होटल में नौकरी करने वाले कुमार शानू को बॉलीवुड पहुंचाया था जगजीत सिंह ने

बेहतरीन आवाज के मालिक होने के बावजूद कला को परखने वाला जौहरी मिले बिना बॉलीवुड पहुंचने की राह आसान नहीं थी कुमार शानू के लिए

होटल में नौकरी करने वाले कुमार शानू को बॉलीवुड पहुंचाया था जगजीत सिंह ने
Desh 24X7
Desh 24X7

September 26,2021 06:10

फिल्म इंडस्ट्री में ढेरों सुपर डुपर हिट गाने देने वाले, पाँच फिल्मफेयर अवार्ड्स, अमेरिका से सम्मान में डॉक्टरेट डिग्री लेने वाले, पद्मश्री से सम्मानित होने वाले कुमार शानू उर्फ़ शानू दा की आवाज को परख कर उन्‍हें बॉलीवुड की दुनिया में पहुंचाने वाले थे गजल गायक जगजीत सिंह। जगजीत सिंह ने एक शाम होटल में गाने वाले लड़के की आवाज सुनी तो उसे अपने पास बुलाया, दरअसल सिंगर बनने के लिए मुम्‍बई पहुंचे कुमार शानू को फि‍ल्‍म इण्‍डस्‍ट्री का कोई भी व्‍यक्ति पहले से नहीं जानता था, अपनी आवाज को लोगों तक पहुंचाने के लिए कुमार शानू ने एक होटल में जॉब किया, शानू उस होटल में किेशोर कुमार के गाने गाते थे। 

 

 

शानू के पिता पशुपति भट्टाचार्य की बदौलत उनके सुर बहुत पक्के थे। कुमार शानू के पिता बिक्रमपुर जिले के (जो अब बांग्लादेश में है) जाने माने कम्पोज़र और गायक थे। उनकी बदौलत ही कुमार शानू का गला भी सुरीला था। अपने पिता के विपरीत, शानू दा फिल्मी गानों के ज़्यादा बड़े फैन थे, ख़ासकर किशोर दा में तो उनकी जान बसती थी। वह आठ साल की उम्र से ही तबला बजाया करते थे। इसके पीछे भी उनके माता-पिता का ही आशीर्वाद था,  कुमार शानू के सभी भाई-बहन संगीत में भी डूबे हुए थे। माता-पिता क्लासिकल सिंगर्स थे, लेकिन कुमार शानू तो किशोर दा के जबरदस्‍त फैन थे उनकी ख्वाहिश थी कि वह बॉम्बे जाकर फिल्मों के लिए गाएं, लेकिन कुमार शानू के लिए बॉलीवुड में पहली पारी खेलना इतना आसान नहीं था।

 

 

लेकिन कहते हैं न कि अगर आप पूरी शिद्दत से किसी को चाहो तो सारी कायनात आपको उससे मिलवाने के लिए एक हो जाती है’। शानू दा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। 1980 के दशक की शुरुआत में वह कुछ लड़कों के साथ मुंबई तो आ गये पर यहां काम मिलना भला कहां आसान था। आपको बता दें कि कुमार शानू का असली नाम केदारनाथ भट्टाचार्य है पर उन्हें घर में सब प्यार से शानू  कहते थे सो उन्होंने गायन में भी अपना नाम शानू भट्टाचार्य ही रखा। शानू जानते थे कि मुंबई जैसे महंगे शहर में स्ट्रगल करने के लिए भी तो बहुत पैसा चाहिए, सिर्फ टैलेंट होने से कुछ नहीं होता उस टैलेंट के बारे में लोगों को जानना भी चाहिये, आपके टैलेंट को परखने के लिए जौहरी का मिलना आवश्‍यक है।  लेकिन इस मामले में शानू दा को बहुत इंतजार नहीं करना पड़ा उन्‍हें मुम्‍बई आने के एक सप्‍ताह के अंदर ही एक होटल में गाना गाने का जॉब मिल गया। उस होटल में शानू शाम के समय किशोर कुमार के गाने गाया करते थे। 

 

कुमार शानू के दिल में बसते थे। बताया जाता है कि शानू दा के बंगाली होने की वजह से भी उनका किशोर दा से अनोखा लगाव था। जब होटल में गाने लगे तो ये बात एक-एक करके दूसरे होटलों में फैलती चली गयी कि कोई नया लड़का है जो किशोर कुमार के गाने बहुत अच्छे गाता है। यहां तक कि किशोर कुमार के पुत्र अमित कुमार से भी ज़्यादा इस लड़के की आवाज़ किशोर दा से मिलती है।

 

लोगों के बीच जब यह बात आग की तरह फैली तो शानू दा के पास काम भी बढ़ने लगा, जब काम बढ़ा तो पैसा भी जमकर बरसा। स्थिति यह हो गयी कि होटल की उनकी सैलरी से ज़्यादा तो उन्हें बतौर इनाम (नवाज़िश) मिल जाती थी। हाल यह था कि बहुत से लोग तो सिर्फ उनका गाना सुनने के लिए होटल में आने लगे थे। लेकिन कुमार शानू को तो और आगे जाना था इसलिए जब पैसा बरसने लगा तो उन्‍होंने उन पैसों को अपनी रिकॉर्डिंग पर खर्च करना शुरू कर दिया। बस यही समय था जब वेस्‍टर्न आउटडोर में भारत के गजल सम्राट जगजीत सिंह के कानों में शानू दा की आवाज पड़ी। शानू जब जगजीत सिंह के पास गये तो उनको देखकर हैरान रह गये, हैरानी वजह थी कि वही जगजीत सिंह उनके सामने थे जिनकी गजलें वे रोज गाया करते थे। 

