ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत का स्थान जान दंग रह जाओगे ! क्या यही है मोदी का 'न्यू इंडिया' ?

ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2021 के अनुसार दुनिया के 116 देशों के सबसे भूखे लोगों की लिस्ट में मोदी जी के सपनों का न्यू इंडिया 101वें स्थान पर आता है।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत का स्थान जान दंग रह जाओगे ! क्या यही है मोदी का

कौन है जिसे भूख नहीं लगती है, हर किसी को भूख लगती है, और भूख की बात भी इसलिए कर रहा हूँ कि दुनिया में कई देश ऐसे हैं जो भुखमरी से पीड़ित हैं उसी में एक देश और है जिसकी तरफ ध्यान बहुत कम लोगों का जाता है, वो है भारत, जी हाँ, इसके बारे में आगे बात करेंगे उससे पहले आपको बता दें कि इसी वर्ष 20 मार्च को राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने ग्लोबल हंगर इंडेक्स के बारे में एक प्रश्न पूछा था तो उसका जवाब देते हुए तत्कालीन कृषि राज्य मंत्री ने कहा था कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स बकवास है, तथ्यहीन है और हमारे देश में भुखमरी का सवाल ही नहीं है क्योंकि यहाँ तो सड़क के कुत्ते को भी खाना देने की परम्परा है।

 

 

आपको बता दें मगर मंत्री जी के इस बयान का जवाब वर्षों पहले राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने दिया था, जब उन्होंने लिखा था – श्वानों को मिलता दूध-भात, भूखे बच्चे अकुलाते हैं। ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2021 के अनुसार दुनिया के 116 देशों के सबसे भूखे लोगों की लिस्ट में मोदी जी के सपनों का न्यू इंडिया 101वें स्थान पर आता है।

 

 

पिछले वर्ष, यानी 2020 में कुल 107 देशों में हमारा स्थान 94वें था। इससे साफ़ पता चलता है कि ये सरकार सिर्फ सच्चाई से भागती है और जमीनी सच्चाई को दबाने कि कोशिश करती रहती है और केवल जनता को बेवक़ूफ़ बनाने वाले दुष्प्रचार करती रहती है हमारे देश में भूख राजनीति है। सारे  राजनीतिक दल एक दुसरे-दूसरे पर बढ़ती भूखमरी का आरोप लगाते है, पर सत्ता परिवर्तन के बाद भूखमरी पहले से अधिक बढ़ जाती है।

 

अब तो हालत यह है कि भूख मरती नहीं, खाना मिलता नहीं – अलबत्ता खाने के नाम पर जनता प्रधानमंत्री जी के फोटो का बोझ उठाकर घूमती है। भूख से वोट का मसला भी जुड़ा है। दुष्यंत कुमार की एक कविता है, 'भूख है तो सब्र कर'। यह कविता देश का एक कालजयी प्रतिबिम्ब है

 

 

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