चीन ने कहा हर हाल में बनना है सुपरपावर इसलिए बच्चों के 'गेमिंग' पर लगा रहे हैं पाबन्दी

चूँकि वामपंथी सरकार ने 60 करोड़ लोगों को गरीबी की रेखा से निकाला है और चीन में रोटी, कपडा व मकान के सवाल को हल किया है इसलिए जनता का बहुमत, ऐसे फरमान न चाहते हुए भी कबूल कर लेता है

चीन ने कहा हर हाल में बनना है सुपरपावर इसलिए बच्चों के
Desh 24X7
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August 30,2021 10:47

चीन की वामपंथी सरकार का मानना है कि बच्चों के लिए वीडियो गेम 'अफीम की खतरनाक लत' की तरह हैं इसलिए एक बेहद सख्त आदेश के तहत चीन में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सप्ताह में तीन घंटे से अधिक वीडियो गेम खेलने से मना कर दिया गया है। चीन का कहना है कि बच्चे देश के भविष्य हैं और इसलिए इस लत से प्लग खींचने की ज़रुरत है। नए नियम का सरल शब्दों में मतलब है कि चीन में बच्चे, मोबाइल फ़ोन पर गेमिंग और ऐसे कांटेंट से दूर रहें । 

 

 हालाँकि इस नियम का दबे स्वर में कुछ विरोध हुआ पर तानाशाह सरकार के आगे कोई मुखरता से विरोध नहीं कर पाया।दूसरी तरफ वामपंथी धारा के बुद्धिजीवियों का कहना है कि महाशक्ति बनने के लिए देश को ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं। चीन का कहना है कि बच्चे जमकर पढाई करें, खेल के मैदान में खूब खेलें पर अपना ज्यादा वक़्त वीडियो गेम खेलकर बर्बाद न करें। चीन ने संकल्प लिया है कि आने वाले दशक में वो अमेरिका को पछाड़कर दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बनेगा। 

 

 

वीडियो गेम के नए नियमों को समझाते हुए कहा गया कि युवा पीढ़ी भविष्य की धरोधर है और क्यूंकि चीन को हर हाल में महाशक्ति बनना है इसलिए समाज और अर्थ व्यवस्था के क्षेत्र में देश को मज़बूत करने के लिए ये नियम एक प्रकार से बदलाव का हिस्सा है। चीन के इस फैसले से दुनिया की अरबों रुपये की गेमिंग इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है। अभी तक वीडियो गेमिंग से ये कंपनियां चीन में लाखों युवाओं को आकर्षित करके खूब दौलत कमा रही थीं। 

चीन की समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार 18 साल के बच्चे हफ्ते में तीन दिन सिर्फ एक घंटा ही वीडियो गेम खेल सकेंगे। ये तीन दिन होंगे  शुक्रवार, शनिवार और रविवार और खेलने का समय होगा रात 8 बजे से 9 बजे तक। सार्वजनिक छुट्टियों होने पर भी बच्चे एक घंटा, इसी तय किये गए समय पर वीडियो गेम खेल सकते हैं।

 

 

ये नियम, चीन की  नेशनल प्रेस एंड पब्लिकेशन एडमिनिस्ट्रेशन (एनपीपीए) ने जारी किये हैं।  इससे पहले इसी संस्था ने देश के टेक बिज़नेस के दिग्गज अलीबाबा ग्रुप और टेनसेंट होल्डिंग्स के खिलाफ सख्ती की थी।  ऐसा आरोप था कि ये दोनों चीनी कंपनियां चीन से कहीं ज्यादा रूचि अपनी कम्पनी के अनाप शनाप तरीके ये मुनाफा बढ़ाने में ले रही हैं। चीन के पोलित ब्यूरो का मानना है कि निजी क्षेत्र को बढ़ावा देना चाहिए पर राष्ट्र की कीमत पर नहीं। निजी कंपनियां खूब फुले फलें लेकिन वो इतनी बढ़ी और रसूखदार न हो जाएँ कि राजनीति की दिशा तय करने की कोशिश करें। पोलित ब्यूरो का मानना है कि कारपोरेट कंपनियां जब एक सीमा से बड़ी हो जाती हैं तो सरकार की जनहित नीतियों को प्रभावित करने लगती हैं।कई ऐसे देश हैं जहाँ सरकारें तो जनता चुनती हैं पर सरकार के नेता, जनता के बजाय बड़ी निजी कंपनियों के हित ज्यादा साधते हैं।

 

 

समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने नए नियम बनांने पर एनपीपीए के एक प्रवक्ता के हवाले से कहा, 'बच्चे हमारी मातृभूमि का भविष्य हैं ... बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा लोगों के महत्वपूर्ण हितों से संबंधित है, इसलिए राष्ट्र को शक्तिशाली बनाने के लिए हमे ऐसा करना पड़ रहा है ।' जानकारों का कहना है कि क्यूंकि वामपंथी सरकार ने 60 करोड़ से ज़्यादा  लोगों को गरीबी की रेखा से निकाला है और चीन में  रोटी, कपडा और मकान के सवाल को हल किया है इसलिए जनता का बहुमत, बीजिंग सरकार के ऐसे नियम न चाहते हुए भी कबूल कर लेता है। 

 

 

देश के वीडियो गेम बाजार की देखरेख करने वाले एनपीपीए  ने कहा कि गेमिंग कंपनियों को निर्धारित घंटों के बाहर किसी भी रूप में बच्चों  को सेवाएं प्रदान करने से रोक दिया जाएगा।  और कोई कम्पनी इसके खिलाफ जाएगी तो कार्रवाई की जाएगी। 

इससे पहले, चीन ने 2019 के नियमों के तहत 18 साल के कम बच्चों को  किसी भी दिन 1.5 घंटे और छुट्टियों पर तीन घंटे तक वीडियो गेम खेलने की अवधि सीमित कर दी थी।

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