 

 

बताते हैं कि जगजीत सिंह उन्हें अपने साथ ले गये और उन्हें ‘आंधियां’ नामक फिल्म का एक गाना दिया जो शानू दा ने पूरी मेहनत से गाया। लेकिन अफसोस ‘आंधियां’ फिल्म न बन सकी। लेकिन जगजीत जी ने शानू को नहीं छोड़ा, इसके बाद उन्‍होंने कुमार शानू को संगीत की दुनिया की मशहूर जोड़ी ‘कल्याणजी-आनंदजी’ से मिलवाया। कल्याणजी ने जब आवाज़ सुनी तो उन्हें भी अच्छी लगी। आपको बता दें कि कल्याणजी आनंदजी की दिलचस्‍पी शुरू से ही कॉन्सर्ट में बहुत थी, ऐसी ही एक कॉन्‍सर्ट की ओपनिंग की जिम्‍मेदारी उन्‍होंने कुमार शानू को दे दी। 

 

बताते हैं कि इसके अलावा फिल्मों में काम को लेकर बोले “शानू, तेरा ये नाम जो है न भट्टाचार्य, इसका कुछ करना पड़ेगा, इसकी वजह उन्‍होंने बतायी कि तू जब बोलता है तो बंगाली टोन में बोलता है लेकिन गाता बिल्कुल साफ़ है, उर्दू हो या हिन्‍दी दोनों ही शब्‍दों का गाने में इस्‍तेमाल बहुत साफ तरीके से करता है, लेकिन तेरे नाम में सर नेम अगर भट्टाचार्य लगा रहा तो लोग यह सोच कर कि कहीं यह बंगाली ऐक्‍सेंट में न गाने लगे, तुझे काम आसानी से नहीं देंगे, इसलिए नाम के आगे से भट्टाचार्य हटाना होगा। इस तरह उनका नाम रखा गया शानू कुमार, लेकिन कल्‍याणजी आनंदजी कहना था कि कई बंगाली गायक अपने नाम के आगे कुमार लगाते हैं जैसे किशोर कुमार, अमित कुमार, हेमंत कुमार तो शानू कुमार नहीं इसे पलट देते हैं, कुमार पहले, शानू बाद में इस तरह से शानू दा उस दिन से कुमार शानू हो गये।  

 

कुमार शानू को अब आगे बढ़ाने का काम शुरू हुआ तो एक दिन कल्‍याणजी आनन्‍दजी ने शानू दा को अपने यहां बुलाया, वहां एक मीटिंग हो रही थी, शानू दा ने देखा कि वहां तो सारे बड़े-बड़े लोग बैठे थे, इनमें कल्याणजी आनंदजी के अलावा गीतकार अंजान, प्रकाश मेहरा  जैसे लोग मौजूद थे। तभी शानू दा को एक कागज़ थमा दिया गया और पूछा “हिन्दी पढ़ लेते हो?” शानू दा ने हिचकते हुए जवाब दिया “हाँ, थोड़ा बहुत तो पढ़ लेता है” तो कल्याणजी बोले “इसे पढ़ो और गाओ” साथ ही आनंदजी और कल्याणजी ने हारमोनियम पर ट्यून देनी शुरु की। उन्हें लगा कि शानू अभी आधा-एक घंटा धुन समझने में, उसके हिसाब से लिरिक्स सेट करने में लगाएगा लेकिन कहते हैं कि शानू दा को ये गॉड गिफ्ट मिला है कि वह कोई भी ट्यून हो, कैसे भी लिरिक्स हों, तुरंत कैच करते हैं।  इसीलिए शानू दा मात्र दस मिनट बाद ही उस गाने को गाने लगे और जब एक बार उन्होंने सुर पकड़ा तो छा गये। 

 

कुछ समय बाद उन्हें स्टूडियो बुलाया गया और कहा गया कि “वही गाना जो तुमने उस रोज़ गाया था, वो अब प्रॉपर रिकॉर्ड करो और खुलकर गाओ, फुल थ्रोट गाओ, आवाज़ दबाना नहीं, और पूछा गया कि जानते हो न इस गाने में तुम किसको प्लेबैक दे रहे हो?”जब शानू दा ने हिचकते हुए पूछा “किसको?”...जवाब मिला “शहंशाह अमिताभ बच्चन को,  शानू को बताया गया कि उस रोज़ जो तुमने होटल में गाया था उसकी कैसेट बनाकर संजय दत्त ख़ुद अमेरिका लेकर गया, अमिताभ वहीं शूटिंग कर रहे थे, उन्होंने तुम्हारी आवाज़ सुनी और कल्याणजी को तुरंत फोन करके कहा कि इसको मेरी फिल्म के सारे गाने दे दो, मुझपर इसकी आवाज़ सूट कर रही है”।  बताते हैं कि इतने बड़े कलाकार के लिए आवाज देने जा रहे शानू दा के तो पैरों से ज़मीन ही खिसक गयी, लेकिन उन्होंने तुरंत ख़ुद को संभाला और जब वो गाना ‘मैं जादूगर, मेरा नाम गोगा” गाया तो पूरे स्टूडियो ने उनकी तारीफ की। हालांकि वह फिल्म तो नहीं चली लेकिन यह गाना खूब चला और कुमार शानू को इंडस्ट्री में जगह ज़रूर दिलवा गया।

Jagjit Singh Kumar Sanu hotel Bollywood जगजीत सिंह कुमार शानू होटल बॉलीवुड