पूर्वांचल से खिसकती जमीन को मजबूत करने की कवायद में जुटी भाजपा!

पीएम का जल्‍दी-जल्‍दी दौरा, एक माह के धार्मिक-सांस्‍कृतिक कार्यक्रम को लेकर लगाया जा रहा गुणा-भाग, 2024 के लिए पक्‍की नींव रखने का काम 2022 की सफलता पर निर्भर

पूर्वांचल से खिसकती जमीन को मजबूत करने की कवायद में जुटी भाजपा!
आलोक पाठक
आलोक पाठक

November 29,2021 08:50

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र और भगवान भोले की नगरी वाराणसी में काशी विश्‍वनाथ कॉरिडोर लोकार्पण के मौके पर एक माह लम्‍बे धार्मिक आयोजन की तैयारियां की जा रही है। इस बारे में जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने सोमवार को कैंप कार्यालय सभागार में श्री काशी विश्वनाथ धाम यात्रा के तहत 'भव्य काशी दिव्य काशी' कार्यक्रम के तैयारियों की समीक्षा की। माना जा रहा है कि एक माह लम्‍बे इस आयोजन के पीछे का मकसद पूर्वांचल में कमजोर होती भाजपा की जमीन को मजबूती देना है। 

 

 

 

जिलाधिकारी के अनुसार  आगामी 13 दिसंबर से 14 जनवरी तक श्री काशी विश्वनाथ धाम यात्रा  का आयोजन किया जा रहा है, इस दौरान यात्रा के पहले और दूसरे दिन यानी 13 और 14 नवम्‍बर को प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी भी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में रहेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री यहीं से गोरखपुर निकल जायेंगे। काशी विश्‍वनाथ धाम यात्रा के तहत 'भव्य काशी दिव्य काशी' के क्रम में आगामी 1 दिसम्‍बर से 10 दिसंबर तक जनपद के विभिन्न स्थानों पर होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बारे में जिलाधिकारी का कहना है कि सांस्कृतिक विभाग द्वारा 1 दिसंबर को चिंता हरण गणेश सोनारपुरा व बड़ा गणेश लोहटिया 2 दिसंबर को विष्णु मंदिर ललिता घाट व बृहस्पति मंदिर दशाश्वमेध 3 दिसंबर को शीतला मंदिर शीतला घाट व शैलपुत्री देवी सरैया 4 दिसंबर को राम मंदिर खोजवा व राम मंदिर चौक, 5 दिसम्‍बर को बटुक भैरव कमच्छा व काल भैरव मंदिर, 6 दिसम्‍बर को मृत्युंजय महादेव मंदिर दारानगर व केदारनाथ मंदिर केदार घाट, 7 दिसम्‍बर को बनकटी हनुमान मंदिर आनंद पार्क व कौड़िया माई मंदिर कबीर नगर, 8 दिसम्‍बर को गोपाल मंदिर चौखंभा व संकठा मंदिर चौक, 9 दिसंबर को कर्दमेश्वर महादेव मंदिर कंदवा व गैबीश्वर मंदिर छोटी गैबी, 10 दिसंबर को अन्नपूर्णा मंदिर विश्वनाथ धाम व आदिकेश्वर मंदिर राजघाट तथा 11 दिसंबर को दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर तथा संकट मोचन मंदिर में भव्य भजन कीर्तन कार्यक्रम सायं 5:00 से 7:00 तक होगा।

 

 

इसके अलावा शिक्षा विभाग द्वारा भी रंगोली प्रतियोगिता, मतदाता जागरूकता पर स्लोगन प्रतियोगिता,  प्राचीन भारतीय सांस्कृतिक धरोहर विषय पर पेंटिंग प्रतियोगिता, सोशल नेटवर्किंग साइट वरदान या अभिशाप विषय पर डिबेट व काशी का इतिहास विषय पर क्विज प्रतियोगिता,  रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। शिक्षा विभाग द्वारा ही वाद विवाद प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता,  रंगोली प्रतियोगिता, चित्रकला प्रतियोगिता, शिव-पार्वती पर आधारित फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता,  श्लोक वाचन कविता,  नुक्कड़ नाटक, स्कूल स्तर पर शिव झांकी,  अंताक्षरी, दोहा, चौपाई श्लोक आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। शिक्षा विभाग द्वारा प्रतियोगिताओं का आयोजन विद्यालय स्तर, न्याय पंचायत स्तर, ब्लॉक स्तर एवं जनपद स्तर पर किया जाएगा तथा तत्पश्चात विजेताओं को सम्मानित भी किया जाएगा।

 

 

ये तो हुई कार्यक्रमों की बात,  बड़ा सवाल यह है कि आखिर वाराणसी में इतना लम्‍बा एक माह का धार्मिक एवं सांस्‍कृतिक कार्यक्रम करने की जरूरत क्‍या पड़ गयी। दरअसल माना यह जा रहा है कि भाजपा द्वारा अपने आंतरिक सर्वे में यह पता चला है कि इस बार पूर्वांचल में उसके लिए मुश्किलें पैदा होने वाली हैं, ऐसे में वाराणसी में इस तरह के धार्मिक आयोजन से सिर्फ वाराणसी ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल में इसका असर पड़ेगा। 

 

 

भाजपा जानती है कि धर्म का मुद्दा उसके पास ऐसा ट्रम्‍प का इक्‍का है जो कहीं भी किसी भी मसले पर अपनी प्रभावी पैठ बनाता है। हालांकि मतदाता अब पहले जैसा नहीं रहा, वह सबको पूरी गहराई के साथ नापता है, उसके बाद तय करता है कि उसे बटन कहां दबाना है। वाराणसी में एक बड़ा तबका काशी विश्‍वनाथ कॉरीडोर बनाने के दौरान तोड़े गये मंदिरों को लेकर सरकार पर सवाल उठाता है। इधर प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के भी वाराणसी के जल्‍दी-जल्‍दी दौरे हुए हैं, हालांकि कहने को वाराणसी नरेन्‍द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है, और अपने संसदीय क्षेत्र में आने का औचित्‍य तर्क की कसौटी पर तो खरा उतर सकता है लेकिन इस तथ्‍य से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि वाराणसी का मतलब सिर्फ वाराणसी तब नहीं होता है जब प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के स्‍तर का राजनेता अपने चुनावी क्षेत्र में आता है। क्‍योंकि चुनावी बेला आ रही है, ऐसे में देश के इस सबसे बड़े राज्‍य के परिणाम 2024 में होने वाले आम चुनाव की दशा और दिशा तय करेंगे।   

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