जनरल मोटर्स के बाद फोर्ड भी बंद : बीते 4 साल में एक बड़े अमेरिकी ख्वाब का भारत में टूटना

आर्थिक मंदी के अलावा बीते दस साल में 14 हज़ार करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा फोर्ड के लिए असहनीय था। लेकिन फोर्ड और जनरल मोटर्स की बंदी, भारत से बाकि दुनिया के लिए अच्छा सन्देश नहीं है

जनरल मोटर्स के बाद फोर्ड भी बंद : बीते 4 साल में एक बड़े अमेरिकी ख्वाब का भारत में टूटना
Desh 24X7
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September 10,2021 12:11

जिस वक़्त देश के बड़े शहरों में रहीसजादे टोयोटा की SUV फॉर्च्यूनर से कहीं ज्यादा फोर्ड की भारी भरकम गाड़ी एंडेवर ज्यादा पसंद कर रहे थे तब शायद उन्हें मालूम नहीं था कि  कुछ महीने बाद फोर्ड मोटर्स, भारत में दुकान समेटने जा रही है। चार साल पहले, अमेरिका की ही जनरल मोटर्स कम्पनी ने जब अचानक भारत में अपने कारखाने बंद किये थे तो कार डीलर हक्के बक्के रह गए थे।

 

तब जनरल मोटर्स की शेवरले ब्रांड की सभी कारों की री-सेल में कीमते धड़ाम से नीचे गिर गयीं थीं। तीन-तीन साल पुरानी 18-19 लाख की शेवरले क्रूज़ जैसी शानदार गाड़ियां 4-4 लाख रुपये में बिकने पर मज़बूर हुईं थीं। अब बंदी के बाद वही हालत फोर्ड की होने जा रही है जहाँ 35-36 लाख रुपये की एंडेवर जैसी महंगी गाड़ियां, बेहद कम कीमत पर बिकने को मज़बूर होंगी । यही हाल फोर्ड के पॉपुलर मॉडल इकोस्पोर्ट का भी होगा। ग्राहक और डीलर दोनों के लिए ये खबर वाकई नुकसान भरी है। 

 

फोर्ड की भारत में दो फैक्टरियों में काम करने वाले 4000 से ज्यादा वर्कर्स में मायूसी है। हालांकि बुरी खबर सुनाने के साथ साथ फोर्ड के एमडी अनुराग मेहरोत्रा ने आश्वासन दिया कि फैक्टरियों में काम धीरे धीरे बंद होगा। इसी तरह ग्राहकों को भी सन्देश दिया कि फोर्ड आने वाले वक़्त में चालू गाड़ियों के लिए सर्विस और स्पेयर पार्ट्स के इंतेज़ाम करेगी। फोर्ड ने कुछ महंगी गाड़ियों के मॉडल अमेरिका से इम्पोर्ट कराकर भारत में बेचने की भी बात की है।  

 

फोर्ड के भारत में बंद होने की अटकलें पिछले कुछ समय से चल रही थीं।नए मॉडल बाजार में लाये नहीं जा रहे थे और सेल्स भी धीरे धीरे कम हो रही थी। अमेरिकी ऑटो कम्पनी के लिए ये भी एक नुकसान की बात थी कि कुछ मॉडल्स को छोड़कर उसकी बहुत सी कारों को भारतीय बाजार में ज्यादा महत्व नहीं मिला। 2019 में किआ मोटर और एमजी मोटर जैसे नए खिलाड़ियों के प्रवेश के साथ, बीएस 6 इंजन ने भी मुसीबत खड़ी की। इसी  तरह कोविड के चलते लॉक डाउन ने भी फोर्ड के रास्तों को मुश्किल किया। कुल मिलाकर फोर्ड का बंद होने पर ये कहना कि  उसे दस साल में 14000 हज़ार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ , भारत के ऑटो उद्योग के लिए खतरे की घंटी है। चार साल में जनरल मोटर्स और फोर्ड की भारत से विदाई, देश के बाजार को विदेशी कंपनियों के लिए नए सिरे से रेखांकित करती है। वैसे भी बड़े उद्योगों में विदेशी निवेश पिछले कुछ वर्षों की तुलना में कम ही हुआ है।     

 

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