अनुराग का वो किस्सा जब उनसे कहा गया कि तुम्हारी कहानी जेन्युइन नहीं हैं

अनुराग कश्यप बताते हैं कि जब वह स्कूल में पढ़ते थे तो उन्हें लड़के अकसर परेशान किया करते थे। उनके साथ गाली गलौच की जाती थी।

अनुराग का वो किस्सा जब उनसे कहा गया कि तुम्हारी कहानी जेन्युइन नहीं हैं

साथियों अनुराग कश्यप को आज कौन नहीं जानता, भारतीय सिनेमा का वो एक बागी निर्देशक और लेखक जिसने सिनेमा में अपनी एक अलग ही पहचान बनाई है गैंग्स ऑफ वासेपुर, घोस्ट स्टोरीज, अग्ली, बॉम्बे वेल्वेट, देवडी और ब्लैक फ्राइडे जैसी फिल्मों को बनाया और खूब प्रसिद्धि पाई आज हम आपके लिए अनुराग की जिंदगी का मजेदार किस्सा लेकर आये हैं |

 

जी हाँ, अनुराग बताते हैं-‘मैंने एक कहानी लिखी थी ‘अपेक्षित’। कहानी में एक लड़का था जो रोज इमली के पेड़ के नीचे खड़े होकर रोज इमली तोड़ने की कोशिश करता था, लेकिन उसका निशाना चूकता भी नहीं था, बस थोड़ा दूर रहता था। तो लोग उसपर हँसते थे। एक बार वह पत्थर एक लड़के को जा लगता है जो उस पत्थर मारने वाले लड़के को बुली करता था। बात में पता चलता है कि भाई वो लड़का तो प्रैक्टिस कर रहा था कि कैसे पत्थर मारे और लोगों को लगे कि इमली तोड़ रहा है। ये मैंने सिंधिया स्कूल में लिखी थी।’ उन्होंने कहा, जब इस कहानी को टीचर ने पढ़ा तो कहा कि तुम्हारे अंदर कितनी डार्कनेस है। ये कहानियाँ कभी नहीं छपीं।’

 

अनुराग बताते हैं कि -‘मुझे कहा जाता था कि तुम्हारी कहानियाँ जेन्युअन नहीं हैं, तुमने कहीं से उठाई हैं। उस वक्त मुझे जेन्युअन का मतलब नहीं पता था। मैंने डिक्शनरी में ढूंढा तो मुझे बड़ा बुरा लगा था।  फिर जब मैंने वर्ल्ड सिनेमा देखा 93 में तब मुझे लगा अरे सब ऐसे ही कहते रहते हैं, जैसे मैं सोचता हूं वैसी फिल्में तो बनती हैं दुनिया भर में, मैं जा रहा हूँ फिल्में बनाने।’

 

अनुराग कश्यप बताते हैं कि जब वह स्कूल में पढ़ते थे तो उन्हें लड़के अकसर परेशान किया करते थे। उनके साथ गाली गलौच की जाती थी। अनुराग ये भी बताते हैं कि जब वो थोड़े बड़े हुए तो वह भी दूसरों के साथ ऐसा ही करने लगे। लेकिन एक बार एक लड़के के पेरेंट्स ने जब अनुराग की खबर ली तो वह सुधर गए। उसके बाद उन्होंने किसी लड़के को परेशान नहीं किया अनुराग कहते हैं कि ‘उन पेरेंट्स की वजह से मैं खराब होने से बच गया।’

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