जियो ने क्यों बंद की फ्री कॉलिंग, क्या होता है IUC चार्ज, समझिए पूरा गणित

जियो ने क्यों बंद की फ्री कॉलिंग, क्या होता है IUC चार्ज, समझिए पूरा गणित
Desh 24X7
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October 10,2019 04:25

अगर आप एक रिलायंस जियो यूजर हैं तो 10 अक्तूबर से आपको एयरटेल या वोडाफोन समेत दूसरी किसी अन्य कंपनी के मोबाइल यूजर्स को फोन करने पर प्रति मिनट के हिसाब से छह पैसे देने होंगे। हालांकि, अगर आप रिलायंस जियो इस्तेमाल करते हैं तो किसी अन्य जियो यूजर को फोन करने पर आपको कुछ भी नहीं देना होगा।

 

जियो ने दूसरे नेटवर्क में कॉल करने के लिए 10 रुपये से लेकर 100 रुपये तक के रिचार्ज वाउचर उपलब्ध कराए हैं। इन वाउचरों का इस्तेमाल करने पर जियो उपभोक्ता को कुछ आईयूसी मिनट मिलेंगे। लेकिन आईयूसी के वाउचर पर जियो यूजर जितना पैसा खर्च करेंगे, उसके बदले में जियो उन्हें उतनी ही कीमत का डेटा फ्री में देगा।

 

आईयूसी चार्ज क्या है?

 

आईयूसी यानी इंटर कनेक्शन यूजेज चार्ज वह राशि है जो दो टेलीकॉम कंपनियां अपने ग्राहकों की आपस में बातचीत कराने के लिए वसूलती हैं। सरल शब्दों में कहें तो अगर आपका कोई दोस्त एयरटेल का सिम यूज करता है और आप रिलायंस जियो का सिम यूज करते हैं तो जब भी आप अपने रिलायंस जियो वाले फोन से एयरटेल वाले नंबर पर फोन करेंगे तो जियो को आईयूसी चार्ज के रूप में एयरटेल को छह पैसे प्रति मिनट की दर से एक राशि अदा करनी होगी।

 

रिलायंस ने अपनी लॉन्चिंग के बाद से अब तक आईयूसी के रूप में दूसरी टेलिकॉम कंपनियों को 13,500 करोड़ रुपये दिए हैं। रिलायंस ने ये भी बताया है कि जियो नेटवर्क पर हर रोज 25 से 30 करोड़ मिस्ड कॉल आती हैं। इसके बाद रिलांयस जियो के नंबरों से हर रोज 65 से 70 करोड़ मिनट की कॉल दूसरे नेटवर्क पर की जाती हैं। ऐसे में जियो को इन कंपनियों को आईयूसी चार्ज के रूप में छह पैसे प्रति मिनट देने पड़ रहे हैं।

 

जियो ने क्यों उठाया ये कदम?

 

जियो ने कहा है कि आईयूसी शुल्क पर टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया की बदलती नीतियों की वजह से वह ये फैसला लेने के लिए मजबूर हुई है। वो लगातार एक लंबे समय से आईयूसी के रूप में बड़ी राशि दूसरी कंपनियों को दे रही है। वे ये मानकर चल रही थी कि साल 2019 के बाद आईयूसी चार्ज ख़त्म कर दिया जाएगा।

 

ट्राई ने अब इस विषय पर सभी स्टेक होल्डर्स के विचार मांगे हैं। लेकिन अगर आईयूसी चार्ज के इतिहास पर नजर डालें तो साल 2011 के बाद से आईयूसी चार्ज को खत्म करने को लेकर कवायद जारी है। साल 2017 में ट्राई ने प्रति मिनट आईयूसी चार्ज को 14 पैसे से घटाकर छह पैसे किए थे। ट्राई ने ये भी कहा था कि एक जनवरी, 2020 से इस शुल्क को पूरी तरह ख़त्म कर दिया जाएगा। हालांकि, ट्राई ने ये भी कहा था कि इस मसले पर एक बार फिर पुनर्विचार किया जा सकता है।

 

ऐसे में सवाल उठता है कि जब जियो ने साल 2016 में अपनी लॉन्चिंग के दौरान कहा था कि वह वॉइस कॉलिंग के लिए कभी भी अपने ग्राहकों से पैसे नहीं लेगा। और अब यूजर बेस के लिहाज से रिलायंस देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है तो उसने ऐसा फैसला क्यों लिया। टेलीकॉम मामलों के जानकार प्रशांतो बनर्जी मानते हैं कि रिलायंस जियो अब उस दौर से निकल चुकी है जब वह किसी तरह का नुकसान बर्दाश्त कर सके।

 

वो बताते हैं, 'रिलायंस इस समय निवेश के दौर से आगे निकल चुका है। ऐसे में रिलायंस अब इस स्थिति में नहीं है कि वह आईयूसी के रूप में अपने ख़जाने से पैसा खर्च करता रहे। वह अब फायदा कमाने के दौर में है। ऐसे में वह ये नहीं चाहेगी कि ट्राई के आने वाले फैसले की वजह से उसे किसी भी तरह का नुकसान हो। इसलिए रिलायंस ने अपनी नीति में बदलाव किया है।'

 

क्या इससे रिलायंस को फायदा होगा?

 

पहली नजर में देखें तो ऐसा लगता है कि रिलायंस को इससे किसी तरह का कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि जियो अपने यूजर्स से जो पैसा लेगा, वह पैसा वो एयरटेल या दूसरे टेलिकॉम ऑपरेटर्स को देगा। इसके साथ ही वह आईयूसी वाउचर पर हुए खर्च के बदले में फ्री डेटा भी देगा। लेकिन आईयूसी के गणित को समझें तो पता चलता है कि इससे उस कंपनी को फायदा होता है जिसका यूजर बेस ज्यादा होता है। रिलायंस जियो की आधिकारिक प्रेस रिलीज के मुताबिक, जियो के पास इस समय 35 करोड़ यूजर्स हैं। वहीं, ट्राई के मुताबिक, एयरटेल के पास 30 करोड़ यूजर्स हैं।

 

पहली नजर में एयरटेल और रिलायंस जियो में यूजर्स के लिहाज से बड़ा अंतर दिखाई नहीं देता है। लेकिन रिलायंस जियो लगातार नई और आकर्षक योजनाएं लागू करके धीरे-धीरे एयरटेल को पीछे छोड़ता हुआ दिख रहा है। प्रशांतो बनर्जी बताते हैं, 'ये सही है कि इस फैसले से रिलायंस को सीधा-सीधा कोई बड़ा फायदा होता नहीं दिख रहा है।

 

रिलायंस की सभी योजनाएं आईयूसी चार्ज के ख़त्म होने पर टिकी हुई थीं। लेकिन ये बात भी सही है कि साल 2017 में जब ट्राई ने आईयूसी को कम करने का फैसला किया था तब रिलांयस को इसका बहुत फायदा मिला था। तब जियो उपभोक्ताओं की संख्या काफी कम थी।' 'लेकिन हम एक चीज को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं कि रिलायंस के इस फैसले के बाद जियो यूजर्स के कम होने की जगह बढ़ने की संभावना नजर आती है। अगर एक परिवार के पांच लोगों में से तीन के पास जियो है तो इस फैसले के बाद बाकी बचे दो लोगों के जियो में शामिल होने की संभावनाएं प्रबल होती दिख रही हैं।'

jio reliance mukesh ambani