मनमोहन सिंह अर्थव्यवस्था पर राजनीतिक बयान से बचें, देशहित का विचार करें : दिनकर सबनीस

हमारी अर्थव्यवस्था अभी भी मानव निर्मित भयंकर गलतियों से उबरने में सफल नहीं हुई है, हम इस स्थिति में विमुद्रीकरण और जल्दबाजी में लागू किए गए जीएसटी के कारण पंहुचे हैं।

मनमोहन सिंह अर्थव्यवस्था पर राजनीतिक बयान से बचें, देशहित का विचार करें : दिनकर सबनीस

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रविवार को कहा कि अर्थव्यवस्था की स्थिति अत्यधिक सोचनीय है और यह मोदी सरकार में चारो तरफ फैले कुप्रबंधन की वजह से है। 

 

मनमोहन सिंह ने एक बयान जारी कर कहा, अंतिम तिमाही में जीडीपी की विकास दर 5 प्रतिशत रहने का मतलब है कि हम मंदी एक लम्बे दौर में हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत की क्षमता कहीं अधिक तेजी से विकसित करने की है।

 

भारत इस मार्ग पर आसानी से चल सकता है, इसलिए मैं सरकार से आग्रह करुंगा कि वह बदले की राजनीति को दरकिनार कर सभी विचारशील लोगों से सलाह लेकर इस मानव निर्मित संकट से अर्थव्यवस्था को बाहर निकालें, वह बोले।

 

सिंह ने कहा कि उत्पादन क्षेत्र की विकास दर 0.6% रहना बहुत ही निराश करने वाला है।

 

इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि हमारी अर्थव्यवस्था अभी भी मानव निर्मित भयंकर गलतियों से उबरने में सफल नहीं हुई है, हम इस स्थिति में विमुद्रीकरण और जल्दबाजी में लागू किए गए जीएसटी के कारण पंहुचे हैं, वह बोले।

 

वर्तमान समय में निवेशक निराश हैं, अर्थव्यवस्था के पटरी पर वापस लौटने के संकेत नजर नहीं आ रहे हैं, उन्होंने आगे कहा।

 

मनमोहन सिंह के बयान को पूरी तरह राजनीतिक बयान बताते हुए, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आर्थिक क्षेत्र से संबंधित संगठन अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनकर सबनीस ने कहा कि इसमें कोई दो मत नहीं कि पूर्व प्रधानमंत्री महान अर्थशास्त्री हैं, इसी कारण वह वास्तविकता से परिचित हैं, लेकिन राजनीतिक विवशता उन्हें सच्चाई बयां करने से रोक रही है।

 

डा मनमोहन सिंह इस समय पूरे विश्व के आर्थिक वातावरण को समझते हुए भी वह कह रहे हैं, जो उनकी पार्टी को राजनीतिक रूप से अनुकूल लगता है। वह अर्थव्यवस्था के वैश्वीकरण और उसके कारण देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले प्रभावों को भलीभांति समझते हैं। इसीलिए उन्होंने सही बातों को छिपाते हुए वर्तमान स्थिति का पूरा ठीकरा विमुद्रीकरण और जीएसटी पर फोड़ा। 

 

हमें उम्मीद थी कि पूर्व प्रधानमंत्री, अमेरिका और चीन के बीच बिगड़ते व्यापारिक रिश्तों के कारण भारत के उद्योगों पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव से बचने के लिए कुछ कहेंगे, लेकिन वह राजनीतिक बयान तक ही सीमित रह गये। मनमोहन सिंह की आयु वाले विद्वान व्यक्ति से हमें उम्मीद है कि वह राजनीति से अलग हटकर देशहित का विचार करें और सलाह दें।

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