किसान आन्दोलन खत्म होगा या नहीं, आज हो जाएगा फैसला

टिकैत ने कहा अगर 1 जनवरी तक MSP पर कानून नहीं बनता, तो ये मुद्दा किसानों के आंदोलन की मांग का हिस्सा बन जाएगा। हालांकि टिकैत ने यह भी कहा कि सरकार इस मामले में पीछे नहीं हटेगी।

किसान आन्दोलन खत्म होगा या नहीं, आज हो जाएगा फैसला

तीन कृषि कानूनों की वापसी के बाद किसानों की मांग  एमएसपी (MSP) कानून बनाने की है। सरकार एमएसपी (MSP) को लेकर भी बातचीत के लिए तैयार हो गई है। केंद्र सरकार ने संयुक्त किसान मोर्चा को बातचीत का प्रस्ताव भेजा है। उसने किसान मोर्चे से अपने 5 नेताओं के नाम देने के लिए कहा है। यह नेता सरकार के साथ बातचीत करेंगे, जिसके बाद एमएसपी कानून की रूपरेख तय होगी। 

 

 

संयुक्त किसान मोर्चा की सिंघु बॉर्डर पर 4 दिसंबर को अहम बैठक होने जा रही है। इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य(MSP) और किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। सबसे बड़ा सवाल किसान आंदोलन खत्म होगा या नहीं, इसे लेकर है। किसान नेता राकेश टिकैत MSP पर गारंटी नहीं मिलने तक आंदोलन पर अड़े हुए हैं, जबकि पंजाब के किसान आंदोलन खत्म करने की बात कर रहे हैं। ऐसे में किसानों में दो गुट बन गए हैं।3 दिसंबर को किसान नेताओं ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के घर पर लंबी मीटिंग की।  किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि बातचीत का कोई हल नहीं निकला। बैठक चंडीगढ़ में शाम 5 से रात 9 बजे तक चली। इस बैठक में किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और मृत किसानों के परिजनों को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने, कुंडली बॉर्डर पर स्मारक बनाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

 

 

हम आपको बता दें, तीनों कृषि कानून रद्द होने के बाद चौतरफा दबाव में घिरे किसान नेता राकेश टिकैत ने 30 नवंबर को ऐलान किया था कि दिसंबर के अखिर तक किसान आंदोलन खत्म हो जाएगा। मीडिया के पूछने पर टिकैत ने कहा कि PM ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए अपनी जुबान दी है। अगर 1 जनवरी तक MSP पर कानून नहीं बनता, तो ये मुद्दा किसानों के आंदोलन की मांग का हिस्सा बन जाएगा। हालांकि टिकैत ने यह भी कहा कि सरकार इस मामले में पीछे नहीं हटेगी।

 

 

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  गुरुनानक देवजी की 552वीं जयंती पर 19 नवंबर को तीनों कृषि कानून रद्द करने का ऐलान किया था। इसके बाद संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन 29 नवंबर को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कृषि कानून समाप्त करने वाले विधेयक 2021 को दोनों सदनों में पेश कर दिया था। उसे मंजूरी के बाद राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर करने भेज दिया गया है।

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