कैबिनेट ने उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 31 से बढ़ाकर 34 करने को मंजूरी दी

31 जुलाई को न्यायालय में न्यायधीशों की संख्या, मुख्य न्यायधीश सहित 31 से बढ़ाकर 34 करने का निर्णय लिया है।

कैबिनेट ने उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 31 से बढ़ाकर 34 करने को मंजूरी दी

एक बार संसद में न्यायधीशों की संख्या बढ़ाने का विधेयक पारित होने के बाद उच्चतम न्यायालय में न्यायधीशों की संख्या मुख्य न्यायधीश सहित 34 हो जायेगी, मंत्री ने पत्रकारों को मंत्रिमंडल की बैठक के बाद बताया।

 

वर्तमान में उच्चतम न्यायालय में सरलीकृत संख्या के अनुसार 31 न्यायधीश हैं।

 

द सुप्रीम कोर्ट (नम्बर आफ जजेस) एक्ट 1956 में पिछला संशोधन न्यायधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 2009 में किया गया था। उस समय न्यायधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर मुख्य न्यायधीश सहित 31 कर दी गई थी।

 

मंत्रिमंडल ने यह निर्णय मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर सर्वोच्च अदालत में न्यायधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए कहने के कुछ दिन बाद लिया है।

 

कानून मंत्रालय द्वारा राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा गया कि उच्चतम न्यायालय में बकाया मुकदमों की संख्या 11,59,331 है।

 

न्यायधीशों की कमी के कारण, जितनी संख्या में महत्त्वपूर्ण कानून से संबंधित मामलों में निर्णय लेने के लिए, संविधान पीठों का गठन किया जाना चाहिए वह नहीं हो पा रहा है, मुख्य न्यायधीश ने कहा। आप बहुत पहले  तीन दशक पहले 1988 में याद करेंगे, उस समय उच्चतम न्यायालय में न्यायधीशों की संख्या 18 से बढ़ाकर 26 की गई थी। उसके दो दशकों बाद 2009 में उसे बढ़ाकर मुख्य न्यायधीश सहित 31 कर दिया गया, ताकि केसों का निपटारा शीघ्रता से, उनके दाखिल किए जाने वाली संख्या के अनुरूप किया जा सके, उन्होंने लिखा था।

 

मैं प्रार्थना करता हूं कि उच्च प्राथमिकता देकर उच्चतम न्यायालय में न्यायधीशों की उपयुक्त संख्या बढ़ाने के लिए विचार किया जाएगा, ताकि उच्चतम न्यायालय का कार्य अधिक सक्रियता वह प्रभावी ढंग से किया जा सके, क्योंकि इसे मुकदमा दाखिल कराने वालों को समय पर निर्णय देने के उद्देश्य को पूरा करने में अभी बहुत समय लगना है, न्यायधीश गोगोई ने लिखा था।

 

द सुप्रीम कोर्ट (नम्बर आफ जजेस) एक्ट 1956 के मूल रूप में न्यायधीशों की अधिकतम संख्या मुख्य न्यायधीश को छोड़कर 10 है, जिसे 1960 में एक संशोधन के द्वारा बढ़ाकर 13 किया गया और फिर 1977 में 17 किया गया।

 

लेकिन मंत्रिमंडल ने उच्चतम न्यायालय के कार्यकारी न्यायधीशों की संख्या, मुख्य न्यायधीश को छोड़कर 1979 तक 15 न्यायधीशों पर ही प्रतिबंधित की थी। इस प्रतिबंध को भारत के मुख्य न्यायधीश की प्रार्थना पर हटाया गया।

 

वर्ष 1986 में सर्वोच्च अदालत के न्यायधीशों की संख्या बढ़ाकर 25, मुख्य न्यायधीश को छोड़कर, कर दी गई, जिसके बाद द सुप्रीम कोर्ट (नम्बर आफ जजेस) एक्ट 1956 में वर्ष 2009 में एक बार फिर संशोधन कर न्यायधीशों की संख्या को 25 से 30 कर दिया गया।