मध्यप्रदेश का पेंच और केरल का पेरियार, देश के सबसे अच्छे टाइगर रिजर्व

मध्यप्रदेश की पेंच सेंचुरी और केरल की पेरियार सेंचुरी प्रबंधन की दृष्टि से देश की सबसे बेहतरीन टाइगर संरक्षण सेंचुरियां हैं।

मध्यप्रदेश का पेंच और केरल का पेरियार, देश के सबसे अच्छे टाइगर रिजर्व

भारत की 40 टाइगर रिजर्व सेंचुरियों के मूल्यांकन की रिपोर्ट, चौथे नेशनल टाइगर एस्टीमेसन (टाइगर जनगणना) के साथ जारी की गई है।

 

मिजोरम का डम्पा रिजर्व और उत्तराखंड का राजाजी रिजर्व इस रिपोर्ट में सबसे नीचे 42.97% और 44.53% अंकों के साथ है। सबसे बेहतरीन रिजर्व को 93.75%अंक मिले हैं। 41% और उससे अधिक अंकों को ठीक माना गया और 75% तथा उससे अधिक अंक बहुत अच्छा श्रेणी में रखे गये।

 

इन सेंचुरियों को पांच भौगोलिक भागों में बांटा गया, वेस्टर्न घाट क्लस्टर में केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक थे, जिन्हें औसत 81% अंक मिले। इन टाइगर रिजर्वों में बांदीपुर, नागरहोल, भद्रा, बिलीगिरी रंगनाथ स्वामी मंदिर, काली, पेरियार, पेराम्बीकुलम, सत्यमंगलम, मुदुमलाई, अन्नामलाई और कालकड- मुंडनथाराई हैं।

 

राजस्थान के रणथंभौर और सरिक्सा की स्थिति में गिरावट आई है। यह 2014 की तुलना में अच्छी श्रेणी से ठीक की श्रेणी में फिसल गई है। केरल में सबसे बेहतरीन तरीके से रिजर्व का रख रखाव किया गया है। उसके बाद प्रबंधन की दृष्टि से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों का नंबर आता है।

 

पेंच बेहतरीन तरीके से प्रबंध किया गया टाइगर रिजर्व है, इसमें मौसम के हिसाब से बायोडायवर्सिटी योजना है, सुरक्षा के लिए उड़नदस्ते और गश्त की व्यवस्था है। स्थानीय निवासियों के साथ हमेशा बैठकें होती रहती हैं, पर्यटन के माध्यम से जो भी पैसा इकट्ठा होता है, उसका उपयोग अधिकारी संरक्षण कार्यक्रमों के लिए करते हैं, रिपोर्ट में कहा गया है।

 

लेकिन इसके साथ ही चुनौतियां भी हैं, राष्ट्रीय राजमार्ग 7 पेंच सेंचुरी के बीच से होकर गुजरता है, यह कान्हा पेंच टाइगर कारीडोर को दो भागों में बांटता भी है, यह कई टाइगरों की मौत के लिए जिम्मेदार भी है। करंट लगने से कई जानवरों की मौत के मामले भी सामने आये हैं।

 

 

 

 

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