तालिबान के उभरने से मिली पाकिस्तान और आतंकी संगठनों को नई ऑक्सिजन 

भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर जतायी है सुरक्षा को लेकर चिंता, पाकिस्‍तान निर्लज्‍जता से बना हुआ है तालिबान का प्रवक्‍ता

तालिबान के उभरने से मिली पाकिस्तान और आतंकी संगठनों को नई ऑक्सिजन 
Desh 24X7
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September 11,2021 02:59

 

 

भारत के पश्चिम में तेज़ी से बदल रहे समीकरण पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का मानना है कि अफगानिस्तान में तालिबान का फिर से उभरना चिंता का विषय है। सामरिक मुद्दों को लेकर राजनाथ सिंह ने शनिवार को आस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री पीटर डटन से अहम बातचीत की है। दोनो देश ये मानते है कि तालिबान के सता में आने के बाद अब इस्लामिक आतंकी  संगठन फिर से हरकत में आ सकते हैं । तालिबान की सरकार इन संगठनों को अपने राज में पनाह दे सकती है। कश्मीर घाटी में भी पाकिस्तान के सहारे ऐसे संगठन सक्रिय हो सकते हैं ।   

 

 

 

भारत जानता है कि पाकिस्तान अपना सबसे बड़ा दुश्मन भारत को समझता है और ऐसे में तालिबान के साथ किसी की भी तरह की नापाक साजिश करने से वह बाज नहीं आएगा। राजनाथ सिंह ने भारत पहुंचे पीटर डटन से इस बात की चिंता भी जताई है कि तालिबान का उदय भारत के लिए सुरक्षा के लिहाज से चिंता बढ़ाने वाला है क्योंकि तालिबान की मदद से अफगानिस्तान में बेस बनाकर कई अन्य आतंकी संगठन क्षेत्र में शांति के लिए खतरा बन सकते हैं।

 

 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रक्षा मंत्री ने हालांकि यह बात भी पुख्ता तरीके से कही है कि दुनिया के देश यह सुनिश्चित करें कि अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल किसी अन्य देश पर हमले या किसी को धमकाने के लिए नहीं होना चाहिए। राजनाथ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा है कि वह यह सुनिश्चित करें कि अफगानिस्तान पर यूएन सिक्योरिटी काउंसिल रेजोल्यूशन 2593 लागू हो।

 

 उधर ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI 5 के प्रमुख केन मैक्लम ने भी कहा है कि अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद एक बार फिर 9/11 जैसा हमला हो सकता है उनका कहना है कि अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे से आतंकवादियों का मनोबल बढ़ेगा इसलिए 9/11 जैसे हमले की आशंका जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स बता रही हैं कि अब तो पाकिस्तान बेशर्माई के साथ खुल कर यह कह रहा है कि दुनिया के देशों को अफगानिस्तान में बनने वाली तालिबान की सरकार से बातचीत करनी चाहिए, उन्हें मान्यता देनी चाहिए। ऐसा कहते हुए पाकिस्‍तान दुनिया के देशों को डराता भी है कि‍ तालिबान का साथ न देने पर नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

 

 

जानकारों का कहना है कि अब आतंकवाद के खिलाफ दुनिया के देशों को एकता दिखाने की जरूरत है साथ ही इस बात की भी जरूरत है कि वह तय करें कि आतंकवाद के समर्थन में कौन-कौन देश खड़े हैं समर्थन करने वाले देशों को अलग-थलग करते हुए उन्हें भी आतंकी देश घोषित किए जाने की आवश्यकता है। यही वह समय है जब लोकतंत्र की आड़ में आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त होकर तालिबान का पोषण और समर्थन करने वाले पाकिस्तान जैसे देश का भविष्य भी तय कर दिया जाए क्‍योंकि तालिबानी आतंकवादियों को प्रशिक्षण देने की बात हो या उनके लिए कूटनीतिक तरीके से अफगानिस्तान में घुसपैठ कराने की बात हो, पाकिस्तान की भूमिका अब छिपी नहीं है। 

 

जानकारों का कहना है कि मौजूदा स्थितियों को देखकर अब जरूरत इस बात की है कि अमेरिका को शातिराना तरीके से धोखा देने वाले तथा आतंकवाद का खुलकर समर्थन कर रहे पाकिस्‍तान को आतंकवादी देशों की लिस्‍ट में डाला जाये। इसके लिए अमेरिका सहित दुनिया के सभी शांतिपसंद देशों को एकजुटता दिखानी होगी। उन्‍हें अपने-अपने देशों के निजी स्‍वार्थ से ऊपर उठकर शेखी बघार रहे पाकिस्‍तानी नाग के आतंकवादी फन को कुचलना होगा।     

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