अडानी के खेल में अब कैसे फंसते जा रहे है सीएम जगन रेड्डी ?

बेशुमार दौलत होने की वजह से जगन, मोदी सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के दबाव में रहते हैं। इस दबाव का अब फायदा गौतम अडानी को आंध्र प्रदेश में मिल रहा है जहाँ अडानी ग्रुप तेज़ी से विस्तार कर रहा है।

अडानी के खेल में अब कैसे फंसते जा रहे है सीएम जगन रेड्डी ?
दीपक शर्मा
दीपक शर्मा

September 15,2021 03:25

जमानत पर चल रहे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के लिए मुसीबतें फिर बढ़ रही हैं। देश के चर्चित उद्योगपति गौतम अडानी को उनके पोर्ट कारोबार में मदद करने को लेकर जगन के खिलाफ जांच की तलवार लटक रही है। हाई कोर्ट ने एक याचिका स्वीकार करते हुए अडानी और जगन के बीच खरबों रुपये के गंगावरम पोर्ट की डील पर गंभीर सवाल उठाये हैं। 

 

 

अदालत में कहा गया है कि अडानी ग्रुप ने जिस गुपचुप तरीके से गंगावरम पोर्ट पर कब्ज़ा जमाया है उसकी लोकायुक्त से जांच होनी चाहिए। इसके अलावा जिस तरह से अडानी ने इस बेशकीमती पोर्ट के सभी शेयरहोल्डर के साथ अलग अलग डील की है उसकी गहराई से जाँच हो और सारी लेनदेन का ऑडिट कराया जाये। इस बीच विपक्ष का आरोप है कि जगन ने प्रधामंत्री मोदी और उनके सहयोगी अमित शाह के दबाव में अडानी के हाथ में ये पोर्ट सौंप दिया है।  

 

 

दरअसल, पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे जगन मोहन रेड्डी ने जिस तरह गौतम अडानी के साथ हाथ मिलाया है उस पर विपक्ष ने उनकी घेराबंदी की है।खासकर बीते रविवार को जब गौतम अडानी की जगन के साथ मुलाकात हुई तो विपक्ष के तेवर और तीखे हुए।ऐसा कहा जा रहा है कि विजयवाड़ा में हुई इस गोपनीय मुलाकात में गौतम के साथ उनके बेटे करन भी थे जो अडानी पोर्ट लिमिटेड के सीईओ हैं। हालाँकि इस मुलाकात की आधिकारिक पुष्टि राज्य सरकार ने नहीं की है लेकिन सूत्रों के अनुसार अडानी और जगन के बीच ये गोपनीय बातचीत गंगावरम पोर्ट पर उठे विवाद को लेकर हुई थी। 

 

 

राजनैतिक रसूख के चलते देश के कई पोर्ट और हवाईअड्डों पर आधिपत्य ज़माने वाले अडानी ने जिस तरीक़े से गंगावरम पोर्ट के शेयर होल्डरों से सौदे किये हैं उस पर सवाल उठाये गए हैं । इस साल मार्च में अडानी ने 3,604 करोड़ रुपये के 58.1 फीसदी शेयर जब उद्योगपति डीवीएस राजू से खरीदे थे तभी से ये कयास लगाए जा रहे थे कि वो इस पोर्ट में आंध्र सरकार की हिस्सेदारी भी लेकर रहेंगे। जानकारों का कहना है कि जगन, अपनी सरकार का शेयर अडानी के हाथ बेचना नहीं चाहते थे लेकिन दिल्ली के दबाव के चलते उन्होंने कथित तौर पर सारे शेयर सिर्फ 644 करोड़ रुपये में अडानी को सौंप दिए हैं। 

 

 

मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की इस डील को लेकर जहाँ आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने सवाल उठाये हैं वहीँ विपक्ष ने भी हंगामा खड़ा किया है। सीपीएम ने तो यहाँ तक कह दिया कि मोदी सरकार के दबाव में जगन ने गंगावरम पोर्ट जबरदस्ती अडानी को दे डाला। सीपीएम नेता नरसिंग राव ने कहा कि मोदी सरकार के बलबूते अडानी ग्रुप आंध्र के संसाधन और असेट लूट रहा है। ' अडानी ने पहले हमारे यहाँ नवयुग कम्पनी से कृष्णापट्टनम बंदरगाह ज़बरदस्ती हथिया लिया और अब सरकार से गंगावरम बंदरगाह भी ज़बरदस्ती हासिल किया है,' नरसिंग राव ने कहा ।

 

 

 इस वामपंथी नेता का कहना था कि अडानी के मालिक बनते ही अब सभी अहम बंदरगाहों पर निर्यात व आयात शुल्क और जल परिवहन शुल्क में भारी वृद्धि की जाएगी। अडानी ने पहले ही गंगावरम बंदरगाह में चूना पत्थर की आवाजाही की कीमतें बढ़ा दी है। उधर विपक्ष का कहना है कि इस डील से अब राज्य की आमदनी कम होगी क्यूंकि राज्य ने पोर्ट में अपना हिस्सा गंवा दिया है। 

 

 

आंध्र के एक वरिष्ठ पत्रकार ने देश 24x7 को बताया कि जगन ने जिस तरह पोर्ट की डील में समझौता किया है वो एक तरह से उनकी मजबूरी थी। दरअसल जगन के पिता वाईएसआर जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तभी से उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं । जगन, सीबीआई के एक मामले में कई महीनों तक जेल में रहे और उन पर केंद्र की कई वित्तीय एजेंसियां भी जाँच कर चुकी हैं। जगन ने राजनीति में जिस तरह से बड़ा बिज़निस शुरू किया, सीमेंट कारखाने लगाए और टीवी चॅनेल खोले उसे लेकर वे विपक्ष के निशाने पर रहे हैं। ऐसा कहा जाता है कि बेशुमार दौलत होने की वजह से वे मोदी सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के दबाव में रहते हैं। इस दबाव का अब फायदा गौतम अडानी को आंध्र प्रदेश में मिल रहा है जहाँ अडानी ग्रुप तेज़ी से विस्तार कर रहा है।       

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