महासंग्राम 2019: क्‍या मोदी के प्रचार में ब्रम्‍हास्‍त्र बनेगी ये फिल्‍म

लुभावने बजट के बाद अब फिल्‍म से छाएंगे मोदी, चुनाव से पहले रिलीज हो सकती है

महासंग्राम 2019: क्‍या मोदी के प्रचार में ब्रम्‍हास्‍त्र बनेगी ये फिल्‍म
श्रद्धा जैन
श्रद्धा जैन

February 6,2019 11:42

जिंदगी में इत्तेफाक होना लाजिमी है लेकिन ये इत्तेफाक बार-बार होने लगें तो उन्‍हें सुनियोजित घटना कहा जाता है. भारत की राजनीति में आजकल ऐसे ही इत्‍तेफाक हो रहे हैं. चुनावों के करीब आते ही राम मंदिर मुदृदे का उछलना. इधर मोदी सरकार का अचानक सवर्णों, गरीबों और मिडिल क्‍लास पर मेहरबान होना. अब पीएम नरेन्‍द्र मोदी पर बायोपिक का आना.

 

बायोपिक भी एक्‍सीडेंटल प्राइम मिनिस्‍टर जैसी नहीं, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को लेकर तथ्‍यहीन बातें कहीं गई हों या जो उनकी छवि पर नकारात्‍मक असर डालती हों.बल्कि ऐसी फिल्‍म जो चुनाव में उनका प्रचार करने के लिए किसी ब्रम्‍हास्‍त्र का रोल निभाएगी. विवेक ओबेराय अभिनीत ये फिल्‍म मोदी के लिए कितनी फायदेमंद हो सकती है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फिल्‍म के पोस्‍टर रिलीज पर ही एक भाजपा शासित प्रदेश के मुख्‍यमंत्री ने इस फिल्‍म को लेकर कमाल की ‍भविष्‍यवाणी कर दी. महाराष्‍ट्र के सीएम देवेन्‍द्र फडणवीस ने ट्वीट किया कि ये फिल्‍म इतिहास बनाएगी. इतना ही नहीं उन्‍होंने कहा कि ये फिल्‍म ऐसे वैश्विक नेता पर बन रही है, जो सही मायनों में राजयोगी है.

 

अब यदि पोस्‍टर रिलीज पर ही ऐसी  बातें कही जाएं तो इससे साफ पता पता चलता है कि फिल्‍म मोदी का  महिमामंडन करने वाली है. इस फिल्‍म के लिए पूरी कास्‍ट तय हो चुकी है. विवेक ओबेरॉय टाइटल रोल में नजर आएंगे, बाकी कलाकारों में बोमन ईरानी, ​​दर्शन कुमार, जरीना वहाब, मनोज जोशी, प्रशांत नारायणन, बरखा बिष्ट सेनगुप्ता, अक्षत आर सलूजा, अंजन श्रीवास्तव, राजेंद्र गुप्ता और यतिन करियाकर आदि शामिल हैं.  

 

ओमंग कुमार के निर्देशन में बन रही इस फिल्‍म की शूटिंग के लिए गुजरात में लोकेशन तैयार हो रही है. जल्‍द ही इसकी शूटिंग शुरू होगी. माना जा रहा है कि फिल्‍म अप्रेल में रिलीज हो सकती है. यानि ऐन वोटिंग के वक्‍त.

 

वैसे भी पिछले पांच सालों में प्रचार के लिए मोदी ने सोशल मीडिया, पोस्‍टर्स, स्‍लोगन वॉर जैसे कई तरीके अपनाए लेकिन इस बार तो वो इस सबसे उपर 70 MM एंटरटेनमेंट को चुनावी हथियार के रूप में ला रहे हैं.

 

जांच हो कि फिल्‍म किसके पैसे से बन रही  

कांग्रेस की कम्‍युनिकेशन सेल के सेक्रेटरी प्रणव झा से बात की तो उन्‍होंने कहा कि जब व्‍यक्ति नाकामयाब होता है तो वो विज्ञापन देकर और कई तरह से शोर-शराबा करके उस नाकामयाबी को छुपाता है। पीएम मोदी जितना पैसा योजना पर खर्च कर रहे हैं, उससे कहीं ज्‍यादा उस योजना के प्रचार और विज्ञापन पर कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना। आम चुनावों से पहले भाजपा अपनी नाकामयाबी को छुपाने के लिए लोगों की गाढ़ी कमाई के 5000 करोड़ रूपए खर्च कर चुकी है।

 

इसके पहले भी हजारों करोड़ रूपए भाजपा ने राज्‍यों के चुनावों में खर्च किए थे। लोकसभा चुनाव में तो प्रचार के लिए फिल्‍म ला रहे हैं। इसकी जांच होनी चाहिए कि ये फिल्‍म किसके पैसे से बन रही है। वैसे भी अब ये छुपा नहीं रह गया है कि राजनीति‍क पार्टियों में सबसे ज्‍यादा धन किस पार्टी को मिल रहा है, इलेक्‍शन बॉन्‍ड का दुरूपयोग कर ज्‍यादा से ज्‍यादा राशि उगाही जा रही है लेकिन इस सरकार का ये प्रयास नाकाम ही रहेगा। जनता इनकी असलियत समझ चुकी है और मई में इन्‍हें चलता करेगी।  

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