विपक्ष या बुद्धजीवी, किसी को हिमालय के उस पार देखने की फुर्सत नहीं। दरअसल छोटे और हल्के  किस्म के महत्वाकांक्षी लोग आज सोशल मीडिया के दम पर भारत में अहम हो गए हैं,' इस अधिकारी ने बताया और आगे कहा ,' महाशक्ति के बनने के लिए जब भारत को नेहरू से भी बड़े विजनरी की ज़रुरत है तब देश में 'पढ़े की जगह कढ़े' किस्म के नेता आगे की कतार में खड़े हो गए हैं। '  

 

        

  क्या है चीन का नया पैंतरा ? भारत के लिए क्या होगी मुश्किल ?

 

 

 चीन ने अपनी समुद्री सुरक्षा का हवाला देते हुए 1 सितंबर से नया कानून लागू किया है। इस कानून के मुताबिक, चीन के समुद्री इलाकों  से निकलने वाले दूसरे देशों के जहाजों को अब चीन सरकार को अपना कॉल साइन, पोजिशन, डेस्टिनेशन, जहाज में लोड सामान की जानकारी, स्पीड, लोडिंग कैपेसिटी की जानकारी देनी होगी। ऐसा नहीं करने पर चीन अपने कानून के हिसाब से कार्रवाई कर सकेगा। ये कानून किस्म किस्म के जहाजों पर लागू होगा जिसकी पूरी जानकारी अभी आनी है। 

 

 

भारत का काफी ज्यादा व्यापार आजकल जापान, दक्षिण कोरिया और पूर्वी एशिया देशों के साथ है। भारत के कुल समुद्री व्यापार का करीब 55%  साउथ चाइना सागर  के जरिए ही होता है। इसके अलावा भारत ने कई साल पहले वियतनाम के साथ साउथ चाइना सागर  में ऑयल और गैस एक्सप्लोरेशन के लिए करार किया था। चीन ने इस कदम का खासा विरोध किया था। 2019 में चीन ने वियतनाम के समुद्री क्षेत्र में 30 से ज्यादा जंगी जहाजों को तैनात कर दिया था। अब इस दिशा में नया कानून और अड़चने डाल सकता है।  

 

 

दुनियाभर में हो रहे समुद्री यातायात को लेकर चीन, भारत समेत 100 से भी ज्यादा देशों में एक एग्रीमेंट साइन किया गया है। भास्कर के मुताबिक इसे यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (UNCLOS) कहा जाता है। इसके मुताबिक, किसी भी देश की जमीन से 12 नॉटिकल मील (22.2 किलोमीटर) तक उस देश की समुद्री सीमा मानी जाती है।

इस कानून के मुताबिक 12 नॉटिकल मील की दूरी के बाद का समुद्री क्षेत्र कोई भी देश ट्रेड के लिए इस्तेमाल कर सकता है। इस दूरी के बाद किसी भी देश की समुद्री सीमा लागू नहीं होती। चीन का ये नया कानून UNCLOS की इस संधि का भी उल्लंघन करता है।

 

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