वर्ल्ड मीडिया की नजर में मोदी सरकार की इज्जत का फालूदा बन गया !

सारी ख़बरों का अगर निचोड़ निकालें तो यही खबर बनती है कि ‘मोदी सरकार किसानों के आगे झुक गई और किसानों की जीत हुई’


वर्ल्ड मीडिया की नजर में मोदी सरकार की इज्जत का फालूदा बन गया !

नरेंद्र मोदी सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिया है। भारत में इसकी चर्चा बहुत ज्यादा हो रही है लेकिन इसके साथ ही इसकी चर्चा दुनिया भर का मीडिया भी कर रहा है | अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और पाकिस्तान की वेबसाइट्स और अखबारों ने इसे होम पेज पर जगह दी है। सारी ख़बरों का अगर निचोड़ निकालें तो यही खबर बनती है कि ‘मोदी सरकार किसानों के आगे झुक गई और किसानों की जीत हुई’ | यहाँ हम आपको बताते हैं कि वर्ल्ड मीडिया किसान आंदोलन और इन तीन कानूनों की वापसी पर क्या कह रहा है।

 

 

ब्रिटिश अखबार the Guardian ने लिखा- 2020 में जब यह कृषि कानून लाए गए थे तो लगा था कि सरकार कृषि का पूरा ढाँचा बदलना चाहती है। देश की 60% आबादी एग्रीकल्चर सेक्टर पर डिपेंड है। लिहाजा, इस कदम पर हर किसी की नजरें थीं। हुआ भी वही, सरकार का यह कदम किसानों को नागवार गुजरा। उनका तर्क बिल्कुल वाजिब था। वो ये कह रहे थे कि जिन किसानों के लिए सरकार ने कानून बनाए, उनसे ही बातचीत क्यों नहीं की गई। इससे तो उनकी रोजी-रोटी और जिंदगी ही खतरे में पड़ गई।

 

 

CNN ने मोदी के भाषण को हूबहू पब्लिश किया। इसमें बताया कि सरकार ने इस फैसले का ऐलान एक अहम दिन किया। किसान नेता दीपका लांबा के हवाले से लिखा- यह किसानों की बहुत बड़ी जीत है। हम ये मानते हैं कि मोदी सरकार ने यह फैसला सियासी मजबूरियों के चलते लिया है।

 

 

वेबसाइट ने लिखा- भारत कृषि प्रधान देश है और कोई भी सरकार किसानों को नाराज करने का जोखिम नहीं ले सकती। अगले साल तक सात राज्यों में चुनाव होने हैं। मोदी को अगर सत्ता में रहना है तो इन चुनावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ये भी सच है कि इन सात में से छह राज्यों में अभी भाजपा सत्ता में है।

 

 

कनाडा के अखबार theglobeandmail ने लिखा- प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर चौंका दिया। उनकी एक बात पर गौर करना चाहिए। मोदी ने कहा- अब हमें नई शुरुआत करनी चाहिए। प्रकाश पर्व पर मोदी के इस ऐलान के कई मायने निकाले जा सकते हैं। इसके राजनीतिक कारण भी अहम हैं। पिछले साल सितंबर में इन कानूनों को पास किया गया था। तब से इनका विरोध हो रहा था और सरकार की परेशानियां बढ़ती जा रहीं थीं। thestar.com ने भी करीब-करीब यही नजरिया रखा।

 

 

पाकिस्तान के सबसे बड़े अखबार और वेबसाइट dawn.com ने एजेंसी इनपुट के साथ अपनी वेबसाइट पर यह खबर चलाई। हैडिंग में ही लिखा- कृषि कानूनों पर मोदी को कदम पीछे खींचने पड़े। geo.tv टीवी और tribune.com.pk जैसी अहम वेबसाइट्स की खबरों का सार भी करीब-करीब यही रहा। द डॉन ने दो सिख किसानों की एक-दूसरे को मिठाई खिलाते हुए फोटो लगाई। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के शुक्रवार को दिए राष्ट्र के नाम संबोधन का वीडियो भी लगाया। इसी में उन्होंने कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया था।

 

 

NYT ने लिखा- करीब एक साल तक चले किसान आंदोलन के सामने प्रधानमंत्री मोदी को आखिर रुख बदलना पड़ा। सरकार ने सॉफ्ट अप्रोच अपनाने का फैसला किया और विवादित कृषि कानून वापस ले लिए गए। अच्छी बात यह है कि आंदोलन कर रहे किसानों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया। आंदोलन कर रहे किसानों में सिखों की तादाद काफी ज्यादा थी। शायद यही वजह है कि मोदी ने प्रकाश पर्व पर इस फैसले का ऐलान किया।

 

 

 

world mediamodifarmers protestbjpkisanagriculture bill