नये मोटर कानून के विषय में गडकरी सभी मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे

केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करने का निर्णय लिया है, जिन्हें संशोधित कानून को लागू करने में आपत्ति है।

नये मोटर कानून के विषय में गडकरी सभी मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे

नये संशोधित मोटर वाहन कानून पर राज्यों के द्वारा हां और ना के बीच, केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करने का निर्णय लिया है, जिन्हें संशोधित कानून को लागू करने में आपत्ति है।

 

एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह भी कहा कि मंत्रालय उन कानूनी प्रावधानों के बारे में जानकारी ले रहा है, जिनके आधार पर कुछ राज्यों ने जुर्माने की रकम बदली हैं।

 

गडकरी ने यह निर्णय ऐसे समय पर लिया है जब तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश भी उन राज्यों में सम्मिलित हो गये हैं, जिन्होने यातायात नियमों का उलंघन करने के लिए संशोधित नियमों को लागू करना स्थगित किया है या जुर्माने की रकम को कम किया है या फिर उन्हें लागू करने से ही मना कर दिया है।

 

जो राज्य आक्षेप ले रहे हैं, उनका कहना है कि संशोधित सूची में जुर्माने की रकम बहुत अधिक रखी गई है। राज्यों का यह भी कहना है कि जुर्माने की रकम दस गुना तक बढ़ाई गई है, जो बहुत ज्यादा है।

 

गुजरात और उत्तराखंड जैसे भाजपा शासित राज्यों ने जुर्माने की रकमें घटाई हैं, जबकि विपक्षी दलों के द्वारा शासित राज्यों मध्यप्रदेश, केरल और दिल्ली ने कहा है कि वह यातायात के नये नियमों को लागू नहीं करेंगे, जुर्माने की रकम को कम करेंगे। 

 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन कठोर जुर्माने वाले नियमों को लागू करने की किसी भी संभावना से साफ इंकार किया है।

 

भाजपा शासित महाराष्ट्र, जहां कुछ समय में ही चुनाव होने हैं, उसने नये मोटर वाहन कानून को लागू करना फिलहाल स्थगित कर दिया है।

 

गडकरी की मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक इस वातावरण को समाप्त करने का प्रयास है। वह प्रत्येक मुख्यमंत्री को बुलाकर उन्हें इसके लाभ समझायेंगे। हालांकि शुरू में हमने सोशल मीडिया पर बहुत अधिक प्रतिक्रिया देखी थी, अब वह भी बदल चुकी है, मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया।

 

एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय नै उन यातायात अपराधों की सूची बनाई है, जिन्हें विभिन्न राज्यों ने कम किया है। उस सूची को कानून मंत्रालय यह जानकारी प्राप्त करने के लिए भेजा गया है कि संशोधित मोटर वाहन कानून में दिये गये जुर्माने की रकम को कम करना, क्या राज्यों के अधिकार क्षेत्र में है।

 

एक अधिकारी ने समझाने वाले अंदाज में कहा कि जुर्माने की रकम कम करने वाला गुजरात पहला राज्य है, उसने कई छूट भी दी है, जैसे पिछली सीट पर बैठने वाले के लिए हैल्मेट जरूरी नहीं है। यह निर्णय उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।

 

सिर्फ कंपाउंडिंग अपराधों में राज्य को जुर्माना निर्धारित करने की इजाजत है, वह मोटर वाहन कानून में दिये गये अन्य जुर्माने की रकम को कम नहीं कर सकते हैं। यहां तक कि कंपाउंडिंग अपराध में भी कुछ जुर्माने हैं, जिन्हें राज्य निर्धारित सीमा से कम नहीं कर सकते हैं। उन जुर्मानों में जिनमें जुर्माने की न्यूनतम राशि तय है, कंपाउंडिंग अपराध में भी उसे कम नहीं किया जा सकता। हमने इस पर कानूनी सलाह मांगी है, परिवहन मंत्रालय के अधिकारी ने कहा।

 

अधिकारियों ने आगे कहा कि जिन राज्यों ने कानून को लागू करने से मना कर दिया है, उस पर विचार करने के लिए उच्चतम न्यायालय की एक कमेटी, जिसकी सिफारिश पर कानून में कई प्रावधान जोड़े गये हैं, शुक्रवार को बैठक कर रही है, वह उन राज्यों के बारे में विचार करेगी।

 

मोटर वाहन (संशोधित) कानून, जो 1 सितंबर से प्रभावी हुआ है, उसमें पूर्व कानून के जुर्माने की रकमों में जबरदस्त संशोधन कर नये यातायात जुर्माने की रकमों की सूची बनाई गई है।

 

केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि राज्यों को जुर्माने की रकम कम करने का अधिकार है, लेकिन उन्होने यह भी कहा कि उनके निर्णय से जो भी प्रभाव पड़ेंगे, उसके लिए वही जिम्मेदार होंगे।

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