इधर मोदी ब्रिटेन में उधर ब्रिटिश मीडिया के निशाने पर आ गए अडानी, जाने क्यूँ ?

गार्डियन से लेकर डेली मेल जैसे अखबारों में अडानी की आलोचना ऐसे वक़्त पर हो रही है जब पीएम मोदी, ग्लास्गो समिट में अहम मेहमान के तौर पर बुलाये गए हैं

 इधर मोदी ब्रिटेन में उधर ब्रिटिश मीडिया के निशाने पर आ गए अडानी, जाने क्यूँ ?
Desh 24X7
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November 2,2021 12:08

क्लाइमेट चेंज को लेकर लंदन साइंस म्युज़ियम को स्पॉन्सरशिप देने का करार अडानी समूह के लिए किरकिरी का सबब बन रहा है।इस विवादास्पद स्पॉन्सरशिप को लेकर अडानी समूह को आजकल ब्रिटिश मीडिया में बदनामी का सामना करना पड़ रहा है। 

कोयला खदानों का धंधा करने वाले अडानी का इस बात पर लंदन में ज़बरदस्त विरोध हो रहा है कि प्रदूषण फ़ैलाने वाले कारोबारी को जलवायु परिवर्तन के अभियान में जगह नहीं दी जा सकती है । ऐसा कहा जा रहा है कि अडानी समूह ने म्युज़ियम को स्पॉन्सरशिप की मोटी रकम इसलिए दी थी कि लंदन से 400 मील की दूरी पर हो रहे 'ग्लास्गो समिट' में समूह की चर्चा हो जहाँ प्रधानमंत्री मोदी को भी मंच साझा करने के लिए बुलाया गया है।

 

 

लंदन म्युज़ियम की ग्रीन गैलरी स्पांसर करने वाले अडानी समूह के विरोध में म्युज़ियम के कई अहम सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया जिसका जिक्र ब्रिटेन के सभी प्रमुख अख़बारों  में हुआ। ख़बरों के मुताबिक साइंस म्यूज़ियम ग्रुप के ट्रस्टी बोर्ड के दो सदस्यों ने अडानी समूह के प्रायोजन स्वीकार करने के लंदन म्युज़ियम  के फैसले पर इस्तीफा दे दिया।

कार्यकर्ताओं ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा था कि म्युज़ियम को जीवाश्म ईंधन (फॉसिल फ्यूल)  कंपनियों के साथ गठजोड़ नहीं करना चाहिए। अब यह सामने आया है कि इस विचार को कम से कम दो ट्रस्टियों ने साझा किया था।

 

 

भारतीय ऊर्जा कम्पनी अडानी के साथ साझेदारी करने के संग्रहालय के फैसले से असहमत होने के बाद  बोर्ड के सदस्य ,जो फोस्टर और हन्ना फ्राई ने इस्तीफा दे दिया। 19 अक्टूबर को, विज्ञान संग्रहालय ने घोषणा की थी कि नई गैलरी को 'ऊर्जा क्रांति: अडानी ग्रीन एनर्जी गैलरी' कहा जाएगा। प्रायोजक, अडानी  ग्रीन एनर्जी, अडानी समूह की एक सहायक कंपनी है जो कोयले की खदानो से लेकर और कोयले से बनने वाली बिजली के थर्मल पावर प्लांट चलाने में शामिल है।

 

 

म्युज़ियम के ट्रस्टी  बोर्ड की अध्यक्ष डेम मैरी आर्चर ने 30 अक्टूबर को जारी एक बयान में कहा कि उन्होंने फोस्टर एंड फ्राई के इस्तीफे को 'अनिच्छा से स्वीकार' किया था। उन्होंने कहा कि बोर्ड पूरी तरह से वैज्ञानिकों के पद छोड़ने के फैसले का सम्मान करता है, 'जो कि अडानी  ग्रीन एनर्जी से प्रायोजन स्वीकार करने पर हाल की बोर्ड चर्चा के दौरान व्यक्त किए गए विचारों को दर्शाता है'।

 

 

दिल्ली के एक अंग्रेजी चैनल  के अनुसार, फ्राई,  यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। उन्होंने  कहा, 'मैं अडानी के साथ हालिया समझौते का समर्थन नहीं करती और मुझे लगता है कि संग्रहालय को जीवाश्म ईंधन प्रायोजन पर अपने रुख का विरोध करने वाली उचित चिंताओं के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने की जरूरत है ताकि यह जलवायु पर राष्ट्रीय बातचीत में एक नेता के रूप में अपनी महत्वपूर्ण स्थिति को बरकरार रख सके।'

 

 

बहरहाल अडानी ग्रुप की जब लंदन में किरकिरी हो रही थी और ब्रिटिश मीडिया में ग्रुप के बारे में आलोचनात्मक समाचार छप रहे थे  उसी वक़्त प्रधानमंत्री मोदी भी ब्रिटैन पहुंचे जिन्हे गलस्गो समिट में क्लाइमेट चेंज पर बोलना था। अडानी ग्रुप चेयरमैन गौतम अडानी के बारे में कहा जाता है कि  वे प्रधामंत्री मोदी के करीबी  है।मौजूदा समय में केंद्र सरकार के तहत आनेवाले कई एयरपोर्ट और पोर्ट को ऑपरेट करने के खरबों रुपये के ठेके अडानी ग्रुप को ही मिले है। 

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